पाकिस्तानी लोकतंत्र पर अनिश्चितता के बादल
इसलामाबाद, 28 दिसम्बरः.पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की हत्या के बाद देश में व्यापक पैमाने पर फैली हिंसा और उपद्रव ने मुल्क में जम्हूरियत लोकतंत्र के भविष्य पर सवालिया निशान लगा दिया है.
बेनजीर की गुरूवार को रावलपिंडी में आतंकवादियों के हमले में हुयी मौत के बाद पूरे पाकिस्तान में उग्र प्रदर्शनों और हिंसा का दौर जारी है. हिंसा से सर्वाधिक नुकसान सिंध प्रांत में हुआ है. भुट्टो का गृह प्रांत सिंध सर्वाधिक हिंसा की चपेट में है. हिंसा की यह आग थमने की बजाय और फैलती ही जा रही है.
विश्लेषकों का कहना है कि करीब दो सप्ताह पहले सैन्य वर्दी को छोडने वाले राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ मौजूदा स्थिति देखते हुए दोबारा आपात शासन लगा सकते हैं या चुनाव टाल सकते हैं.
वैसे पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री मोहम्मद मियां सूमरो ने घोषणा की है कि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आठ जनवरी को ही चुनाव होंगे और चुनाव कार्यक्रम में कोई फेरबदल नहीं किया जायेगा लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा हालात में चुनाव संभव ही नही है और अगर चुनाव कराये गये तो यह महज दिखावा होगा.
ज्ञातव्य है कि पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ् के नेतृत्व वाली पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) तथा पूर्व क्रिकेटर इमरान खान के नेतृत्व वाली पाकिस्तान तहरीके इंसाफ जैसे विपक्षी दलों ने चुनाव बहिष्कार करने की घोषणा की है.


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