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कॉल गर्ल्‍स के जीवन का कड़वा सच

By Ajay Mohan
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Girl
हर चुनाव में सड़क, बेरोजगारी, महंगाई, देश की सुरक्षा, कश्मीर मसला, महिला आरक्षण जैसे मुद्दे तो उठाए जाते हैं। परंतु किसी चुनाव में इस बात की चर्चा नहीं होती कि वेश्यावृत्ति कैसे रोकी जाए। वेश्यावृत्ति से मुक्त महिलाएं समाज में इज्जत से कैसे जिएं, इस बात को जोरदार ढंग से कभी नहीं उठाया गया है। ऐसा नहीं है कि इसके लिए कानून नहीं है या फिर पुलिस छापेमारी नहीं करती है। इसके बावजूद यह देशव्यापी मुद्दा कभी नहीं बना। हमें किसी वेश्या या कार्लगर्ल का वह रूप तो दिखता है, जिसमें वे जिस्म बेचकर मोटी रकम वसूलती हैं।

परंतु पर्दे के पीछे उनकी जिंदगी की कड़वाहट को कोई नहीं देखता। कोई नहीं देखता कि वह जिंदा लाश जैसी है, जो ग्राहकों को देख उससे लिपट जाती है। उन्हें अपने जिस्म से खेलने को मजबूर करती है ताकि उसे अधिक से अधिक रुपए मिल सके। वह ग्राहक दुबारा भी उसके पास आए, इसके लिए भी वह नये-नये नुस्खे अपनाती है। इस रूप के लिए कभी कोई महिला स्वेच्छा से तैयार नहीं होती। इसके लिए उसे तहखाने में बंदकर इस कदर प्रताडि़त किया जाता है कि वे मरनासन्न स्थिति में पहुंच जाती हैं। कई तो मर भी जाती हैं। ऐसे में यदि जान बचाने के लिए वे जिस्मफरोशी के धंधे के लिए हामी भरती है तो इसके लिए पूरा समाज दोषी है?

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देश के हजारों सफेदपोश इस कार्य में लिप्त हैं। ये सफेदपोश लाखों दलाल पाल रखे हैं। ये कम उम्र की लड़कियों को विभिन्न माध्यमों से खरीदते हैं। फिर उन्हें विभिन्न शहरों में मौजूद 'जिस्म की मंडी' तक पहुंचा देते हैं। यहां उन्हें ग्राहकों को रिझाने का तरीका सिखाया जाता है। इसी में से कुछ सुंदर लड़कियों को कार्लगर्ल के रूप में होटलों में सप्लाई कर दिया जाता है।

इस धंधे में सुंदर और कम उम्र की लड़कियों की मांग अधिक है। इस बात की जानकारी पुलिस प्रशासन को बखूबी होती है। पुलिस को हर माह एक मोटी रकम मिलती है। ऐसे में संबंधित इलाके में पुलिस छापेमारी नहीं करती है। यदि इस मंडी से कोई लड़की भागकर किसी छुटभैये नेता के पास पहुंच जाती है।

इस क्रम में वह अपना दर्द उससे बयान करती है। तब, ये नेता जी पच्चीस-पचास लोगों को इक्ट्ठा कर हंगामा शुरू कर देते हैं। ऐसे हालात में पुलिस को छापेमारी करनी पड़ती है। परंतु इसकी सूचना मंडी के बड़े दलालों तक पुलिस पहले ही पहुंचा देती है। नतीजन, छापेमारी में पुलिस को कुछ भी हासिल नहीं होता।

धंधे में नेताओं की भी हिस्‍सेदारी

पुलिस दिखावे के तौर पर कुछ लोगों को पकड़कर बंद कर देती है जिसे बाद में जमानत पर छोड़ देती है। बाद में पता चलता है कि उक्त नेताजी को भी 'जिस्म की मंडी' से हिस्सा चाहिए। नेताजी ने पहले कई दलालों से इसके लिए संपर्क भी साधा था। कामयाबी नहीं मिलने पर उन्होंने हाथ आई लड़की के सहारे हो हल्ला कर फिर से उल्लू साधने की कोशिश की।

अफसोस उन्हें इस बार भी हिस्सेदारी नहीं मिली। इधर, चंद दिनों बाद फिर मंडी का व्यवसाय फलने-फूलने लगता है। देश के हर राज्य में दर्जनों स्वयंसेवी संस्था वेश्याटोली की महिलाओं को रोजगार देने की योजना पर काम कर रही है। इसके बावजूद आंकड़े बताते हैं कि जिस्मफरोशी का धंधा बढ़ता ही जा रहा है।

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