Karva Chauth 2017: चांद देखने से पहले न करें ये गलती, हो सकता है अशुभ

करवा चैथ की तारीख नजदीक आते ही, सुहागन महिलाएं अति उत्साहित हो जाती है और उसके कुछ दिन पहले से तैयारी शुरु कर देती है।

करवा चैथ की तारीख नजदीक आते ही, सुहागन महिलाएं अति उत्साहित हो जाती है और उसके कुछ दिन पहले से तैयारी शुरु कर देती है। वे बहुत खुशी और उत्साह के साथ उस दिन का बड़ी बेसब्री से इन्तजार करती है। इस त्यौहार में चन्द्रोदय समारोह का विशेष महात्म्य है।

Karva Chauth 2017

चन्द्रोदय समारोह की विधि-

महिलाएं चंद्रोदय समारोह की रस्म के लिए अपनी पूजा थाली को तैयार करती है। पूजा थाली में घी का दीया, चावल के दाने, पानी भरे बर्तन, माचिस, मिठाई, पानी का एक गिलास और एक छलनी शामिल है। एक बार आकाश में चंद्रमा उगने के बाद, महिलाएं चाँद देखने के लिए अपने घरों से बाहर आती है। सब से पहले वे चन्द्रमा को अर्घ्य देती है, चाँद की ओर चावल के दाने डालती है, छलनी के अन्दर घी का दिया रखकर चॉद को देखती है। वे अपने पतियों की समृद्धि, सुरक्षा और लंबे जीवन के लिए चंद्रमा से प्रार्थना करती हैं। चाँद की रस्म पूरी करने के बाद, वे अपने पति,सासु मॉ और परिवार अन्य बडों के पैर छू कर सदा सुहागन और खुशहाल जीवन का आशीर्वाद लेती हैं। कहीं कहीं चाँद को सीधे देखने के स्थान पर उसकी परछाई को पानी में देखने का रिवाज है। पैर छूने के बाद, पति अपने हाथों से अपनी पत्नी को मिठाई खिलाकर पानी पिलाते है।

चाँद का महत्व-

अधिकतर महिलायें अपने उपवास को खोलने के लिए पहले एक छलनी के माध्यम से चाँद को देखती है और फिर तुरंत अपने पति को देखती है। चॅूकि धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस दिन चंद्रमा को भगवान शिव या भगवान गणेश के प्रतिनिधि के रूप में माना जाता है। हिन्दू धर्म में भगवान शिव को कल्याणकारी माना गया है और गणेश जी सबके प्रथम पूजनीय है। कृष्ण पक्ष चतुर्थी का चन्द्रमा कमजोर होता है, जिसे नंगी आॅखो से देखने पर चन्द्रमा का हमारे मस्तिष्क व आॅखों पर प्रतिकुल प्रभाव पड़ता है, जो महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं होता है। इसी कारणवश करवा चैथ वाले दिन महिलायें छलनी के माध्यम से चाॅद को देखती है। ऐसा करने से महिलाओं पर बलहीन चन्द्रमा का प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है।

करवा चैथ का अर्थ-

करवा का अर्थ मिटटी से बना बर्तन जिसमे गेहूं रखी जाती है और चैथ का अर्थ होता है चैथा दिन। करवा चैथ को कृष्णा पक्ष के चैथे दिन (चतुर्थी) को मनाया जाता है। करवा चैथ से कुछ दिन पहले औरतें गोल आकार वाले मिटटी के बर्तनों को खरीदती है और उनके विभिन्न प्रकार के रंगों से सजाती हैं। इसके इलावा औरतें इन बर्तनों में चूड़िया, परांदे, मिठाई, कपडा, और सजावट का सामान रखती हैं। इसके बाद औरतें एक दूसरे से मिलती हैं और अपने करवों को एक दूसरे को देतीं हैं​।​

चांद देखने से पहले न करें ये गलती-

1-चांद देखने से पूर्व स्त्रियाॅ गौरी माता की पूजा करना न भूलें। पूजन के बाद मूर्ति को हलवा पूरी अर्पित करनी चाहिए और वही प्रसाद अपनी साॅस और ननद को देना चाहिए।

2- चन्द्रमा माता का कारक होता है, इसलिए यदि करवाचैथ वाले दिन विवाहित महिलाओं ने यदि चाॅद देखने पहले अपनी साॅस, माॅ या किसी बड़ी बुजुर्ग औरत का किसी भी प्रकार से अपमान न करेंगी तो उनके लिए कुछ भी अशुभ हो सकता है।

3- चतुर्थी की रात्रि को जिसमें चंद्रमा दिखाई देने वाला है, उस दिन प्रातः स्नान करके अपने सुहाग (पति) की आयु, आरोग्य, सौभाग्य का संकल्प लेकर दिनभर स्त्रियाॅ निराहार व्रत रखती है। व्रत वाले दिन किसी भी प्रकार का झूठ न बोलें, मानसिक तनाव न लें और किसी को भी कष्ट न पहुॅचायें।

4-उपवास वाले दिन विवाहित स्त्रियाॅ चाॅद देखने से पूर्व किसी को भी दूध, दही, चावल, सफेद कपड़ा या कोई भी सफेद वस्तु न दें अन्यथा चन्द्रमा पीड़ित होकर अशुभ फल देगा।

5-पूजा थाली लेकर एक घेरा बनाकर महिलाओं को बैठना चाहिए और फिर सबसे बड़ी औरत 7 बार फेरी लगाकर एक-दूसरे से थाली बदलें। 6 फेरों में गीत गायें एंव 7वें फेरे में महिलायें एक-दूसरे के सुहागन रहने की प्रार्थना करें।

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