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मलबा गांव में बाढ के पानी पर प्रवासी पक्षी कुरजां का बसेरा

By Staff
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    बाडमेर 13 अक्टूबर .वार्ता. पश्चिमी राजस्थान के सीमावर्ती बाडमेरजिले के बाढ प्रभावित मलवा गांव में भी इस बार शरद ऋतु में आने वालेप्रवासी पक्षी कुरजां ने अपना नया डेरा जमाया है

    अब तक कुरजां पक्षी का ुण्ड पचपदरा .बालोतरा स्थित रेवाडातालाब . शिव के मानसरोवर तालाब . नागाना .कल्याणपुर इत्यादि केतालाबों में अपना डेरा जमाते रहे है1 हजारों मील का सफर तय कर यहांपहुंचने वाली कुरजां शीतकालीन प्रवास में प्रसव प्रक्रिया पूरी कर होली केबाद लौटती है

    पिछले साल अगस्त में आयी अप्रत्याशित बाढ में मलवा गांव केकरीब आठ किलोमीटर के दायरे में 25 से 30 फीट गहरे पानी का भराव हो गया था1 पानी की समुचित निकासी नहीं होने तथा वाष्पीकरण आदि कारणों से अब भी सात आठ फीट पानी करीब चार कि.मी. में फैला हुआ है1 सैकडों की तादाद में कुरजां पक्षी की अठखेलियां लोगों को आकर्षति कर रही है

    कु रंजा के इस नये पडाव स्थल के मद्देनजर मलवा को पर्यटन कीदृष्टि से विकसित करने की चर्चा जोरों पर है1 बाढ प्रभावित परिवारों कोनया मलवा में बसाने के बाद पानी के इस जमाव को ील का प दियेजाने पर जिला कलक्टर सुबीर कुमार ने भी सहमति जतायी है1 उपवनसंरक्षक अण कांत सक्सेना के अनुसार प्रवासी पक्षियों को संरक्षण केनिर्देश दिये गये है

    राजस्थान में प्रेमी युगल के बिछोह पर लोक गीतों में कुरजां गीतअत्यंत चर्चित रहा है1 बाडमेर से तेरह किलोमीटर दूर चौहटन रोड पर स्थित कुरजां गांव का तालाब कभी इन प्रवासी पक्षियों का प्रमुख आश्रय स्थल था1 शहर के नजदीक इस गांव की आबादी बढने . खनन गतिविधियों में वृद्वि से कुरजां ने अपने नाम वाले गांव से मोह छोड दिया लेकिन मलबा गांव का नया बसेरा सुकुन देने वाला है

    सं.जितेन्द्रमहेंद्र1213 वार्ता वार्ता

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