Fact Check: मधुमिता सिंह व दिव्या सिंह को हूटर-नीली बत्ती ने बनाया IAS, हकीकत चौंकाने वाली
Fact check of IAS Madhumita Singh Divya Singh Barabanki: उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में पुलिस द्वारा सरकारी गाड़ी से नीली बत्ती व हूटर हटवाने के केस में मधुमिता सिंह व दिव्या सिंह को आईएएस अधिकारी बताकर वायरल करवाया जा रहा है।
वन इंडिया हिंदी से बातचीत में बाराबंकी जिला कलेक्टर सत्येन्द्र कुमार ने बताया कि मधुमिता सिंह व दिव्या सिंह को बाराबंकी में तैनात आईएएस बताने की हकीकत कुछ और ही है। छह गाड़ी कलेक्ट्रेट में आपदा प्रबंधन के लिए हैं। जो कभी अफसरों लाने-जाने में भी काम ली जाती हैं। उस गाड़ी पर हूटर व बत्ती हटाना उचित नहीं है। पूरे मामले में मीडिया में कई गलत फैक्ट शेयर किए जा रहे हैं।

कुछ खबरों के शीर्षक पढ़िए, जिनमें मधुमिता सिंह व दिव्या सिंह को आईएएस अधिकारी लिखा जा रहा है।
1. वेबसाइट tv9hindi.com ने 'लेडी आईएएस की गाड़ी से रात को उतरवाई नीली बत्ती, VIDEO वायरल हुआ तो पुलिस वालों की लग गई क्लास' शीर्षक से लिखा है कि लेडी आईएएस दिव्या सिंह ड्यूटी से लौट रही थीं। गाड़ी उनका ड्राइवर चला रहा था। तभी पटेल तिराहे पर कुछ पुलिसकर्मियों ने लेडी अफसर की गाड़ी को रुकवाया। फिर उनकी गाड़ी में लगी नीली बत्ती को उतरवा दिया।
2. वेबसाइट hindi.news18.com ने 'UPSC में हासिल की 86वीं रैंक, तीसरे प्रयास में क्रैक किया यूपीएससी, अब सुर्खियों में क्यों छाई हैं यह IAS Officer' शीर्षक से लिखा है कि मधुमिता सिंह आईएएस अफसर हैं और बाराबंकी में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात हैं। ये मूल रूप से हरियाणा के सलालखा की रहने वाली हैं। यूपीएससी 2019 में 86वीं रैंक हासिल कर आईएएस बनीं।

दिव्या सिंह नाम की आईएएस बाराबंकी में तैनात नहीं
जिस दिव्या सिंह को बतौर आईएएस ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात बताया जा रहा है, वो बाराबंकी में तैनात है ही नहीं। बाराबंकी सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के सहायक निदेशक की ओर से जारी प्रेसनोट में लिखा है कि भारत समाचार द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफार्म (एक्स) पर पोस्ट की गई खबर 'आईएएस की पुलिस ने बत्ती उतरवाई' शीर्षक से समाचार प्रचारित किया गया है कि बाराबंकी जिले में डयूटी से लौट रहीं आईएएस अफसर की गाड़ी बीच बाजार में रोककर पुलिस ने बत्ती व हूटर उतरवा दिया। पुलिस वाले यहीं तक नहीं माने बल्कि उसका वीडियो बनाकर मीडिया में वायरल कर दिया कि देखो पुलिस कैसे आईएएस अफसर की बत्ती भी उतार देती है?
पुलिस जब आईएएस अफसर की बत्ती उतार रही थी। तब उसमें बैठी मैडम आईएएस दिव्या सिंह ज्वाइंट मजिस्ट्रेट बाराबंकी के रूप में अपना परिचय दिया, लेकिन पुलिस ने नहीं सुनी। घटना की जानकारी जब डीएम को मिली तो वह बेहद नाराज हुए कप्तान ने फौरन ही बत्ती उतारने वाले पुलिस अफसरों को लाइन हाजिर कर दिया। बाराबंकी जिला प्रशासन ने यह भी कहा है कि बत्ती उतारते समय कोई भी अधिकारी उक्त वाहन में मौजूद नहीं था।
मधुमिता सिंह आईएएस नहीं, पीसीएस अफसर हैं
जिस गाड़ी से बाराबंकी पुलिस द्वारा हूटर व बत्ती हटाई। साथ ही कई खबरों में दावा किया जा रहा है कि गाड़ी में मौजूद मधुमिता सिंह आईएएस अधिकारी हैं। जबकि हकीकत यह है कि मधुमिता सिंह आईएएस नहीं बल्कि पीसीएस अफसर हैं।
सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग बाराबंकी की आरती वर्मा बताती हैं कि मधुमिता सिंह बतौर पीसीएस अफसर वर्तमान में शायद बाराबंकी की रामनगर तहसील के एसडीएम (न्यायिक) पद पर तैनात हैं। चुनाव के समय में मेरी मधुमिता सिंह से एक-दो बार मुलाकात भी हुई है। पहले यह गाड़ी नेहा बरनवाल को अलॉट की गई थी। वो ज्वाइंट मजिस्ट्रेट थीं। इसलिए गाड़ी पर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट लिखा था। अब यह गाड़ी किसे अलॉट की गई। पता नहीं।

दो पुलिस अफसरों पर कार्रवाई
बाराबंकी पुलिस अधीक्षक दिनेश कुमार सिंह ने सरकारी गाड़ी पर से हूटर व बत्ती हटाने के मामले में एसएसआई थाना कोतवाली के उप निरीक्षक विशुन कुमार शर्मा व चौकी प्रभारी आवास विकास थाना कोतवाली के उप निरीक्षक मनोज कुमार सिंह को लाइन हाजिर कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
बुधवार रात को बाराबंकी के पटेल तिराहे पर तैनात पुलिसकर्मियों ने एक सरकारी गाड़ी को रुकवाया और उस पर लगी नीली बत्ती व हूटर हटवा दिए। दावा किया गया कि गाड़ी में मधुमिता सिंह या दिव्या सिंह मौजूद थीं। जबकि बाराबंकी डीएम सत्येंद्र कुमार कहते हैं कि गाड़ी में मधुमिता सिंह व दिव्या सिंह मौजूद ही नहीं थी। ना ही वो दोनों बाराबंकी में आईएएस अफसर हैं। गाड़ी सिर्फ बाराबंकी कलेक्ट्रेट का ड्राइवर लेकर आ रहा था।

Fact Check
दावा
जिस गाड़ी से हूटर व नीली बत्ती उतरवाई गई थी, उसमें आईएएस दिव्या सिंह या आईएएस मधुमिता सिंह सवार थीं।
नतीजा
आईएएस दिव्या सिंह नाम से कोई अफसर बाराबंकी में तैनात नहीं। मधुमिता सिंह आईएएस नहीं बल्कि पीसीएस अफसर हैं।












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