• search

Kundali: कुंडली में हैं ऐसे योग तो व्यक्ति में काम-वासना होगी अधिक

By Pt. Gajendra Sharma
Subscribe to Oneindia Hindi
For Quick Alerts
ALLOW NOTIFICATIONS
For Daily Alerts

    नई दिल्ली। काम वासना मनुष्य की एक स्वाभाविक प्रवृत्ति है। इसी से मनुष्य अपने समुदाय का विस्तार करता है। काम वासना का स्तर प्रत्येक व्यक्ति में अलग-अलग होता है। किसी में कम तो किसी में अधिक। संतुलित काम वासना वाला व्यक्ति संयमित जीवन जीता है लेकिन जिस व्यक्ति में काम वासना अनियंत्रित हो जाती है वह दुष्कर्मी के रूप में समाज के लिए खतरनाक हो जाता है। ऐसे व्यक्ति को दंड के देने के लिए कानून है, लेकिन किस व्यक्ति में कितनी काम वासना है वह उसकी जन्म कुंडली देखकर पता लगाया जा सकता है।

    आइए ज्योतिष के अनुसार जानते हैं किस व्यक्ति में कैसी काम वासना होती है 

    यदि लग्न का स्वामी सप्तम स्थान में बैठा हो तो

    यदि लग्न का स्वामी सप्तम स्थान में बैठा हो तो

    • यदि लग्न और बारहवें भाव के स्वामी एक होकर केंद्र या त्रिकोण में बैठ जाएं या आपस में स्थान परिवर्तन कर रहे हों तो पर्वत योग का निर्माण होता है , इस योग के चलते जहां व्यक्ति भाग्यशाली, विद्या -प्रिय, कर्म शील, दानी, यशस्वी, संपत्ति का अधिपति होता है, वहीं अत्यंत कामी और कभी-कभी पर स्त्री गमन करने वाला भी होता है।
    • यदि लग्न का स्वामी सप्तम स्थान में बैठा हो, तो ऐसे व्यक्ति की रुचि विपरीतलिंगी सेक्स के प्रति अधिक होती है। वह दिन-रात सेक्स के बारे में ही सोचता रहता है।
    मंगल और शनि सप्तम स्थान में हो तो जातक समलिंगी

    मंगल और शनि सप्तम स्थान में हो तो जातक समलिंगी

    • यदि लग्न का स्वामी सप्तम में और सप्तम का स्वामी लग्न में हो तो व्यक्ति स्त्री और पुरुष दोनों में समान रूप से रुचि रखता है।
    • सातवें भाव में मंगल, बुद्ध और शुक्र एक साथ बैठे हों और इन पर किसी शुभ ग्रह की दृष्टि न हो तो व्यक्ति अप्राकृतिक सेक्स का आदि होता है।
    • मंगल और शनि सप्तम स्थान में हो तो जातक समलिंगी होता है।
    काम वासना

    काम वासना

    • तुला राशि में चंद्र और शुक्र की युति जातक की काम वासना को कई गुणा बड़ा देती है।
    • सप्तम भाव में शुक्र की उपस्थिति जातक को अत्यंत कामुक बना देती है।
    • शुक्र पर मंगल/राहु का प्रभाव हो तो जातक कई लोगों से शारीरिक संबंध बनाता है।
    • गुरु लग्न/चतुर्थ/सप्तम/दशम स्थान पर हो या द्वादश भाव में हो, तो जातक अपनी वासना की पूर्ति के लिए कुछ भी करने को तैयार रहता है।
    • शनि लग्न में हो तो जातक में वासना अधिक होती है। पंचम भाव में शनि अपनी से बड़ी उम्र की स्त्री से आकर्षण, सप्तम में होने से व्यभिचारी प्रकृति, चंद्र के साथ होने पर वेश्यागामी, मंगल के साथ होने पर स्त्री में और शुक्र के साथ होने पर पुरुष में कामुकता अधिक होती है।
    ऐसे जातक में कामुकता अधिक होती है

    ऐसे जातक में कामुकता अधिक होती है

    • शनि की चंद्र/शुक्र/मंगल के साथ युति जातक में काम वासना को काफी बढ़ा देती है।
    • चंद्र बारहवें भाव में मीन राशि में हो तो जातक अनेकों स्त्रियों का उपभोग करता है।
    • मंगल की उपस्थिति 8 /9 /12 भाव में हो तो जातक कामुक होता है।
    • मंगल सप्तम भाव में हो और उस पर कोई शुभ प्रभाव न हो तो जातक नाबालिगों के साथ संबंध बनाता है।
    • मंगल की राशि में शुक्र या शुक्र की राशि में मंगल की उपस्थित हो तो जातक में कामुकता अधिक होती है।

    यह भी पढ़े: क्या आपकी कुंडली में है मंगल दोष, इन उपायों से शीघ्र हो जाएगा निवारण

    जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

    देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
    English summary
    Kundali Says everything About Your Sex Life Or Kamvasna,here is some important facts about that.

    Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
    पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

    X
    We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more