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भारत अमेरिका परमाणु समझौते की निंदा

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Bush Manmohanवाशिंगटन 10 जनवरी: 23 देशों के 130 से भी अधिक विशेषज्ञों और गैरसरकारी संगठनों ने भारत अमरीका परमाणु करार की आलोचना करते हुए कहा है कि इससे भारत को मौजूदा वैश्विक परमाणु व्यापार मानकों में छूट मिलेगी और परमाणु अप्रसार व्यवस्था तथा परमाणु निरस्त्रीकरण के प्रयासों को धक्का लगेगा.

इन विशेषज्ञों और गैरसरकारी संगठनों ने लगभग 50 देशों की सरकारों को इस सप्ताह भेजे एक पत्र में भारत अमरीका परमाणु करार को अस्तित्व में आने से रोकने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया गया है. उनकी दलील है कि इस करार के क्रियान्वयन से परमाणु सुरक्षा व्यवस्था और कमजोर होगी तथा परमाणु शस्त्र बनाने में काम आने वाली तकनीकी के प्रसार को रोकने की कोशिशों को धक्का लगेगा. साथ ही इससे भारत के परमाणु हथियारों के भंडार में इजाफा होगा.

इस पत्र को एक अंतरराष्ट्रीय अपील बताते हुए सरकारों से भारत के साथ परमाणु व्यापार पर अतिरिक्त शर्तें और पाबंदियां थोपने का आग्रह किया गया है. इसमें भारत को मौजूदा परमाणु सुरक्षा उपायों के अलावा कोई विशेष छूट देने का पुरजोर विरोध करने की अपेक्षा सरकारों से की गई है.

पत्र पर संयुक्त राष्ट्र के निरस्त्रीकरण मामलों के पूर्व अवर सचिव और वर्ष 1995 में हुए परमाणु निरस्त्रीकरण संधि समीक्षा और विस्तार सम्मेलन के अध्यक्ष जयंत धनपाल, हिरोशिमा और नागासाकी के मेयरों, टोक्यो आधारित सिटीजंस न्यूक्लियर इनफोमेशन सेंटर और वाशिंगटन आधारित आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन सहित कई गैरसरकारी संगठनों और विशेषज्ञों के हस्ताक्षर हैं.

अपील में कहा गया है कि परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों के समूह (एनएसजी) के सदस्यों को किसी भी हालत में भारत को प्लूटोनियम प्रसंस्करण, यूरेनियम संवर्द्धन और भारी जल उत्पादन तकनीक हस्तांतरित नहीं करनी चाहिए जिसका इस्तेमाल परमाणु शस्त्र बनाने में हो सकता है. उल्लेखनीय है कि अगले कुछ दिनों में 35 सदस्यीय अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) और 45 सदस्यीय एनएसजी भारत अमरीका परमाणु करार के मुद्दे पर चर्चा करने वाले हैं.

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