अमित को भारत को सौंप देगा नेपाल

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किडनी रैकट चालने वाले सरगना को कल बिहार में रक्सौल से करीब 60 किलोमीटर दूर नेपाल में चितवन जिले के सौराहा के जंगल में एक होटल से गिरफ्तार किया गया था. अमित की भारत के कई राज्यों की पुलिस को तलाश है. उसके पास से नौ लाख, 36 हजार भारतीय मुद्रा, एक लाख 45 हजार यूरो और 18 हजार 900 अमरीकी डॉलर बरामद हुआ था. अमित ने स्वीकार किया है कि वह अपने एजेंट पंकजा के माध्यम से नेपाल में कई अस्पताल खोलने के लिये स्थानों की तलाश कर रहा था.
अमित करोडो रूपये के अवैध अंतरराष्ट्रीय किडनी रैकेट का सरगना है और वह इसे कई वर्षों से संचालित कर रहा था. उसक नेटवर्क हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र और आंध प्रदेश के अतिरिक्त नेपाल में फैला हुआ था. उधर नयी दिल्ली में सीबीआई के निदेशक विजय शंकर ने पत्रकारों से कहा कि भारतीय चिकित्सक के हुलिया से मिलते जुलते एक भारतीय नागरिक को नेपाल में गिरफ्तार किये जाने की सूचना मिली है.
हालांकि उन्होंने कहा कि इस संबंध में अब तक औपचारिक जानकारी नहीं मिली है. उन्होंने कहा काठमांडू से अभी इस संबंध में जानकारी मिलनी है कि गिरफ्तार व्यक्ति डॉ अमित कुमार ही है. उन्होंने कहा कि हम इस मामले में इंटरपोल नेपाल और भारतीय दूतावास के साथ काम कर रहे और इसकी पुष्टि करने की कोशिश कर रहे है कि गिरफ्तार व्यक्ति डॉ अमित कुमार ही है और उसे यहां लाने में उनकी मदद चाहते हैं.
कांग्रेस ने मानव अंगों के अवैध धंधे को घृणित अपराध बताते हुये सरकार से इससे संबंधित कानून को सख्त बनाने तथा इस काम में लगे लोगों को कड़ा से कड़ा दंड देने की मांग की है. कांग्रेस प्रवक्ता जयंती नटराजन ने आज पार्टी की नियमित ब्रीफिंग में कहा कि मानव अंगों के प्रत्यारोपण के संबंध में 1994 में बना कानून इस तरह के मामलों को रोकने में पूरी तरह विफल रहा है. सरकार को इस के प्रावधानों पर नये सिरे से विचार कर इसे और सख्त बनाना चाहिये.
किडनी कांड के सरगना की गिरफ्तारी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये उन्होंने कहा कि इस कांड से समाज का एक गंदा और घिनौना चेहरा हमारे सामने आया है. उन्होंने कहा कि न केवल इस कांड के सरगना बल्कि इस पूरे नेटवर्क में शामिल लोगों का पता लगाकर उन्हें कड़ा दंड दिया जाना चाहिये.उन्होंने कहा कि मानव अंग प्रत्यारोपण से संबंधित कानून बहुत ही लचर है तथा इसमें दोषियों के लिये ज्यादा से ज्यादा सात वर्ष की सजा का प्रावधान है जो काफी नहीं है.


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