जानिए चर, स्थिर और द्विस्वभाव राशियों का क्या फल होता है?

नई दिल्ली, 22 अगस्त। जातक के जन्म के समय चंद्रमा जिस राशि में गोचर कर रहा होता है वही राशि जातक की होती है। राशियां तीन प्रकार की होती हैं- चर, स्थिर और द्विस्वभाव। पहली से बारहवीं राशि तक क्रमश: चर, स्थिर और द्विस्वभाव राशियां होती हैं। इस प्रकार मेष, कर्क, तुला और मकर चर राशियां होती हैं। वृषभ, सिंह, वृश्चिक और कुंभ स्थिर राशियां होती हैं। मिथुन, कन्या, धनु और मीन द्विस्वभाव राशियां होती हैं। राशियों के इन तीन स्वभावों के कारण इनमें जन्म लेने वाले का भाग्य और स्वभाव भी उसी के अनुरूप होता है।

जानिए चर, स्थिर और द्विस्वभाव राशियों का क्या फल होता है

आइए जानते हैं तीनों प्रकार की राशियों में जन्म लेने वाले जातकों के बारे में...

  • चर राशियां- मेष, कर्क, तुला और मकर राशि में जन्म लेने वाले जातकों को जो भी मिलता है वह स्थायी नहीं होता। इन्हें क्षणिक ऐश्वर्य मिलता है, किसी से मित्रता होती है तो वह भी क्षणिक होती है। ये चंचल प्रकार के होते हैं। भ्रमणशील होते हैं और सदैव अपनी प्रतिज्ञा से, अपनी कही हुई बात से विमुख रहते हैं।
  • स्थिर राशियां- वृषभ, सिंह, वृश्चिक और कुंभ राशि में जन्म लेने वाले जातकों का भाग्य और स्वभाव चर राशि के जातकों के ठीक विपरीत होता है। अर्थात् इनके पास अचल संपत्ति रहती है, इनकी मित्रता भी स्थायी रहती है। स्वभाव स्थिर होता है और ये हमेशा अपने नियमों पर चलते हैं। क्षमाशील होते हैं एवं दीर्घसूत्री कार्य लेकर चलने वाले होते हैं।
  • द्विस्वभाव राशियां- मिथुन, कन्या, धनु और मीन राशि में जन्म लेने वाले जातक दानी और उत्साही किस्म के होते हैं। इनमें भी यदि द्विपद राशि जैसे मिथुन-कन्या में जन्म हो तो जातक को ग्रामीण जीवनयापन करना पसंद होता है। चतुष्पद राशिगत अर्थात् धनु का चंद्रमा हो तो जातक जंगली जीवन बिताने वाला होता है। जलचरस्थ राशिगत अर्थात् मीन राशि का चंद्रमा हो तो जातक जलप्रिय होता है।

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