लक्षण शास्त्र: जानवर भी देते हैं भूकंप आने का संकेत

अब तो वैज्ञानिक भी इन जीव-जंतुओं पर शोध कर उनसेे आपदा संबंधी जानकारियां जुटाने में मदद लेने का प्रयास कर रहे हैं।

नई दिल्ली। प्राकृतिक आपदाओं की भविष्यवाणी को लेकर वैज्ञानिकों और ज्योतिषीयों में हमेशा से मतभेद रहे हैं। गर्मी, बारिश, सर्दी व अन्य प्राकृतिक आपदाओं की सटीक भविष्यवाणी करने में मौसम वैज्ञानिक कई बार गलती भी कर बैठते हैं। मौसम की भविष्यवाणी ज्योतिष भी अपने तरीके से करता है।

ज्योतिष की ही एक शाखा है लक्षण शास्त्र और शकुन शास्त्र, जिसमें प्रकृति और विभिन्न प्राणियों के व्यवहार को देखकर प्राकृतिक आपदाओं के बारे में जानकारी हासिल की जा सकती है, लेकिन उसके लिए जरूरत है सही नजर और सटीक आकलन की।

प्राकृतिक आपदाओं की सटीक जानकारी

प्राकृतिक आपदाओं में वर्तमान में जिस संकट ने पूरे विश्व को थर्रा रखा है, वह है भूकंप। हर दूसरे दिन विश्व के किसी ना किसी हिस्से में भूकंप आने की खबरें सुनाई दे रही हैं। प्रकृति के इस तांडव से पूरा विश्व बेहिसाब जन-धन हानि झेल रहा है। विश्व भर के वैज्ञानिकों ने प्राकृतिक आपदाओं की सटीक जानकारी पाने के लिए कई उपकरण लगा रखे हैं और सैटेलाइट्स भी उनकी मदद के लिए जानकारियां उपलब्ध करवा रही हैं।

दुनिया भर के विशेषज्ञ जी जान से लगे हैं

इसके बावजूद भूकंप के झटके जब तब तबाही मचा रहे हैं। हैरानी की बात ये है कि जिन प्राकृतिक आपदाओं की जानकारी जुटाने के लिए दुनिया भर के विशेषज्ञ जी जान से लगे हैं, उन्हें हमारे आस-पास पाए जाने वाले छोटे-छोटे जानवर, कीड़े-मकोड़े अपने संवेदों के द्वारा समय से पहले जान लेते हैं, महसूस कर लेते हैं। अब तो वैज्ञानिक भी इन जीव-जंतुओं पर शोध कर उनसेे आपदा संबंधी जानकारियां जुटाने में मदद लेने का प्रयास कर रहे हैं।

आइये, हम भी जानते हैं कि भूकंप आने से पहले किन जीवों के व्यवहार और गतिविधि में क्या परिवर्तन आता है...

चींटी

चींटी

हर घर में नजर आने वाली चींटी को भूकंप आने की जानकारी सबसे पहले होती है। वैज्ञानिकों ने पाया है कि चींटी भूकंप की तीव्रता मापने वाले रिक्टर पैमाने पर 2.0 तक के झटके को महसूस कर लेती है, जिसका मनुष्य को कभी भान तक नहीं होता। चींटियों पर 3 साल तक हुए अध्ययन से पता चला है कि भूकंप की हलचल का भान होते ही चींटियां अपना घर छोड़ देती हैं। आमतौर पर चींटियां दिन में घर बदलती हैं, पर भूकंप का पता चलते ही वो किसी भी समय अपने घर से निकल पड़ती हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि उनका घर ढहने वाला है। ऐसा माना जा रहा है कि चींटियों में कार्बन डाइ ऑक्साइड का स्तर और पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र को समझने का ज्ञान होता है।

सांप

सांप

भूकंप की जानकारी देने के मामले सांप को काफी विश्वसनीय माना जाता है। ऐसा देखा गया है कि भूकंप के झटके शुरू होने से पहले सांप अपने बिलों से बाहर भागने लगते हैं। शोधकर्ताओं ने पाया है कि ये झटके बहुत हल्के हों, तब भी संापों ने इन्हें महसूस किया और एक साथ भारी संख्या में अपने बिल छोड़ दिए। हालांकि मनुष्य को इन बेहद हल्के झटकों से कोई नुकसान नहीं पहुंचा, यहां तक कि उन्हें भूकंप आने का पता तक नहीं चला, पर सांपों ने इसे जान लिया। सांप ठंडे रक्त वालाा जीव माना जाता है। ऐसे जीव ठंड के मौसम में बाहर नहीं निकलते, पूरा मौसम अपने बिलों में छुपकर ही बिताते हैं, पर भूकंप के झटके महसूस करते ही कड़ी ठंड में भी भारी संख्या में सांप बिल छोड़ते पाए गए हैं।

