पांच फ् ीसदी से भी कम शहरी ग्राहक देखते है वस्तुओं का एमआरपी

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नयी दिल्ली13 दिसंबर.वार्ता. देश में ग्राहकों के बीच जागरूकता की भारी कमी का आलम यह है कि शहरी क्षेत्रों के पांच प्रतिशत से भी कम ग्राहक खाद्य पदाथो.कास्मेटिक्स और अन्य एफ्एमसीजी वस्तुएं खरीदने से पहले उनका अधिकतम खुदरा मूल्य .एमआरपी. देखते है

वाणिज्य एवं उद्योग संगठन एसोचैम द्वारा कराए गए एक औचक सवर्ेक्षण में पाया गया कि किराना दुकानों और शापिंग मालों में खरीददारी करने वाले शहरी ग्राहक समय की कमी और बढती आय की वजह से लोग एमआरपी देखने की जहमत नहीं उठाते1सवर्ेक्षण में एक और रोचक बात सामने आई वह यह है कि शहरी ग्राहकों में 60 प्रतिशत महिलाएं थी जिनमें एफ्एमसीजी उत्पादों के लिए मोलभाव करने की प्रवृति नहीं थी

इस सवर्ेक्षण को जारी करते हुए एसोचैम के अध्यक्ष वेणुगोपाल एन धूत ने कहा कि देश के शहरी इलाकों में अनुमानित 35 करोड लोग रहते है जिनमें से एक तिहाई यानि 12 करोड लोग अमूमन नौकरी करते है और वह खरीदारी करने बाजार जाते है1इसमें पाया गया कि 95 प्रतिशत लोगों को दुकानदारों पर काफ्ी भरोसा होता है और वह अपने जरूरी सामानों की पर्ची दुकानदार को देने और बाद में सामान ले जाने के आदी होते है

सवर्ेक्षण में पाया गया कि अपेक्षाकृत सजग ग्राहक बढिया ब्रांड क ी वस्तुएं खरीद कर ही संतोष कर लेते है1इसके अनुसार पिछले पांच सात वषों में लोगों की आय बढने के कारण वह उत्पादकों द्वारा तय किए गए मूल्य पर सामान खरीद लेते है और मोलभाव के दौरान होने वाले हील हुज्जत से बचते है

पुनीत कैलाश जगबीर1818वार्ता

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