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कचरे के पुनर्चक्रण से अगले तीन साल में तैयार हो सकती है 2500 मेगावाट बिजली

By Staff
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नई दिल्ली, 11 अक्टूबरः देश के शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों से हर साल निकलने वाले करीब 4000 करोड़ टन ठोस और 500 करोड़ घन मीटर तरल कचरे के पुनर्चक्रण(रीसाइक्लिंग) से अगले तीन साल में करीब 2500 मेगावाट बिजली तैयार हो सकती है.

उद्योग एवं वाणिज्य संगठन एसोचैम और अर्नस्ट एंड यंग के भारतीय संदर्भ में जलवायु परिवर्तन विषय पर किए गए एक संयुक्त अध्ययन के अनुमान के मुताबिक अवशिष्ट ऊर्जा परियोजना लगाकर 2010 तक शहरी एवं नगरपालिका क्षेत्र के कचरे से 1500 मेगावाट और औद्योगिक कचरे से 1000 मेगावाट बिजली तैयार की जा सकती है.

इस परियोजना पर करीब 200 करोड़ रूपए की लागत आएगी. इस धन को राज्य सरकारों से सब्सिडी और विभिन्न नगर निगमों एवं स्थानीय सरकारों के माध्यम से जुटाया जा सकता है.

एसोचैम की नवीन एवं अक्षय ऊर्जा समिति के अध्यक्ष और वेस्टास आरआरबी के प्रबंध निदेशक राकेश बख्शी ने आज एक संवाददाता सम्मेलन में इस रिपोर्ट को जारी करते हुए कहा कि भारत की ऊर्जा नीति में परमाणु ऊर्जा को भी शामिल किया गया है. इसकी सहायता से 2020 तक ऊर्जा सृजन क्षमता 20 हजार मेगावाट बढानी है.

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