हनीप्रीत थी सीबीआई की एजेंट! बाबा राम रहीम को पकड़वाने के बाद भाग गई नेपाल

Written By: Mohit
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बलात्कारी बाबा राम रहीम के साथ साये की तरह रहने वाली उनकी मुंहबोली बेटी हनीप्रीत गायब है। हनीप्रीत की न कोई खबर है और न कोई पता है। हर चीज के बारे में बताने वाले गूगल बाबा भी हनीप्रीत के बारे में कुछ नहीं बता पा रहे हैं। हनीप्रीत के बारे में हर कोई जानना चाहता है। हर कोई पूछा रहा है कहां है हनीप्रीत? कहां हैं राम रहीम की बेटी हनीप्रीत?

कहां हैं हनीप्रीत

कहां हैं हनीप्रीत

किसी को नहीं पता हनीप्रीत कहां है। कानून के लंबे हाथ भी हनीप्रीत तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। उनके खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी हो चुका है, लेकिन हनीप्रीत की कोई खबर नहीं है। जेल के बाहर हनीप्रीत को लेकर अधिकारी परेशान हैं तो जेल के अंदर बाबा को हनीप्रीत की चिंता सता रही है। बाबा के फर्जी भक्तों का कहना है कि पता नहीं पिता बिना बेटी हनीप्रीत किस हाल में होगी।

बाबा को हनीप्रीत की चिंता

बाबा को हनीप्रीत की चिंता

जेल में बैठा बलात्कारी बाबा अपनी मुंहबोली बेटी हनीप्रीत की कितनी चिंता कर रहा है इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जब बाबा से पूछा गया कि वो किससे मिलना चाहेगा तो बाबा ने सबसे पहले हनीप्रीत का नाम लिया। बाबा पर विशेष नजर रख रहे हमारे कुल्लु भाई ने खास जानकारी दी है कि हनीप्रीत सीबीआई की एंजेट थी।

भाग गई हनीप्रीत

भाग गई हनीप्रीत

कुल्लू भाई के सूत्रों की माने तो हनीप्रीत बाबा राम रहीम को पकड़वाने के लिए ही उनके डेरे में आई थी और अब उन्हें सजा दिलाने के बाद वापस चली गई है। लेकिन हनीप्रीत कहां गई है इस बात की किसी को भी खबर नहीं है।

हनीप्रीत के बारे में लगाए जा रहे हैं क्यास

हनीप्रीत के बारे में लगाए जा रहे हैं क्यास

कई लोगों का कहना है कि हो सकता है हनीप्रीत ने दोबारा से सीबीआई ज्वाइन कर ली हो। कई लोगों का मानना है कि अब हनीप्रीत राधा मां की भक्त बन सकती हैं और कुछ सालों बाद वो राधे मां को गिरफ्तार करवा सकती हैं।

बाबा से मिली हनीप्रीत

बाबा से मिली हनीप्रीत

लेकिन सवाल ये उठता है कि हनीप्रीत-बाबा के डेरे में कब आई और बाबा ने उसे डेरे में कैसे आने दिया। पेट से भरे और दिमाग से खाली कुल्लु भाई की माने तो बाबा राम रहीम को बचपन से ही शहद खाना पसंद था। बचपन में बाबा अंग्रेजी नहीं सिख पाया। लेकिन बाबा जब बड़ा हुआ तो उसने करीब एक साल और दो महीने अंग्रेजी स्पीकिंग कोर्स के बाद बाबा को इस बात का पता चल गया कि शहद को अंग्रेजी में क्या कहते हैं। भले ही आप अंग्रेजी में शहद को हनी कहते हैं

डेरे में चलते थे नीले सिक्के

डेरे में चलते थे नीले सिक्के

बाबा को यह जानकारी हुई तो उन्हें ऐसा लगा कि उन्हें मोक्ष मिल गया है। बाबा फूले नहीं समाए और सारे डेरे में हनी जैसे रंग के सिक्के चलाने का आदेश दिया। लेकिन बाबा के आश्रम में काम करने वाले ने बाबा को बताया कि शहद रंग के सिक्के बारिश में खराब हो सकते हैं, इसके बाद बाबा ने नीले रंग के सिक्के चलाने का आदेश दिया।

बाबा को पंसद था शहद

बाबा को पंसद था शहद

बाबा को दुनिया में सबसे अच्छा शहद लगता था। बाबा बार-बार शहद को हनी पुकारते तो उनके भक्त बाबा के आगे शहद रख देते। बाबा बहुत ज्यादा शहद का सेवन करने लगे। फिर कुछ दिन बाबा की सेहत गिरने लगी, इसी को लेकर डॉक्टरों ने बाबा को कम शहद यानि हनी खाने की सलाह दी।

बाबा ने बनावा दिया अस्पताल

बाबा ने बनावा दिया अस्पताल

एक दिन बाबा की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद बाबा को अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा। फिर बाबा की सेवा के लिए डेरे में ही अस्पताल बनावा गया। लेकिन बार-बार बाबा शहद या हनी बोलते।उसी दौरान बाबा पर नजर रख रहे एक अधिकारी के कहने पर एक सीबीआई अफसर का नाम बदलकर हनीप्रीत रखा गया। जब ये सीबीआई एंजेट बाबा के पास गई और अपना नाम हनीप्रीत बताया तो बाबा ने उस अपने आश्रम में जगह दे दी।

बाबा की गिरफ्तारी

बाबा की गिरफ्तारी

कुल्लु भाई की माने तो बाबा हनी पुकारते तो हनीप्रीत हाजिर हो जाती। तब जाकर बाबा ने शहद का सेवन करना बंद किया। बाबा चाहता था कि उसके आश्रम में सारे चीजों का रंग शहद के रंग का हो। यही कारण है कि जब बाबा को गिरफ्तार करके हेलीकॉप्टर में बिठाया गया तो बाबा के हाथों में शहद वाली खाने की कोई चीज थी।

(यह एक व्यंग्य है, जिसमें कुल्लु भाई की किसी बात पर भरोसा नहीं किया जा सकता।)

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English summary
humour Honeypreet Insan run off to Nepal know more about ram rahim daughter
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