Motivational Story: यूएन तक हो रहे छपरा के रितेश के चर्चे
पटना। 'इकोवेशन ऐप', यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक पर आधारित है। यह बताता है कि छात्र क्या पढ़ें और कैसे पढ़ें जिससे परीक्षा में वह अच्छे नंबर्स ला सकें। इस ऐप के साथ अब कई विदेशी एक्सपर्ट भी जुड़ गए है, जो न केवल छात्रों को सलाह दे रहे हैं बल्कि उनके सवालों के जवाब भी देते हैं। ऐप में कई लर्निंग ग्रुप्स भी हैं, जिनमें छात्र विषय चुनकर पढ़ सकते हैं। दिल्ली में बैठी विशेष टीम छात्रों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहती है। इस ऐप की चर्चा छपरा से अफ्रीका तक हो रही है। 'इकोवेशन ऐप' को बनाने वाले शख्स का नाम है रितेश सिंह। छपरा के रहने वाले रितेश 2012 में आईआईटी, दिल्ली से बीटेक कर चुके हैं। इस सराहनीय कार्य के लिए बिहार सरकार से लेकर संयुक्त राष्ट्र तक संघ तक ने रितेश का विशेष अभिनंदन किया।

छपरा के रितेश ने आखिर क्यों बनाया 'इकोवेशन ऐप'
बिहार के अखबार 'प्रभात खबर' के साथ बातचीत में रितेश सिंह ने बताया कि उनका बचपन बहुत संघर्षशील रहा। वह जब 10वीं क्लास में थे, तभी उनके पिता का देहांत हो गया। उस वक्त रितेश का मन पढ़ने में नहीं लगता था। रितेश बताते हैं कि वह पढ़ाई तो करना चाहते थे, लेकिन उन्हें किताबी भाषा समझने में बड़ी परेशानी होती थी। पिता के गुजर जाने के बाद उन्होंने यह तय किया कि अब पढ़-लिखकर ही कुछ बड़ा काम करना है। उन्होंने आगे की पढ़ाई जारी रखी। इसी बीच उनके मन में पढ़ने में कमजोर बच्चों के लिए एक ऐप बनाने का विचार आया, जिससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा आसानी से प्रसारित की जा सके। मध्यमवर्गीय परिवार से होने के कारण ऐप बनाने में आने वाला खर्च जुटाना रितेश के लिए आसान नहीं कार्य नहीं था, पर उन्होंने हार नहीं मानी।

बिहार के सीएम भी कर चुके हैं तारीफ
बांका के डीएम कुंदन कुमार ने रितेश के ऐप के बारे में कहीं पढ़ा। इसके बाद उन्होंने रितेश को बुलाया और इकोवेशन ऐप के बारे में विस्तार से जानकारी ली। प्रयोग के तौर पर माध्यमिक स्कूलों में ऐप की मदद से पढ़ाई शुरू कराई गई। प्रयोग सफल होने के बाद 2017 में बिहार बोर्ड की मैट्रिक परीक्षा में बांका जिले के परीक्षार्थियों की सफलता का प्रतिशत 38 से बढ़कर 71 हो गया। बिहार के टॉप 20 विद्यार्थियों में तीन बांका से ही थे। इसके बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी तारीफ की।

यूएन ने की रितेश की सराहना, अफ्रीकी देशों में भी दी जाएगी ऐप की मदद से शिक्षा
बांका की सफलता के बाद सारण में भी इस ऐप की मदद से पढ़ाई कराई जा रही है। सारण के करीब 100 स्कूलों में इस ऐप के जरिए स्मार्ट क्लास चल रही हैं। रितेश के ऐप की चर्चा अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भी हो रही है। संयुक्त राष्ट्र के एक विशेष समारोह में रितेश बुलाया गया था, जहां सम्मानित करने के साथ ही अफ्रीका के कई देशो में इस ऐप की मदद से पढ़ाई का प्रस्ताव रखा गया। जल्द ही इस ऐप की मदद से केन्या, नाइजीरिया और कांगो जैसे देशों में छात्रों काो शिक्षा दी जाएगी।












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