Fact Check: क्या सच में 65 साल की नानी ने 21 साल के नाती से की शादी? सामने आई ऐसी सच्चाई, जानकर पीट लेंगे माथा
Grandmother marries grandson: क्या आपने भी एक 21 वर्षीय युवक मोहम्मद इरफान द्वारा अपनी 65 वर्षीय नानी सुलताना खातून से विवाह करने की खबर सुनी है और इसे सच मान बैठे हैं? आईए इस वायरल न्यूज की सचाई जानते हैं..।
दरअसल, सोशल मीडिया पर एक युवक की वीडियो वायरल की जा रही हैं जिसमें दावा किया जा रहा है कि एक युवक ने अपनी ही नानी के साथ शादी कर ली है। हालांकि, जब हमने इस खबर की जांच पड़ताल शुरू की तब हकिकत कुछ और ही निकला।

दरअसल, इस कथित "अनोखी शादी" की खबर को लेकर कई यूज़र्स चौंकाने वाले रिएक्शन दे रहे हैं। लेकिन जब इस वायरल खबर की सच्चाई की पड़ताल की गई, तो यह दावा पूरी तरह से मनगढ़ंत, झूठा और भ्रामक पाया गया। इस खबर को dintentdata ने फैक्ट चेक किया और इसे फर्जी करार देते हुए इसे एंटरटेनमेंट के उद्देश्य से बनाए जाने का दावा किया है।
अनोखे रिश्ते को लेकर सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
भले ही यह वीडियो एक फर्जी और मनोरंजन के लिए बनाई गई है लेकिन जैसे ही यह सोशल मीडिया पर वायरल हुई लोगों ने इससे लेकर समाज में अनेक सवाल खड़े कर दिए हैं इसके साथ ही इस रिश्ते को लेकर सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गई है। क्या प्रेम के लिए उम्र, रिश्ते और परंपराएं बाधा हैं?, क्या इस प्रकार के रिश्ते सामाजिक ढांचे को तोड़ते हैं?, क्या यह विवाह भावनात्मक निर्भरता का परिणाम है या व्यक्तिगत स्वतंत्रता का प्रयोग? सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा छाया हुआ है। कुछ लोग इसे "प्रेम की जीत" मान रहे हैं, तो कुछ इसे "परिवार और समाज के ताने-बाने को बिगाड़ने वाली घटना" बता रहे हैं।
एक यूज़र ने लिखा, "यह पवित्र रिश्तों की मर्यादा का उल्लंघन है। हर रिश्ते की एक गरिमा होती है।"
वहीं, दूसरे पक्ष का कहना है, "अगर दोनों बालिग हैं और सहमति से शादी कर रहे हैं, तो समाज को हस्तक्षेप करने का क्या अधिकार है?"
भारत में विवाह कानून दोनों पक्षों की सहमति और कानूनी उम्र के आधार पर ही वैध माने जाते हैं। इस मामले में दोनों बालिग हैं, इसलिए यह विवाह कानूनी रूप से वैध हो सकता है, लेकिन सांस्कृतिक और सामाजिक नजरिए से यह रिश्ता लोगों के लिए हजम करना मुश्किल हो रहा है। इस तरह के विवाहों से यह सवाल फिर उभरता है कि क्या व्यक्तिगत आज़ादी सामाजिक नैतिकता से ऊपर है?
बदलते समाज में इस तरह के रिश्तों की नई परिभाषाएं
जैसे-जैसे समाज अधिक वैश्विक और खुलेपन की ओर बढ़ रहा है, रिश्तों की पारंपरिक परिभाषाएं भी बदलती जा रही हैं। प्रेम, विवाह और संबंधों को अब कई लोग स्वतंत्र निर्णय का विषय मानने लगे हैं। विशेषकर युवा पीढ़ी ऐसे मामलों को व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा मानती है। लेकिन भारत जैसे देश में, जहां परिवार, संस्कृति और रिश्तों की जड़ें बहुत गहरी हैं, वहां इस तरह के उदाहरण समाज को असहज कर देते हैं।
मोहम्मद इरफान और सुलताना खातून की शादी भले ही अनोखी और आश्चर्यजनक हो, लेकिन यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि हम रिश्तों की परिभाषा को कितनी कठोरता से पकड़ कर बैठे हैं। इससे एक सवाल यह भी उठता है कि क्या यह वाकई "प्यार की जीत" है या पारिवारिक संरचना की उपेक्षा? यह तो वक्त बताएगा... पर फिलहाल, यह शादी निश्चित रूप से एक सामाजिक बहस का विषय बन चुकी है।












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