हिंसा रोकने में नाकाम रही सरकारः आयोग
नई दिल्ली, 9 फरवरीः राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम में किसान आंदोलन के दौरान सत्तारूढ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) समर्थकों की ओर से की गयी हिंसा को रोक पाने में विफलता के लिये सीधे तौर पर राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराया है.
नंदीग्राम की घटना पर आयोग ने अपने जांच दल की रिपोर्ट के आधार पर कल अपनी टिप्पणी में यह बात कही. इस बारे में आयोग ने अपनी समीक्षा रिपोर्ट में कहा कि नंदीग्राम में आंदोलनरत किसानों पर 14 मार्च 2007 को पुलिस गोलीबारी की घटना के बाद पुलिस और प्रशासन ने स्थानीय लोगों का विश्वास खो दिया.
गौरतलब है कि राज्य सरकार द्वारा नंदीग्राम में विशेष आर्थिक क्षेत्र बनाये जाने के विरोध में गत वर्ष मार्च में किसान आंदोलन के दौरान माकपा समर्थकों की हिंसा और निर्दोष ग्रामीणों पर की गयी पुलिस गोलीबारी की जांच के लिये आयोग ने नवंबर 2007 में यह जांच दल भेजा था. आयोग के अध्यक्ष न्यायमिर्ति एस राजेन्द्र बाबू और सदस्य आर एस काल्हा तथा पी सी शर्मा की इस रिपोर्ट में नंदीग्राम के घटनाक्रम को तीन चरणों में विभाजित किया गया है.
रिपोर्ट में कहा है कि नंदीग्राम में तीन जनवरी 2007 को भूमि अधिग्रहण के खिलाफ शुरू हुये किसानों के विरोध के बाद 14 जनवरी को हुयी पुलिस फायरिंग के बीच की अवधि में कानून व्यवस्था पर प्रशासन की पकड ढ़ीली होनी शुरू हो गयी थी.
रिपोर्ट में 15 मार्च 2007 के बाद छह नवंबर को नंदीग्राम पर माकपा समर्थकों द्वारा धावा बोले जाने के बीच की अवधि को तूफान के बाद की शांति का समय बताया. रिपोर्ट के अनुसार माकपा समर्थकों ने इस अवधि का इस्तेमाल किसान आंदोलन का नेतृत्त कर रही भूमि उच्छेद प्रतिरोध समिति के खिलाफ हथियार जुटाने और असामाजिक तत्वों को खड़ा करने के लिये किया तथा पुलिस इस दौरान मूकदर्शक बनी रही.


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