Solar Eclipse 2020: यह सूर्यग्रहण जीवन की अनेक परेशानियां कर देगा दूर, आजमाएं ये उपाय
नई दिल्ली। अगर आप जीवन में लगातार परेशानियों से जूझ रहे हैं। आपका जॉब और बिजनेस ठीक से नहीं चल रहा है। आर्थिक तंगी लगातार बनी हुई है। युवक-युवतियों के विवाह बार-बार टल रहे हैं। परिवार में कोई ना कोई व्यक्ति बीमार चल रहा है। यदि ऐसी ही अनेक परेशानियां आपके साथ हैं, तो 21 जून 2020 को आ रहा खंडग्रास सूर्यग्रहण आपकी सारी परेशानियां दूर कर देगा। बस आपको अपनी परेशानी और समस्या के अनुरूप उपाय करना होंगे।

राहु-केतु से जुड़े उपाय
ग्रहण का सीधा संबंध राहु-केतु से होता है। राहु केतु व्यक्ति के जीवन पर गहरा प्रभाव डालते हैं और परेशानियों का कारण बनते हैं। शास्त्र कहते हैं राहु-केतु का स्थान मनुष्य के शरीर के निचले हिस्से खासकर पैरों में होता है। इसलिए यदि आप ग्रहणकाल में किसी गरीब और जरूरतमंद व्यक्ति को असली चमड़े के काले या भूरे रंग के जूते-चप्पल दान करेंगे तो आपके संकट दूर होंगे और इससे पितृ भी प्रसन्न होते हैं।

धन की परेशानी दूर करने के लिए
- धन की कमी दूर करने के लिए सूर्यग्रहण के समय एक रुपए का सिक्का पूजा स्थान में रखें। भगवान सूर्यदेव के 12 नामों का स्मरण करें और अपनी परेशानियां दूर करने का आग्रह करें। ग्रहण समाप्त होने के बाद इस सिक्के को गंगाजल से धोकर एक लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखें। इससे धन की कमी दूर होने लगती है।
- ग्रहण काल में 7 गोमती चक्र लेकर इन्हें पूजा स्थान में रखें। ग्रहण समाप्ति के बाद इन्हें गंगाजल से धोकर पूजन करें और फिर श्रीसूक्त का पाठ करके तिजोरी में रखें। इससे पैसों की कमी नहीं रहती।
- बिजनेस नहीं चल रहा है तो ग्रहण शुरू होने से पहले 1 दक्षिणावर्ती शंख, 7 गोमती चक्र और 7 लघु नारियल पूजा स्थान में रखें। ग्रहण के बाद इन्हें गंगाजल से पवित्र कर इनका पूजन करें और सभी सामग्री को लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखें।
- ग्रहण काल में कुबेर यंत्र या श्री यंत्र स्थापित करने से कभी धन की कमी नहीं होती।
- बिजनेस और जॉब में तरक्की के लिए ग्रहण से पहले एक तांबे का सूर्य यंत्र घर ले आएं। ग्रहणकाल में इसे गंगाजल से शुद्ध करके, पूजन करें और आदित्य हृदय स्तोत्र के 12 पाठ करें। इस यंत्र को घर में स्थापित करने से लाभ होने लगता है।

रोगों से मुक्ति के लिए
- जो व्यक्ति बीमार है उसके नाम से संकल्प करके पूरे ग्रहण काल में महामृत्युंजय मंत्र का जाप रूद्राक्ष की माला से करते रहें। इसका फल कई गुना ज्यादा मिलता है। रोगी जल्दी ठीक होगा।
- रोग निवृत्ति के लिए ग्रहण्ा काल में कांसे की कटोरी में पिछला देसी घी भरें। इसमें एक रुपए का सिक्का या सामर्थ्य के अनुसार चांदी का छोटा सा टुकड़ा डालें। इसमें रोगी अपनी परछाई देखे और फिर मंदिर में या किसी गरीब को दान कर दें।
- सूर्यग्रहण के दौरान काले या भूरे रंग का कंबल दान करने से रोग मुक्ति शीघ्र होती है।
- ग्रहणकाल में तुला दान का बड़ा महत्व है। रोगी के वजन के बराबर आटे या खड़े अनाज को तौलकर दान करें।

शीघ्र विवाह के लिए
- जिन युवक युवतियों का विवाह नहीं हो पा रहा है, वे ग्रहण से एक दिन पहले केले के पेड़ के समीप जाएं और हाथ जोड़कर उसकी जड़ ले जाने का निमंत्रण दें। फिर ग्रहण शुरू होने पर एक लोटा जल लेकर जाएं और केले के पेड़ को प्रणाम कर समस्त देवी-देवताओं और अपने कुल देवी-देवता का स्मरण कर जल अर्पित कर जड़ निकाल लें। इस जड़ को घर लाकर पहले गाय के कच्चे दूध से धोएं फिर गंगाजल से शुद्ध कर लें। इसके बाद इसे हल्दी में लपेटकर एक पीले कपड़े में बांधकर ताबीज जैसा बना लें। इसे अपनी दाहिनी भुजा में बांधने से शीघ्र विवाह का रास्ता खुलता है। यह पूरा प्रयोग ग्रहण प्रारंभ होने से लेकर ग्रहण समाप्ति के बीच कर लेना चाहिए। इस जड़ को चांदी के ताबीज में भरकर भी गले या भुजा में पहना जा सकता है।
- जिन्हें केले का पेड़ उपलब्ध ना हो, वे यह दूसरा प्रयोग करें। सवा किलो चने की दाल में सवा सौ ग्राम खड़ी हल्दी की गांठ और 11 रुपए के सिक्के डालकर इसे एक सवा मीटर पीले कपड़े में बांधकर पोटली बना लें। इस पोटली को जिसका विवाह करवाना है उसके हाथ से किसी विष्णु मंदिर में या किसी गरीब को दान करवाएं।
- तीसरा प्रयोग है, खोपरे के पांच सूखे गोले लेकर उनमें छोटा छेद करें और सभी में शकर भर दें। इन्हें चुपचाप किसी निर्जन स्थान में जाकर चींटी के बिल के समीन जमीन में हल्का सा गड्ढा खोदकर रख दें। जैसे जैसी चींटी इन्हें खाएगी, वैसे-वैसे आपके विवाह की बाधा भी दूर होती जाएगी।












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