गांधी जयंती 2021 : 02 अक्टूबर के लिए छात्र कुछ ऐसे कर सकते हैं भाषण की तैयारी
गांधी जयंती 2021 : 02 अक्टूबर के लिए छात्र कुछ ऐसे कर सकते हैं भाषण की तैयारी
नई दिल्ली, 1 अक्टूबर: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती हर साल 02 अक्टूबर को मनाई जाती है। मोहनदास करम चंद गांधी, जिन्हें पूरा विश्व महात्मा गांधी कहता हैं, उनको लोग प्यार से बापू भी कहकर पुकारते थे। अंग्रेजों की गुलामी की जंजीरों से भारत को आजाद कराने में बापू का सबसे अहम योगदान हैं। उन्होंने अहिंसा के रास्ते पर चलकर अंग्रेजों को देश से बाहर खदेड़ दिया था। उनकी इस आजादी की लड़ाई में देश के हर शख्स ने हिस्सा लिया, जिसकी बदौलत हम आज पूरी आजादी से जी रहे हैं। गांधी जयंती के मौके पर देशभर में अभियान, रैलियां, पोस्टर-मेकिंग और भाषण जैसे कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस दिन छात्रों के लिए विभिन्न सांस्कृतिक और शैक्षणिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। छात्र भी बड़ी संख्या में भाषण और वाद-विवाद प्रतियोगिता में भाग लेते हैं। ऐसे में हम आपको गांधी जयंती पर ऐसा भाषण बताने जा रहे हैं, जिसका छात्र इस्तेमाल कर सकते हैं।

गांधी जी की 151वीं जयंती पर ऐसे करें भाषण की शुरुआत
जैसा कि आप सभी जानते हैं कि हम यहां महात्मा गांधी की 151वीं जयंती मनाने के लिए आए हैं। महात्मा गांधी एक नाम नहीं बल्कि एक विचार धारा है। मोहनदास करमचंद गांधी, जिन्हें महात्मा गांधी के नाम से जाना जाता है। उनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के छोटे से शहर पोरबंदर में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद वे उच्च शिक्षा के लिए लंदन चले गए। महात्मा गांधी ने इंग्लैंड से अपनी कानून की डिग्री पूरी की और 1891 में भारत लौट आए, जिसके बाद महात्मा गांधी एक मुकदमे के सिलसिले में 1893 में दक्षिण अफ्रीका चले गए। जहां 21 साल तक रहने के बाद 1915 में भारत लौट आए।
भारत आने के बाद खोला अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा
भारत वापस आने के बाद उन्होंने ब्रिटिश सरकार द्वारा अधिक भूमि कर और भेदभाव के विरोध में किसानों और शहरी मजदूरों को इकट्ठा करना शुरू कर दिया। 1921 में उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का गठन किया और गरीबी मिटाने, महिलाओं के अधिकारों, धार्मिक और जातीय सौहार्द बनाने, छुआछूत को समाप्त करने और सबसे ऊपर स्वराज प्राप्त करने के लिए राष्ट्रव्यापी आंदोलनों का नेतृत्व किया।

1942 में भारत छोड़ों आंदोलन
गांधी जी ने 1930 में 400 किमी दांडी नमक मार्च के साथ अंग्रेजों द्वारा लगाए गए नमक कर को चुनौती देने में भारतीयों का नेतृत्व किया और बाद में 1942 में अंग्रेजों को भारत छोड़ने का आह्वान किया, जिसके बाद 1942 से 47 के बीच देश की स्थिति में बड़े बदलाव आया और अंग्रेजी हुकूमत पूरी तरह से हिलने लगी। वहीं इस बीच देश के अंदर अशांति का माहौल फैल गया, जिसके बाद अंग्रेजों ने देश के दो टुकड़े करने का ऐलान कर दिया। 1947 में भारत-पाकिस्तान के विभाजन के दौरान गांधीजी ने कई विस्थापित हिंदुओं, मुसलमानों और सिखों की मदद की, लेकिन इंसानियत के दुश्मन नाथूराम गोडसे ने 30 जनवरी 1948 को बापू के सीने में तीन गोलियां दागकर उनकी हत्या कर दी।
गांधीजी की जीवन शैली बहुत ही सरल था, उन्होंने सादा शाकाहारी भोजन किया और आत्म-शुद्धि और राजनीतिक विरोध के साधन के रूप में लंबे उपवास किए। उन्होंने दुनिया भर में कई लोगों को अहिंसा का पाठ पढ़ाया।
गांधी जयंती पर छात्र इसका रखें विशेष ध्यान
छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे भाषण को एक कागज पर लिखें और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए शीशे के सामने इसका अभ्यास शुरू करें। अपने भाषण को संक्षिप्त रखें और दर्शकों पर प्रभाव डालने के लिए अपनी आवाज थोड़ी बुलंद रखें।












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