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राष्ट्रीय. फिल्म वार्ता शैलेन्द्र तीन मुंबई..

By Staff
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    ार्ता शैलेन्द्र तीन मुंबई.. अपने गीतो की रचना की प्रेरणा उन्हें मुंबई के जुहू बीच पर सुबहकी सैर के दौरान मिलती थी 1चाहे जीवन की कोई साधारण सी बातक्यों न हो वह अपने गीतों के जरिये उसे भी उजागर कर देते थे 1 शैलेन्द्र अपने कैरियर के दौरान प्रोग्रेसिव रायटर्स एशोसियेशन केसक्रिय सदस्य के रूप मे जुडे रहे ् साथ ही वह इंडियन पीपुल्स थियेटर..इप्टा.. के भी संस्थापक सदस्यों में से एक थे1 शैलेन्द्र को उनके रचितगीतों के लिये तीन बार फिल्म फे यर अवार्ड से सम्मानित किया गया

    उन्हें पहला फिल्म फेयर अवार्ड वर्ष 1958 में प्रदशित फिल्म ..यहूदी ..के..ये मेरा दीवानापन है ..गाने के लिये दिया गया था1इसके बाद वर्ष1959 में प्रदशित फिल्म ..अनाड़ी.. के गाने सब कुछ सीखा हमने नसीखी होशियारी ..के लिये सर्वश्रेष्ठ गीतकार के फिल्म फेयर पुरस्कार सेसम्मानित किये गये1 इसके बाद उन्हें फिल्म फेयर पुरस्कार के लिये 9वर्ष इंतजार करना पडा और वर्ष 1968 मे प्रदशित फिल्म .. बह्चारी ..के गीत ..मै गाऊ तुम सो जाआे.. के लिये वह सर्वश्रेष्ठ गीतकार के रूपमें फिल्म फेयर पुरस्कार से नवाजे गये

    शैलेन्द्र के सिने सफर में उनकी जोडी प्रसिद्ध संगीतकार शंकरजयकिशन के साथ खूब जमी और उनके लिखे गाने जबर्दस्त हिट हुये

    इनमें से कुछ है बरसात मे हम से मिले तुम सजन . बरसात 1949 .आवारा हंॅू या गर्दिश में हॅंू आसमान का तारा हूॅ . दम भर जो उधर मुंहफेरे आवारा 1951 . ऐ मेरे दिल कहीं और चल . गम की दुनिया से दिलभर गया . दाग 1952 . ये शाम की तन्हांइयां . आह 1952 . प्यार हुआइकरार हुआ है . मेरा जूता है जापानी . मुड़ मुड़ के ना देख . रमैया वस्तावइया . इचक दाना बिचक दाना . श्री 420 1955 . जहां मै जाती हूॅवहीं चले आते हो . चोरी चोरी 1956 ये मेरा दीवानापन है . यहूदी1958 . सब कुछ सीखा हमने ना सीखी होशियारी .किसी कीमुस्कुराहटो पर हो निसार . अनाडी 1959 अजीब दास्तां है ये कहां शुरूकहां खतम . दिल अपना और प्रीत पराई 1960 . ऐ दिल प्यार कीमंजिल अब है मुकाबिल . आस का पंछी 1961 चाहे कोई मुे जंगलीकहे . जंगली 1961 . तेरी याद दिल से भुलाने चला हूॅ . हरियाली औररास्ता 1962 . याद न जाये बीते दिनों की. दिल एक मंदिर 1963 आेसनम तेरे हो गये हम प्यार में तेरे खो गये हम . आई मिलन की बेला1964 . आजा आई बहार दिल है बेकरार . राजकुमार 1964 . बोलराधा बोल संगम होगा कि नही . दोस्त दोस्त ना रहा . हर दिल जो प्यारकरेगा . मै का करू राम मुे बुड्ढा मिल गया . संगम 1964 . सजन रेूठ मत बोलो . तीसरी कसम 1967.आज की रात ये कैसी रात . अमन1967 . जोशे जवानी हाय रे हाय . एराउंड द वल्र्ड 1967 . दीवानामुको लोग कहें . दीवाना 1967 . मै गाऊ तुम सो जाआे . ब्रह्मचारी1968 और जीना यहां मरना यहां इसके सिवा जाना कहां मेरा नामजोकर 1970प्रेम नरेश रीता राम1146जारी वार्ता

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