Fact Check: उदयपुर हत्याकांड के आरोपियों को जेल में बिरयानी? पुलिस ने बताई सच्चाई
जयपुर, 29 जून: उदयपुर में एक दर्जी की गला काटकर इसलिए नृशंस हत्या कर दी गई कि उसने सोशल मीडिया पर बीजेपी की निलंबित नेता नूपुर शर्मा के सपोर्ट में एक पोस्ट किया था। मृतक का नाम कन्हैया लाल साहू था, जो कि एक टेलर था। ऐसे में कपड़ों की नाप देने के बहाने अपने साथ धारदार हथियार लाए दो हमलावारों ने कन्हैया लाल की गला काटकर हत्या कर दी। आरोपियों ने इस पूरा वारदात की वीडियो भी बनाई थी, जिसको सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया, हालांकि अब दोनों हत्यारे पुलिस की गिरफ्त में है, जिसके बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हो रहा, जिसमें दावा किया जा रहा है कि दोनों आरोपियों को राजस्थान की जेल में बिरयानी परोसी जाएगी, आखिर क्या है इस वायरल पोस्ट की सच्चाई, जानिए?

राजस्थान की जेल में इन्हें बिरयानी परोसी जाएगी?
उदयपुर टेलर हत्याकांड के बाद पूरे प्रदेश के साथ-साथ देश में लोगों के अंदर आक्रोश है। लोग दोनों हत्यारों के लिए फांसी की सजा की मांग तक रहे हैं। इस बीच पूरे मामले को लेकर गृह मंत्रालय ने एनआईए को जांच सौंपने के निर्देश दिए हैं। वहीं राजस्थान पुलिस, NIA, SIT,FSL और ATS की टीमें मौके पर पहुंची और जहां 28 जून को दो लोगों ने दर्जी कन्हैया लाल की हत्या कर दी गई थी, वहां से साक्ष्य जुटाए। एक तरफ जहां यह काफी संवेदनशील मामला है तो दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए दावा करते हुए लिखा कि गिरफ्तारी के बाद उदयपुर के दोनों हत्यारों की फोटो है और राजस्थान की जेल में इन्हें बिरयानी परोसी जाएगी? यूपी होता तो?

राजस्थान पुलिस बताई सच्चाई?
इस पोस्ट को राजस्थान पुलिस पूरी तरह से फेक बताया है। और कहा कि यह गलत तथ्य है, आरोपी बख्शे नहीं दाएंगे। पोस्ट के स्क्रीनशॉट के बाद राजस्थान पुलिस ने ट्वीट करते हुए लिखा, " सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है एक फेक न्यूज। ये सरासर गलत है। उदयपुर में जघन्य अपराधियों के खिलाफ राजस्थान पुलिस कठोर कार्रवाई करेगी। पुलिस असामाजिक तत्वों से नरमी से नहीं आएगी पेश। प्रदेश में कानून व्यवस्था कायम रखने के लिए राजस्थान पुलिस है कटिबद्ध।"

राजस्थान डीजीपी का खुलासा
वहीं राजस्थान डीजीपी एमएल लाठर ने खुलासा करते हुए बताया कि अभी तक की पूछताछ में सामने आया है कि ये लोग (मामले में मुख्य आरोपी) दावत-ए-इस्लामी नाम की संस्था से संपर्क में थे। इस प्रकरण को प्रारंभ से ही एक्ट ऑफ टेरर मानते हुए UAPA के अंतर्गत अभियोग पंजीबद्ध किया गया। NIA भी रात को ही हमारे अनुसंधान में जुड़ गए। जहां तक इनका (मुख्य आरोपी) सीमा पार कनेक्शन की बात है, जो भी डिजिटल साक्ष्य है, उसकी जांच राजस्थान पुलिस अपने स्तर पर कर रही है। NIA का सहयोग भी लिया जा रहा है।

Fact Check
दावा
दावा किया जा रहा है कि जेल में उदयपुर हत्याकांड के आरोपियों को बिरयानी दी जाएगी।
नतीजा
राजस्थान पुलिस ने इस पोस्ट को पूरी तरह से फेक बताया है।












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