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Vasant or Basant Panchami 2018: क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त और कैसे करें मां सरस्वती की पूजा?

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    Vasant Panchami : वसंत पंचमी पर माँ सरस्वती को कैसे करें प्रसन्न | Boldsky

    लखनऊ।वसंत पंचमी का त्यौहार बड़े हर्षोल्लास मनाया जाता है। आज के दिन मां सरस्वती देवी का विशेष पूजन-अर्चन किया जाता है। इस बार वसंत पंचमी का पर्व 21 जनवरी दिन रविवार को मनाया जायेगा। इस दिन सफेद, पीले व वासन्ती रंग के कपड़े पहनकर सरस्वती पूजन करने का विधान है। इसके साथ ही माॅ सरस्वती को मीठा, खीर व केसरिया चावल का भोग लगाया जाता है। धूप, दीप, फल-फूल इत्यिादि के साथ माॅ सरस्वती की वन्दना व पूजा की जाती है।

    पौराणिक कथा-

    विष्णु की आज्ञा से जब ब्रहमा ने सृष्टि की रचना की तो सबसे पहले मनुष्य को उत्पन्न किया तत्पश्चात अन्य जीवों का प्रादुर्भाव हुआ है। लेकिन सृष्टि की रचना करने के बाद भी ब्रहमा जी पूर्णतयः सन्तुष्ट नहीं हुये और चारों तरफ मौन का सन्नाटा छाया हुआ था। विष्णु जी की पुनः आज्ञा लेकर ब्रहमा ने अपने कमण्डल से जल लेकर पृथ्वी पर छिड़का जिससे पृथ्वी में कंपन उत्पन्न हुआ। कुछ क्षण पश्चात एक अद्भुत शक्ति का प्राकट्य हुआ।

     ब्रहमा जी ने सौन्दर्य की देवी से वीणा बजाने का आग्रह किया

    ब्रहमा जी ने सौन्दर्य की देवी से वीणा बजाने का आग्रह किया

    यह प्राकट्य एक सुन्दर चतुर्भज देवी का था जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरा हाथ वर मुद्रा में था एंव अन्य दोनों में हाथों में पुस्तक व माला थी। ब्रहमा जी ने सौन्दर्य की देवी से वीणा बजाने का आग्रह किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं की वाणी से एक मधुर ध्वनि प्रस्फुटित हुयी। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हो गई। पवन चलने से सरसराहट की अवाजा आने लगी। उसी समय ब्रहमा ने उस देवी का नामकरण वाणी की देवी सरस्वती के रूप में कर दिया। तभी से वसंत पंचमी के दिन माॅ सरस्वती का जन्मोत्सव मनाया जाने लगा।

    ऋग्वेद में मां सरस्वती का वर्णन

    ऋग्वेद में मां सरस्वती का वर्णन

    प्रणो देवी सरस्वती वाजेभिर्वजिनीवती धीनामणित्रयवतु।

    अर्थात ये परम चेतना है। सरस्वती के रूप में ये हमारी बुद्धि, प्रज्ञा तथा मनोवृत्तियों की संरक्षिका है। हममें जो आचार और मेघा है उसका आधार माॅ सरस्वती ही है। इनकी समृद्धि और स्वरूप का वैभव अद्भुत है।

    शुभ मुहूर्त

    शुभ मुहूर्त

    इस वर्ष 21 जनवरी दिन शनिवार को वसंत पंचमी मनाई जायेगी। इस दिन पूजा का शुभ समय सुबह 7 बजकर 40 मिनट से 12 बजकर 16 मि0 तक है।