मछलियां

मछलियां

समुद्र की गहराइयों में रहने वाली मछलियां भी भूकंप की तरंगों को बड़ी तीव्रता से पकड़ती हैं। इसकी एक वजह यह भी है कि धरती से पहले भूकंप की तरंगें पानी को कंपित करती हैं। माना जाता है कि समुद्र की गहराई में रहने वाली ओरफिश भूकंप को महसूस करने में सबसे तेज होती है। रिबन की तरह दिखने वाली, लगभग 5 मीटर लंबी, डरावने मुंह वाली यह मछली आमतौर पर समुद्र के किनारों पर नहीं आती, पर भूकंप के समय इसे तटों पर पाया गया है। ये मछली पानी में इतनी गहराई में रहती है कि आमतौर पर कम ही लोग इसके बारे में जानते हैं। वैज्ञानिकों ने पाया है कि इनके किनारों पर पाए जाने के बाद जो भूकंप आया, उसकी तीव्रता 7.5 से अधिक रही है। पिछले वर्ष नेपाल में आया भूकंप इतनी ही तीव्रता का था, जिसने पूरे नेपाल का विध्वंस कर दिया था।

मेंढक या भेक

मेंढक या भेक

मेंढकों के समान या उनकी ही एक प्रजाति भेक को भूकंप से पहले आश्चर्यजनक रूप से पूरे समूह के साथ गायब होते पाया गया है। जहां भी भूकंप आया, वहां लगभग 3 दिन पहले से सारे भेक जादुई तरीके से गायब हो गए। इसके बाद हर ऐसी जगह पर भूकंप के झटकों की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5 से लेकर 8 पाइंट तक नापी गई और गजब की तबाही का मंजर बना। इन स्थानों पर 5000 से लेकर 20000 लोगों तक के मरने की खबरें मिलीं और धन हानि का तो कोई हिसाब ही नहीं रहा। भूकंप की समाप्ति के बाद भी जब तक आखिर झटका नापा जाता रहा, भेक अपने पुराने स्थान पर दिखाई नहीं दिए। भूकंप के पूरी तरह समाप्त हो जाने के बाद वे अपने पूरे समूह के साथ अपनी पुरानी जगहों पर वापस लौट आए।

पक्षी

पक्षी

भूकंप का असर जीव-जंतुओं की तरह पक्षियों में भी देखा गया है। भूकंप आने से कुछ मिनट पहले राजहंस पक्षी एक समूह में जमा होते देखे गए हैं, तो बतखें डर के मारे पानी में उतरती पाई गई हैं। इतना ही नहीं, मोरों को झुंड बनाकर बेतहाशा चीखते हुए पाया गया है। विश्व में जहां भी जानवरों में इस तरह के बदलाव देखे गए हैं, वहां इसके कुछ मिनट बाद ही बड़ी भयंकर तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया है।

संवेदी तंत्र से भांपते हैं खतरा

संवेदी तंत्र से भांपते हैं खतरा

प्रकृति में होने वाले किसी भी तरह के बदलाव को सबसे पहले जीव, जंतु, पशु, पक्षी ही महसूस करते हैं। माना जाता है कि ऐसा उनमे मौजूद संवेदी तंत्र के कारण होता है। हालांकि अभी तक वैज्ञानिक तौर पर इसे प्रमाणित नहीं किया जा सका है और इसीलिए इन्हें विश्वसनीय भी नहीं माना जाता है। वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि जीव-जंतुओं में व्यवहार परिवर्तन को सटीक सूचना का आधार नहीं माना जा सकता क्योंकि एक तो वे बहुत कम तीव्रता पर ही घबरा जाते हैं और उन्हें भूकंप आने का पता भी कुछ मिनट पहले ही चलता है। इस आधार पर बड़े पैेमाने पर बचाव या रक्षात्मक कदम उठाना संभव नहीं हो पाता इसलिए भूकंप की सटीक जानकारी के लिए उपकरणों पर भरोसा करना ही ज्यादा सही होगा। फिर भी जीव- जंतुओं में आए बदलाव कुछ तो संकेत देते हैं और इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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