ट्रेड यूनियनों ने आगामी बजट पर सुझाव दिए
नई दिल्ली 10 जनवरी: अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस के महासचिव एवं सांसद गुरुदास दासगुप्ता ने आगामी बजट को व्यापक बजट बनाने की वकालत की. उन्होंने कहा कि अगले बजट में कृषि, सामाजिक सुविधाओं, सामाजिक सुरक्षा जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा, सफाई, जलापूर्ति, सिंचाई के क्षेत्र में व्यापक योजनायें तैयार करने और इन क्षेत्रों के लिये पर्याप्त धनराशि का बजट होना चाहिये. उन्होंने कहा कि जिनमें कर देने की क्षमता है उनपर भारी कर लगाया जाना चाहिये. कंपनियों, सेवा प्रदाताओं, व्यापारियों, थोक व्यापारियों, निजी स्कूलों और नर्सिंग होम सभी से ऊंची दर पर कर वसूला जाना चाहिये. दूसरे शब्दों में धनी लोगों से गरीबों की शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार के लिये संसाधन जुटाये जाने चाहिये.
सेंटर फॉर इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) के अध्यक्ष एन.के. पंधे ने कहा कि कृषिक्षेत्र को अब तक कर दायरे से अलग रखा गया है. इस क्षेत्र से होने वाली आय को भी कर दायरे में लाया जाना चाहिये. उन्होंने राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून में बढते भ्रष्टाचार पर भी चिंता व्यक्त की. विशेष आर्थिक क्षेत्र की उन्होंने पूरी तरह से खिलाफत की. उन्होंने कहा कि इन पर तुरंत रोक लगनी चाहिये.
हिन्द मजदूर सभा के अध्यक्ष टी. थॉमस के मुताबिक लोगों का रहन सहन लगातार महंगा होता जा रहा है1 उन्होंने दो लाख पये तक की सालाना आय को करमुक्त रखने और कर की दरें कम करने की मांग की है. उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारियों को आयकर रिटर्न भरने से छूट होनी चाहिये. मजदूर संघों ने छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को जल्द से जल्द लागू करने के लिये वित्त मंत्री से आगामी बजट में उचित प्रावधान करने को भी कहा है. वेतन आयोग ने इसी महीने अपनी रिपोर्ट देने का आश्वासन दिया है.
यह रिपोर्ट एक जनवरी 2006 से लागू होनी है1 यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस ने असंगठित क्षेत्र के 42.26 करोड कर्मियों के लिये सामाजिक सुरक्षा की पक्की व्यवस्था करने का आग्रह किया है संगठन ने वृद्धावस्था पेंशन योजना. सार्वभौमिक चिकित्सा योजना को नाकाफी बताया.
इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इंटक) उपाध्यक्ष अशोक सिहं ने सरकार से कर्मचारियों के बोनस की ऊपरी सीमा समाप्त करने की मांग की है. उन्होंने कहा कि जब कंपनियों के मुनाफे की कोई सीमा नहीं है तो फिर कर्मचारियों को मिलने वाले बोनस पर अंकुश क्यों. उन्होंने आगामी बजट में देश के 40 प्रतिशत कामगार वर्ग पर ध्यान देने का आग्रह किया.


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