डेढ साल मृत बच्चा पेट में लेकर घूमती रही आदिवासी महिला
होशंगाबाद 30 नवंबर .वार्ता. आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी इसे..चमत्कार.. ही मानता है कि एक महिला मृत बच्चें को पेट में डेढ वर्षतक लेकर काम करती रही लेकिन उसका कोई दुष्प्रभाव उस.माता.परनहीं हुआ
मध्यप्रदेश के होशंगाबाद जिले के इटारसी के एक निजी अस्पतालमें 33 वर्षीय आदिवासी महिला गुलाब बाई का 22 नवंबर को आपरेशन कर मृत बच्चें को बाहर निकाला गया1 इस निर्धन आदिवासी महिला का अस्पताल में न सिर्फ नि.शुल्क उपचार हुआ बल्कि आपरेशन के दौरान एक चिकित्सक ने अपना रक्त भी दिया
आपरेशन करने वाली स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ स्वागता ब्रम्हचारी नेइसे एक चमत्कार बताया कि इतने दिनों तक पेट में मृत बच्चा होने केबावजूद महिला पर उसका कोयी विपरीत असर नहीं हुआ1 चिकित्सकोंके अनुसार गुलाब बाई अब ठीक है लेकिन वह दुबारा कभी मां नहींबन सकेगी
अस्पताल के संचालक डॉ अनिल सिंह एव डॉ सुनीता सिंह नेबताया कि डेढ साल तक मृत बच्चा गर्भाशय की जगह गुलाब बाई केपेट में .एबडामिन. में पडा था1 उन्होंने बताया कि सोनोग्राफी जांच मेंदेखने पर यह एक गोला सा लगता था1 चार चिकित्सकों की टीम ने दोघंटे तक चलेआपरेशन के बाद मृत बच्चे को बाहर निकाला
बैतूल जिले के वनग्राम धनवार निवासी बाबूराम की पत्नी गुलाबबाई ने बताया कि इससे पूर्व उसने बैतूल के जिला अस्पताल में जांचकरायी थी1 वहांडाक्टरो ने उसे पेट में मृत बच्चा होने की जानकारी दीथी और कहा कि यहां आपरेशन नहीं हो सकता इसलिए वह भोपाल यानागपुर में उपचार कराए
गुलाब बाई ने बताया कि उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं हैइसलिए वह बडे अस्पताल में उपचार नहीं करा पाए
सं0 सत्या वीरेन्द्र1605 वार्ता












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