    मां सरस्वती की पूजा विधि

    मां सरस्वती की पूजा विधि

    देवी भागवत के अनुसार देवी सरस्वती की पूजा सर्वप्रथम भगवान श्री कृष्ण ने की थी। प्रातःकाल समस्त दैनिक कार्यो से निवृत होकर स्नान, ध्यान करके मां सरस्वती की तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद कलश स्थापित गणेश जी तथा नवग्रहों की विधिवत पूजा करें। सरस्वती जी का पूजन करते समय सबसे पहले उनको स्नान करायें। तत्पश्चात माता को सिन्दूर व अन्य श्रंगार की वस्तुये चढ़ायें फिर फूल माला चढ़ाये। मीठे का भोगलगार सरस्वती कवच का पाठ करें। देवी सरस्वती के इस मन्त्र का जाप करने से ‘‘श्रीं ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा'' असीम पुण्य मिलता है।

     आज के दिन क्या करें विशेष उपाय

    आज के दिन क्या करें विशेष उपाय

    • यदि आपका बच्चा पढ़ने में कमजोर है तो वसन्त पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा करें तत्पश्चात उस पूजा में प्रयोग की हल्दी को एक कपड़े में बांध कर बच्चे की भुजा में बांध दे।
    • मां सरस्वती वाणी की देवी है, इसलिए मीडिया, ऐंकर, अधिवक्ता, अध्यापक व संगीत आदि के क्षेत्र से जुड़े लोगों को वसन्त पंचमी के दिन माॅ सरस्वती पूजा अवश्य करनी चाहिए।
    • मां सरस्वती की पूजा करने से मन शान्त होता है व वाणी में गजब का निखार आता है।
    • यदि आप चाहते है कि आपके बच्चे परीक्षा में अच्छे नम्बर लाये तो आप-अपने बच्चे के अध्ययन कक्ष में मां सरस्वती की फोटो अवश्य लगायें।
    • जिन लोगों की वाणी काफी तीखी है जिसकी वजह से अक्सर उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे लोग मां सरस्वती की पूजा अवश्य करें।
    • इन मंत्रों का करें जाप

      इन मंत्रों का करें जाप

      शिक्षा, मीडिया, अधिवक्ता, डाक्टर, प्रोफेसर, साहित्यकार, टीवी एंकर, रेडियो एंकर, छात्र आदि सभी वे लोग जिनका प्रोफेसन वाणी, विद्या या संगीत के से जुड़ा है वे लोग सरस्वती जी के इन मन्त्रों का जाप करने से अधिक से अधिक लाभ प्राप्त करेंगे...

      • एकाक्षर मन्त्र-ऐं
      • द्वाक्षर मन्त्र-आं लृं, ऐं, लृ,
      • त्रक्षर मन्त्र-ऐं, रूं, स्वों,
      • चतुक्र्षर मन्त्र-ऊॅ ऐं नमः।
      • नवाक्षर सरस्वती मन्त्र-ऊॅ ऐं ह्रीं सरस्वतै नमः,
      • शाक्षर सरस्वती मन्त्र-वद वद वाग्वादिन्यै स्वाहा, ह्रीं ऊॅ हंसो ऊॅ सरस्वत्यै नमः
      • एकादशाक्षर मन्त्र- ऊॅ ऐं ह्रीं ऊॅ सरस्वतै नमः,
      • ऐं वाचस्पते अमृते प्लुवः प्लुः।
      • ऐं वाचस्पतेअमृते प्लवः प्लवः।
      • एकादशाक्षर चिन्तामणि सरस्वती मन्त्र- ऊॅ ह्रीं हस्त्रै ह्रीं ऊॅ सरस्वतै नमः।
      • एकादशाक्षर पारिजात सरस्वती मन्त्र- ऊॅ ह्रीं हंसौ ह्रीं ऊॅ सरस्वतैः नमः, ऊॅ ह्रीं हस्त्रै ह्रीं ऊॅ सरस्वतै नमः।
      • द्वादशाक्षर सरस्वती मन्त्र-ह्रीं वद वद वाग्-वादिनि स्वाही ह्रीं।
      • अन्तरिक्ष सरस्वती मन्त्र- ऊॅ ऐं अन्तरिक्ष-सरस्वती स्वाहा।
      • षोडशाक्षर सरस्वती मन्त्र-ऐं नमः भगवति वद वद वाग्देवि स्वाहा।

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