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नार्वे की भूमिका पुन: परिभाषित करेगा श्रीलंका

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Rohitha Bogollagamaकोलंबो 5 जनवरी: श्रीलंका में सरकार और लिबरेशन टाइगर्स आफ तमिल ईलम (लिट्टे) के बीच छह वर्ष से जारी संघर्ष विराम टूटने के बाद दोनों के बीच मध्यस्थता कर रहे नार्वे के अधिकारियों ने अपना काम समेटना शुरु कर दिया है. लेकिन श्रीलंका सरकार ने नार्वे की सराहना करते हुए उसकी भूमिका फिर से परिभाषित करने की घोषणा की है.

श्रीलंका के राष्ट्रपति महिन्द्रा राजपक्षे की सरकार ने कल देर रात नार्वे को औपचारिक रुप से सूचित किया कि वह संघर्ष विराम समाप्त करने के लिये 14 दिन का नोटिस दे रही है.

श्रीलंका के विदेश मंत्री रोहित बोगोलगाया ने कोलंबो स्थित राजनयिक समुदाय को वस्तु स्थिति की जानकारी देने के बाद संवाददाताओं को बताया कि नार्वे के अधिकारियों की भूमिका संघर्ष विराम समौते के मुताबिक तय की गयी थी. आज संघर्ष विराम समझौते का अस्तित्व नहीं होने की दशा में इस भूमिका को नए सिरे से परिभाषित करने की आवश्यकता है.

श्री बोगोलगामा ने कहा कि संघर्ष विराम समौते के खत्म होने का यह मतलब नहीं है कि नार्वे की सहायता भी समाप्त हो गयी है. उन्होंने कहा सवाल उनसे नार्वे से. अपना काम जारी रखने को कहने का नहीं बल्कि इस प्रक्रिया में उनकी भूमिका को परिभाषति करने का है. उन्होंने कहा कि नार्वे की भविष्य की भूमिका निश्चित रूप से निर्धारित की जाएगी. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि श्रीलंका नार्वे पर अपनी मर्जी से भूमिका नहीं थोपेगी. उन्होंने कहा कि हम अपने लक्ष्य की प्राप्ति में उनकी सहायता हासिल करने के लिये नार्वे की नयी भूमिका तय करने का प्रयास करेगी.

नार्वे के वार्ताकारों और कई अन्य देशों ने श्रीलंका सरकार के संघर्ष विराम समाप्त करने के निर्णय पर खेद प्रकट करते हुए इसे बेहद गंभीर बताया है. हालांकि लिट्टे की ओर से कोई प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई है.

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