Fact Check: सच में कांग्रेस सरकार ने सबसे पहले कर्नाटक में लागू किया मुस्लिम आरक्षण? जानें पूरी सच्चाई
Karnataka Muslim Reservation: कर्नाटक में ओबीसी कोटे से मुस्लिम आरक्षण देने का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। पीएम मोदी के बायान के बात कांग्रेस ने भी इसको लेकर बयान दिया। लेकिन अब चर्चा इस बात पर हो रही है क्या कर्नाटक में इससे पहले भी किसी सरकार ने मुस्लिमों के लिए आरक्षण की नीति पर फोकस किया था, या नहीं। ऐसे में रिकॉर्ड खंगाले गए तो करीब तीन दशक पीछे जाना पड़ा।
लोकसभा चुनाव के दौरान ओबीसी कोटे से मुस्लिमों को आरक्षण देने पर कांग्रेस की बीजेपी ने जमकर खिंचाई। ऐसे में इस मुद्दे ने अब जोर पकड़ लिया। वहीं दूसरी कांग्रेस के चुनावी घोषणा पत्र (न्याय पत्र) पर मुस्लिम लीग की छाप बताया है। ऐसे में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे सामने आए और उन्होंने पीएम मोदी को आमने सामने बैठकर बात का न्यौता दिया। इसको लेकर खड़गे पीएम को एक पत्र लिखा और उनसे मिलने की समय की मांग की।
इस बीच पीएम मोदी की ओर से उठाए गए उस मुद्दे ने तूल पकड़ लिया है, जिसमें उन्होंने कर्नाटक में मुस्लिम आरक्षण देकर ओबीसी वर्ग को आरक्षण को कम करने का आरोप लगाया। ऐसे में सवाल उठा कि क्या कर्नाटक में कांग्रेस की पहली सरकार थी जिसने राज्य में मु्स्लिम आरक्षण की बात सोची।

इस सवाल का जवाब ढूंढने पर वर्ष 1995 का डेटा मिला, जब केंद्र में एचडी देवगौड़ा की सरकार थी, जो जनता दल (एस) के नेता है। ये दल अब बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन एनडीए का सहयोगी दल है।
रिकॉर्ड बताते हैं कि यह आरक्षण पहली बार 1995 में एचडी देवेगौड़ा की जनता दल द्वारा लागू किया गया था। वहीं दिलचस्प बात यह है कि देवगौड़ा की जद (एस) अब भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सहयोगी है।

Fact Check
दावा
राजनीतिक बयानों और सोशल मीडिया के जरिए दावा किया जा रहा है कि कर्नाटक में सबसे पहले कांग्रेस सरकार ने आरक्षण लागू किया।
नतीजा
इस सवाल का जवाब ढूंढने पर वर्ष 1995 का डेटा मिला, जब केंद्र में एचडी देवगौड़ा की सरकार थी, जो जनता दल (एस) के नेता है। ये दल अब बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन एनडीए का सहयोगी दल है।












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