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दिल्‍ली गैंगरेप: 'मैं बेहोश हो जाती फिर वो मुझे मारते और बलात्‍कार करते'

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नयी दिल्‍ली (ब्‍यूरो)। 16 दिसंबर के दिल्ली गैंगरेप मामले पर राजधानी की साकेत कोर्ट ने चारों आरोपियों को दोषी करार दिया है। चारों आरोपी मुकेश सिंह, पवन गुप्ता, विनय शर्मा और अक्षय ठाकुर दोषी पाए गए हैं। सजा पर बहस जारी है और थोड़ी ही देर में फैसला आ जायेगा। खैर इन दरिंदों ने जो गुनाह किया उसके लिये तो सजा ए मौत भी उनके लिये कम है। अदालत में दलीलें दी जा रही हैं, गैंगरेप पीडि़ता के बयान को भी सामने रखा जा रहा है मगर दलीलों के बीच वो दर्द दब गई है जिसे देश की बिटिया दामिनी ने सहा था।

उस दर्द को सुनकर आपके रूह कांप जायेंगे। राजधानी की सड़कों पर चलती बस में दरिदों ने एक घंटे तक वहशपीन का जो नंगा नाच किया उसने दरिंदगी की सारी हदें पार कर दी थीं। दामिनी चींख रही थी मगर उसकी आवाज बस के काले शीशों से बाहर नहीं जा सकी। दामिनी की इज्‍जत तार-तार करने और उसके शरीर को बुरी तरह नोंचने के बाद इंसानी भेडि़यों ने उसे मरा हुआ समझकर खून जमा देने वाली ठंड में सड़क के किनारे फेंक दिया।

उसके बाद उसे सफदरगंज अस्‍पताल में भर्ती कराया गया। उसकी सांसे सिर्फ उस वक्‍त तक का इंतजार कर रही थी कि आला अधिकारियों के सामने वो अपने उपर हुए जुल्‍मों की कहानी सुना सके। उसने अपना बयान दर्ज करवाया और 31 दिसंबर को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्‍पताल में उसने दम तोड़ दिया। तो आईए सजा से पहले आपको उस दिल को चीर डालने वाली बयान के बारे में बताते हैं जो खुद दामिनी ने मजिस्‍ट्रेट के सामने दर्ज करवाया था।

''मैं साकेत के सेलेक्ट सिटी मॉल से ‘लाइफ ऑफ पाई' फिल्म देखकर लौट रही थी। हमने वहां से एक ऑटो लिया और मुनिरका पहुंच गए। यहां हमने एक सफेद बस देखी। बस का कंडक्टर आवाज लगा रहा था कि बस पालम और द्वारका जा रही है। मुझे भी उसी तरफ जाना था। मैं और मेरा मित्र बस में बैठ गए। हमने 20 रुपये में टिकट लिया। मैंने देखा कि बस में छह-सात लोग बैठे हैं। मुझे लगा कि सभी यात्री हैं। बस में पीले पर्दे और लाल रंग की सीटें थीं। बस की खिड़कियां बंद थीं और उन पर काले शीशे थे।

हम बाहर तो देख सकते थे, लेकिन बाहर से अंदर कुछ नहीं दिख सकता था। मैंने बस में बैठे दूसरे लोगों की ओर देखा तो मुझे कुछ शक हुआ, लेकिन तब तक हम टिकट ले चुके थे और बस चल चुकी थी। पांच मिनट बाद ही कंडक्टर ने बस का गेट बंद कर दिया और लाइट बंद कर दी। उनमें से तीन-चार ने मेरे मित्र को पकड़ लिया, बाकी मुझे खींचकर पीछे की सीट पर ले गए। उन्होंने मेरे कपड़े फाड़ डाले और दुष्कर्म किया। इस दौरान उन्होंने लोहे की रॉड से मुझे खूब पीटा और कई जगह काटा भी। छह दरिंदों ने एक-एक कर दुष्कर्म किया और उनमें से एक ने लोहे की रॉड मेरे अंदर डाल दी।

फिर एक ने मेरे शरीर में हाथ डालकर मेरे अंग बाहर निकाल दिए। वह चलती बस में मुझे एक घंटे तक यातनाएं देते रहे। मैं बार-बार बेहोश हो जाती, वे मुझे होश में लाने के लिए और मारते फिर मेरे साथ बलात्‍कार करते। मेरे मित्र को भी रॉड से पीटा गया। बाद में उन्होंने हमारे कपड़े उतारकर हमें मरा समझकर सड़क पर फेंक दिया। उन्हें फांसी की सजा मिलनी चाहिए, ताकि फिर किसी लड़की के साथ ऐसा नहीं हो। उन्हें जिंदा जला दिया जाना चाहिए।

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English summary
Her cries for help went unheeded as the six people, including a juvenile, tortured her for an hour, took turns to rape her, bit her, hit her with an iron rod, shoved it inside her and even used hands to tear her inner organs out, the gang rape victim said in her last testimony.
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