भारतीय कामगार हो रहे खाड़ी देशों में शोषण के शिकार

दुबई,16 अक्टूबरः खाड़ी देशों में रह रहे भारतीय कामगारों की समस्याओं के निवारण और उनके लिए कल्याणकारी योजनाओं के वास्ते भारत और कतर के बीच जल्द ही एक श्रम-समझौता होने की संभावना है.

दोहा के एक अखबार के मुताबिक भारत के प्रवासी मामलों के मंत्री वायलार रवि ने इस संबंध में समझौते को अंजाम देने के लिए कतर के श्रम एवं सामाजिक मामलों के मंत्री डॉ. सुल्तान बिन हसन अल घाबित अल दोरारी को नई दिल्ली आमंत्रित किया है.संभावना है कि कतर के मंत्री या उनका कोई प्रतिनिधि ईद के बाद भारत की यात्रा पर जाएंगे.

इस बीच खाड़ी देशों में दुर्वयवहार की शिकार दो महिला कामगारों को दोहा स्थित भारतीय दूतावास ने वापस स्वदेश भेजने का फैसला किया है."द पेनिन्सुला डेली" के मुताबिक आंध्र प्रदेश की निवासी तीस वर्षीय लक्षमी, दो साल पहले कतर आई थी. उसने आरोप लगाया है कि उसका मालिक उसे काम से निकालना चाहता था इसलिए उसपर कई तरह के झूठे आरोप मढ़ दिए गए.

लक्ष्मी को उसके मालिक ने यह कहकर पुलिस के हवाले कर दिया था कि उसने श्रीलंका के एक व्यक्ति को उसके घर में बुलाया था. पुलिस ने बाद में मामले की छानबीन की तो यह आरोप निराधार साबित हुआ. पुलिस ने लक्ष्मी को वापस उसके मालिक के पास भेज दिया लेकिन मालिक ने लक्ष्मी को काम पर रखने से इंकार कर दिया.

इसी प्रकार की एक अन्य महिला ने भारतीय दूतावास में शिकायत की कि उसका शोषण किया जा रहा है. इसी को देखते हुए दोनों महिला कामगारों को स्वदेश भेजने का फैसला किया गया.गौरतलब है कि खाड़ी देशों में कार्यरत भारतीय महिला कामगारों तथा अन्य कार्यो में लगे भारतीयों के साथ दुव्र्यवहार तथा शोषण की कई घटनाएं प्रकाश में आई हैं.

अनुमानतः कतर की लगभग नौ लाख की आबादी में लगभग 1.5 लाख प्रवासी भारतीय कामगार हैं. खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था में इनका बहुत बड़ा योगदान है, लेकिन अपने देशों में भारतीया कामगारों की बढ़ती संख्या से जनसंख्या अनुपात गड़बड़ाने के डर से इन सरकारों ने बीजा में कटौती करने की नीति अपनाई है.

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