Surya Grahan 2019: षटग्रही योग में आ रहा है साल का अंतिम सूर्य ग्रहण, जानिए किसके लिए होगा शुभ
नई दिल्ली। साल 2019 का अंतिम सूर्य ग्रहण 26 दिसंबर गुरुवार को आ रहा है। पौष अमावस्या के दिन आ रहा यह सूर्य ग्रहण कंकणाकृति सूर्य ग्रहण होगा। यह संपूर्ण भारत में दिखाई देगा। सुबह 8.08 बजे प्रारंभ होने वाले इस सूर्य ग्रहण की कुल अवधि 2 घंटे 50 मिनट रहेगी। ग्रहण का सूतक 12 घंटे पूर्व अर्थात 25 दिसंबर की रात्रि में 8.08 बजे से प्रारंभ हो जाएगा। यह सूर्य ग्रहण इस मायने में बड़ा महत्वपूर्ण है क्योंकि ग्रहण के दौरान छह ग्रह सूर्य, चंद्र, बुध, गुरु, शनि और केतु एक साथ धनु राशि में रहेंगे और ग्रहण भी धनु राशि में ही हो रहा है। इसलिए जिनका जन्म नक्षत्र मूल तथा जन्मराशि और जन्म लग्न धनु है उनके लिए विशेष अशुभकारी साबित होगा।

साल का अंतिम सूर्य ग्रहण 26 दिसंबर को
इसलिए जिनका जन्म नक्षत्र मूल तथा जन्मराशि और जन्म लग्न धनु है उनके लिए विशेष अशुभकारी साबित होगा। इससे पहले 5 फरवरी 1962 के पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान मकर राशि में सात ग्रह केतु के साथ उपस्थित थे। उस ग्रहण के प्रभाव से देश-दुनिया में अनेक दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं घटित हुई थी। यह सूर्य ग्रहण भारत में अधिकतर स्थानों पर खंडग्रास रूप में दिखाई देगा। दक्षिण भारत के कुछ स्थानों पर कंकणाकृति दिखाई देगा। भारत के अलावा यह एशिया के कुछ देश, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया में भी दिखाई देगा।

ग्रहण का समय
- ग्रहण का सूतक: 25 दिसंबर रात्रि 8.08 बजे से
- ग्रहण का स्पर्श: सुबह 8 बजकर 8 मिनट पर
- ग्रहण का मध्य: सुबह 9 बजकर 26 मिनट पर
- ग्रहण का मोक्ष: सुबह 10 बजकर 58 मिनट पर
ग्रहण का यह समय उज्जैन मप्र के अनुसार है। देश के अन्य शहरों में सूर्योदय के समय के अनुसार इस समय में कुछ सेकंड से लेकर कुछ मिनट तक का अंतर आ सकता है।

षटग्रही योग का असर
यह सूर्य ग्रहण षटग्रही योग में धनु राशि में हो रहा है। इस योग के प्रभावों के फलस्वरूप अनेक प्रकार की प्राकृतिक आपदाएं आ सकती हैं। भूकंप, सूनामी, भयंकर बर्फबारी, अत्यधिक ठंड, रेल और विमान दुर्घटना, देश के किसी बड़े राजनेता की हानि, प्रजा और राजा में टकराव की स्थिति बनेगी। सत्ताधीशों के लिए परेशानी बढ़ाने वाला रहेगा।
ग्रहण में क्या सावधानी रखें
- ग्रहण काल में खान-पान, शुभ कार्य, पूजा-पाठ आदि करना निषेध होता है।
- रोगी, वृद्ध, बालक, गर्भवती स्त्रियां ग्रहणकाल में आवश्यक हो तो खाना-पीना कर सकती हैं।
- ग्रहण का सूतक प्रारंभ होने से पूर्व खाने-पीने की वस्तुओं में तुलसी पत्र या कुश की घास डाल देना चाहिए।
- ग्रहण काल में गर्भवती स्त्रियां बाहर ना निकलें। घर में भी रहें तो अपने गर्भ पर पीली मिट्टी और तुलसी पत्र का लेप करें।
- ग्रहण काल में गर्भवती स्त्रियां चाकू, छुरी, सुई, कैंची आदि काटने वाली वस्तुओं का इस्तेमाल ना करें।
- सूर्य ग्रहण को नग्न आंखों से ना देखें।
- वैसे तो यह किसी भी राशि वालों को नहीं देखना चाहिए, लेकिन यदि देखना ही हो तो एक्सरे फिल्म या यूवी प्रोटेक्टेड चश्मे से देखें।
- ग्रहण काल में गुरु मंत्र का जाप, किसी विशेष मंत्र की सिद्धि, रामायण, सुंदरकांड का पाठ किया जा सकता है।
- ग्रहण काल में महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते रहने से ग्रहण का बुरा प्रभाव नहीं होता है।
- ग्रहण समाप्त होने के बाद पवित्र नदियों में स्नान, शुद्धिकरण आदि करके दान देना चाहिए।
किसके लिए कैसा
- श्रेष्ठ- कर्क, तुला, कुंभ, मीन
- मध्यम- मेष, मिथुन, सिंह, वृश्चिक
- अशुभ- वृषभ, कन्या, मकर
- अतिअशुभ- धनु












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