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Karwa Chauth 2019: करवा चौथ पर 70 साल बाद बना विशेष संयोग

By Pt. Gajendra Sharma
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    Karwa Chauth 2019 पर 70 साल बाद बना शुभ संयोग, ये हैं पूजा का सही वक्त | वनइंडिया हिंदी

    नई दिल्ली। सुहागिन महिलाओं के लिए साल का सबसे बड़ा व्रत करवा चतुर्थी 17 अक्टूबर 2019, गुरुवार को आ रहा है। कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को आने वाले इस व्रत के दिन इस बार एक विशेष संयोग बना है। इस बार करवा चतुर्थी रोहिणी नक्षत्र में आ रहा है, यह नक्षत्र चंद्र का सबसे प्रिय नक्षत्र होता है। इसलिए इस दिन किए गए व्रत के प्रभाव से न केवल पति-पत्नी के बीच आपसी प्रेम में जबर्दस्त तरीके से वृद्धि होने वाली है, बल्कि दोनों को लंबी आयु और स्वस्थ जीवन प्राप्त होगा।

    रोहिणी नक्षत्र

    रोहिणी नक्षत्र

    रोहिणी नक्षत्र में करवा चतुर्थी का व्रत आने से मंगलकारी योग बना है। पंचांगों के अनुसार यह संयोग 70 साल बाद बना है। कहा जाता है कि यह योग भगवान श्रीकृष्ण और सत्यभामा के मिलन के समय भी बना था। इस दिन महिलाएं हाथों में मेहंदी रचाकर, सोलह श्रृंगार करके अपने सुहाग की लंबी आयु के लिए पूरे दिन निर्जला रहकर व्रत रखती हैं और रात्रि में चंद्रोदय होने पर चांद की पूजा करके व्रत खोलती हैं। इस दिन सुहागिन महिलाएं करवा माता, गणेशजी और चांद की पूजा करती हैं।

    यह पढ़ें: Karwa Chauth 2019: कब है करवा चौथ, जानिए पूजा का समय, मुहूर्त एवं विधि

    करवा चतुर्थी व्रत कथा

    करवा चतुर्थी व्रत कथा

    एक समय इंद्रप्रस्थ नामक स्थान पर वेद शर्मा नामक एक विद्वान ब्राह्मण रहता था। उसकी पत्नी का नाम लीलावती था। उसके सात पुत्र और वीरावती नामक एक पुत्री थी। युवा होने पर वीरावती का विवाह करा दिया। इसके बाद जब कार्तिक कृष्ण चतुर्थी आई तो वीरावती ने अपनी भाभियों के साथ करवा चौथ का व्रत रखा, लेकिन भूख-प्यास सहन नहीं कर पाने के कारण चंद्रोदय से पूर्व ही वह मूर्छित हो गई। बहन की यह हालत भाइयों से देखी नहीं गई। तब भाइयों ने पेड़ के पीछे से जलती मशाल का उजाला दिखाकर बहन को होश में लाकर चंद्रोदय होने की सूचना दी। वीरावती ने भाइयों की बात मानकर विधिपूर्वक अर्घ्य दिया और भोजन कर लिया। ऐसा करने से कुछ समय बाद ही उसके पति की मृत्यु हो गई। उसी रात इंद्राणी पृथ्वी पर आई। वीरावती ने उससे अपने दुख का कारण पूछा तो इंद्राणी ने कहा कि तुमने वास्तविक चंद्रोदय होने से पहले ही अर्घ्य देकर भोजन कर लिया। इसलिए तुम्हारा यह हाल हुआ है। पति को पुनर्जीवित करने के लिए तुम विधिपूर्वक करवा चतुर्थी व्रत का संकल्प करो और अगली करवा चतुर्थी आने पर व्रत पूर्ण करो। इंद्राणी की सलाह मानकर वीरावती ने उसी समय व्रत का संकल्प लिया। उसके प्रभाव से इंद्राणी ने उसके पति को जीवित कर दिया। इसके बाद वीरावती ने अगली करवा चतुर्थी पर विधिपूर्वक व्रत पूर्ण किया।

     चतुर्थी कब से कब तक

    चतुर्थी कब से कब तक

    • चतुर्थी तिथि प्रारंभ 17 अक्टूबर प्रातः 6.48 बजे से
    • चतुर्थी तिथि समाप्त 18 अक्टूबर प्रातः 7.28 बजे तक
    • करवा चतुर्थी का चंद्रोदय 17 अक्टूबर को रात्रि 8.32 बजे
    • रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ 17 अक्टूबर दोपहर 3.51 बजे से
    • रोहिणी नक्षत्र समाप्त 18 अक्टूबर को शाम 4.58 बजे तक

    नोट: चंद्रोदय का समय उज्जैनी पंचांग के अनुसार है। स्थानीय समयानुसार इसमें कुछ सेकंड से लेकर कुछ मिनट तक का परिवर्तन संभव है।

    यह पढ़ें: Kartik Mahina in 2019: कार्तिक माह के प्रमुख व्रत-त्योहार

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    English summary
    Karva or Karwa Chauth ( 17 OCTOBER 2018) is most important festival for all married women. It is a one day long festival celebrated every year by the Hindu women especially in the North India.
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