अब कुछ नदियां भी होंगी राष्ट्रीय सम्पत्ति

Saifuddun Soz
नई दिल्ली, 31 जनवरीः जल विद्युत क्षमता के दोहन तथा सिंचाई क्षमता के संवर्द्धन के लिये केन्द्र सरकार की योजना कुछ नदियों को राष्ट्रीय सम्पत्ति के रूप में अपनाने की है. राज्यों के बीच जल विवाद के नहीं सुलझ पाने तथा बड़े पैमाने पर जल विद्युत क्षमता का समुचित दोहन नहीं हो पाने को ध्यान में रखकर यह योजना अपनायी जायेगी.

जल संसाधन मंत्री सैफुद्दीन सोज ने आज यहां सोशल एडीटर्स कांफ्रेस में संवाददाताओं से कहा अब हम कुछ नदियों को राष्ट्रीय सम्पत्ति के रूप में अपनाने की योजना पर काम कर रहे हैं. उन्होंने यह स्पष्ट किया कि केन्द्र नदियों का राष्ट्रीयकरण नहीं चाहता. वे राज्य का विषय ही रहेंगे.

सोज ने बताया कि केन्द्र 90 प्रतिशत धन सुलभ करायेगा. उन्होंने कहा कि केन्द्र की मंशा है कि कुछ नदियों की पहचान बेहतर संरक्षण और बेहतर उपयोग के रूप में हो और हम उनके साथ राष्ट्रीय सम्पत्ति की तरह पेश आयें.

उन्होंने कहा कि मंत्रियों के एक समूह ने इस मुद्दे पर गौर किया. समूह में केन्द्रीय वित्त मंत्री, कृषि मंत्री और योजना आयोग के उपाध्यक्ष शामिल हैं. उन्होंने कहा मुझे उम्मीद है कि केन्द्रीय मंत्रिमंडल जल्द ही प्रस्ताव को स्वीकार कर लेगा.

सोज ने कहा कि उनका मंत्रिमंडल ऐसी नदियों की पहचान के लिये विश्वसनीय वैज्ञानिक आधार पर काम कर रहा है. उन्होंने कहा कि यमुना जैसी कुछ नदियों में इतनी गंदगी है कि उन्हें साफ करने उनका पानी पीने लायक बनाने तथा बिजली और सिंचाई के लिये उनके उपयोग के प्रयास विफल रहे हैं.

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