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कालसर्प योग सिर्फ एक भ्रान्ति है, इससे परेशान ना हो

By पं. अनुज के शुक्ल
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लखनऊ। धर्म भय का व्यापार है, जितना डरावोगे उतना कमाओगे। इसी सूत्र का प्रयोग करके झोलाछाप ज्योतिषी लोगों को डराकर अपने बैंक बैलेंस बढ़ा रहें है और वास्तविक चीजों से लोगों को दूर कर रहे है। गलती ठगने वालों की कम है और अन्धविश्वासी लोगों की ज्यादा है।

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कालसर्प योग सिर्फ एक भ्रान्ति है, इससे परेशान ना हो

जो लोग कर्म पर विश्वास न करके भाग्य को चमकाने के लिए पंडित जी के पास चमत्कार की उम्मीद लेकर जाते है, वो लोग ही ठगे जाते है। ज्योतिष एक विज्ञान है, जो हमारे जीवन के लिए एक अच्छे मार्गदर्शक का कार्य बेहतर ढंग से कर सकता है। खैर हम अपने विषय पर आते है आज हम चर्चा करेंगे क्या सच में कालसर्प योग होता है या फिर इसे बेवजह लोगों को डराने के लिए इस योग को रचित किया गया है।

कालसर्प योग की व्याख्या किसी भी मानक ग्रन्थ

अधिकांश ग्रन्थों में सर्पयोग की व्याख्या तो मिलती है किन्तु कालसर्प योग की व्याख्या किसी भी मानक ग्रन्थ में नहीं मिलती है। फलित ज्योतिष पर विश्वास करने वाले जातको को भयभीत करने वाले कालसर्प योग की वास्तविकता वैदिक ज्योतिष के विरूद्ध है। यह तो सर्वविदित है कि राहु व केतु कोई ग्रह नहीं बल्कि छाया ग्रह है और पृथ्वी एंव चन्द्र की परिक्रमा के कटान बिन्दु है जिसकी चाल तीन कला ग्यारह विकला प्रतिदिन है।

कालसर्प योग की भयानक संज्ञा

राहु-केतु के मध्य में सभी सातों ग्रहों की स्थिति को ही कालसर्प योग की भयानक संज्ञा दी गई है। काल शब्द जोड़ने मात्र से ही जातक के मन में मृत्यु का भय समा जाता है और यदि काल के साथ सर्प जोड़ दिया जाये तो भय और भयानक हो जाता है। लेकिन इन शब्दों का वास्तविक अर्थ कुछ और है जो सामान्य जनमानस को ठगने के कारण पाखण्डी ज्योतिषी ज्ञात नहीं कराते है।

समय और सर्प हमारे लिए पूज्य

काल का वास्तविक अर्थ है समय और सर्प हमारे लिए पूज्य है। महाकाल के अधिष्ठाता महाकालेश्वर भगवान शंकर अपने गले में सर्पदेव को प्रतिपल धारण किये रहते है। राहु के स्वामी तो साक्षात महादेव है, जो काल को नियन्त्रित करते है। शिवमहापुराण के अनुसार तो राहु का नक्षत्र आर्दा तो शिवजी का अतिप्रिय नक्षत्र है, जिस नक्षत्र में सूर्य के आने से वर्षा ऋतु प्रारम्भ होती है। जिस कारण काल अर्थात समय और सर्प हमारे लिए पूज्य है।

पूजन करने का विधान

नागपंचमी के दिन तो नागदेवता को दूध पिलाकर उनका पूजन करने का विधान है। पंचमी तिथि के स्वामी भी नागदेवता है। महादेव ही सम्पूर्ण चराचर जगत् देव, मनुष्य व राक्षस वर्ग के अधिष्ठाता है एंव उनके गले में प्रतिष्ठित नागदेव को काल अर्थात समय को नियमित करने का विशेषाधिकार शिवजी को ही है।

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English summary
Kaal Sarp Yog in anyone's kundli is always affect badly his life. People face problems related to jobs, child, family planning, money etc
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