देश में प्रतिवर्ष 80 हजार गर्भवती महिलाएं मौत का शिकार
नयी दिल्ली, 14 अक्टूबरःदेश में प्रतिवर्ष 78 से 80 हजार महिलाएं गर्भावस्था के दौरान अथवा प्रसव के डेढ़ माह की अवधि और इससे जुड़ी बीमारियों के कारण असामयिक मौत का शिकार बन रही हैं. यह आंकडा प्रतिवर्ष विश्व में होने वाली मौतों 525.600 का 15 प्रतिशत है.
संयक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष के अनुसार भारत में मातृत्व मृत्यु दर 301 है और इस सूची में शीर्ष स्थानों पर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश तथा राजस्थान है जबकि केरल और तमिलनाडु में यह दर बहुत कम है.
गर्भावस्था अथवा प्रसव के दौरान अफगानिस्तान तथा सिएरा लिओन में छह में से एक, भारत में सौ में से एक महिलाएं काल के गाल में समा जाती हैं. मातृत्व मृत्यु दर के 99 फीसदी मामले विकासशील देशों में समाने आ रहे हैं.
मातृत्व और शिशु दर, गर्भ निरोधकों की अपर्याप्तता, असुरक्षित गर्भपात और दूसरे यौन जनित रोगों पर हैदराबाद में 29 अक्टूबर से तीन दिवसीय एशिया प्रशान्त सम्मेंलन का आयोजन किया जा रहा है. सम्मेलन का आयोजन यूएनएफपीए कर रहा है और इसमें एशिया प्रशान्त के विभिन्न देशों के सामाजिक कार्यकर्ता तथा विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं.


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