वाहन सुविधा बंद करेंगी बी.पी.ओ. कंपनियां
बैंगलोर 26 दिसंबर: रुपये की बढ़ती हुई कीमतों से जिन क्षेत्रों को नुकसान उठाना पड़ा है, बी.पी.ओ. भी उनमें से एक है.
सच तो यह है कि बी.पी.ओ. कंपनियों के लिए यह समय दोहरे संकट जैसा है.
पहली समस्या यह है कि अधिकतर रात्रि शिफ्ट और अन्य असहज कार्य परिस्थितियों के कारण युवा वर्ग धीरे-धीरे बी.पी.ओ. क्षेत्र से ऊबता जा रहा है, और अब उसने इससे अलग हटकर दूसरे क्षेत्रों को अपना कार्यक्षेत्र बनाने के विकल्पों पर गौर करना प्रारंभ कर दिया है.
दूसरी समस्या रुपये की लगातार बढ़ती कीमतें हैं जिनके कारण बी.पी.ओ. कंपनियों के मुनाफे में सेंध लगनी प्रारंभ हो गई है. समस्या की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि व्यय घटाने के फेर में कंपनियों ने कर्मचारियों को दिए जाने वाली सुविधाओं में कटौती करने जैसे विकल्पों पर विचार करना प्रारंभ कर दिया है.
एक बी.पी.ओ. कंपनी में वरिष्ठ पद पर कार्यरत एक कर्मचारी ने नाम गोपनीय रखे जाने की शर्त पर बताया कि उनकी कंपनी व्यय घटाने के लिए कर्मचारियों को दिन के समय दिए जाने वाली वाहन सुविधाओं को बंद करने की योजनाओं पर विचार कर रही है. उन्होंने यह भी बताया कि आने वाले दिनों में कंपनियाँ कर्मचारियों से रात में दी जाने वाली वाहन सुविधाओं के लिए एक लघु धनराशि लेना भी प्रारंभ कर सकती है.
फिर भी महानगर में हाल ही में हुए प्रतिभा शेट्टी बलात्कार तथा हत्याकांड को ध्यान में रखते हुए बी.पी.ओ. कंपनियाँ महिला कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह जागरुक हैं. ऐसे संकेत हैं कि वाहन सुविधा समापन जैसे कदम केवल पुरुष कर्मचारियों पर लागू होंगे, हालाँकि महिला कर्मचारियों को वाहन सुविधाओं का लाभ उठाते रहने के लिए थोड़ी धनराशि का भुगतान करना पड़ सकता है.
वहीं दूसरी ओर कुछ कंपनियों का मानना है कि वाहन सुविधा समाप्त करने से व्यय में बहुत अधिक फर्क नहीं पड़ेगा, इसलिए वे यह सुविधा समाप्त करने के स्थान पर कार्यावधि के घंटे बढ़ा कर अपनी आय-व्यय का संतुलन बनाने का विकल्प पसंद करेंगी.


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