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बुध हो रहे हैं वक्री.. जानिए क्या होगा आपका हाल

By Pt. Gajendra Sharma
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    नई दिल्ली। मानसिक शक्ति, ज्ञान, विवेक, बुद्धि और शिक्षा का प्रतिनिधि ग्रह बुध आषाढ़ शुक्ल चतुर्दशी गुरुवार 26 जुलाई को प्रातः 10 बजकर 34 मिनट पर पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में वक्री हो रहा है। यह ग्रह 25 दिन वक्री रहने के बाद श्रावण शुक्ल नवमी रविवार 19 अगस्त को प्रातः 9 बजकर 52 मिनट पर पुनः मार्गी हो जाएगा। बुध के वक्री होने से कुछ राशि वालों को लाभ होगा तो कुछ के जीवन में परेशानियां आएंगी। जिन लोगों की जन्मकुंडली में बुध वक्री है वे लोग दूसरों की अपेक्षा कुछ धीमी गति के होते हैं। इन्हें कोई भी बात धीरे-धीरे ही समझ में आती है। इनकी तर्क शक्ति कमजोर होती है और चीजों और काम के प्रति सतर्क नहीं रहते हैं। जरा सी मुसीबत आने पर घबरा जाते हैं और घबराहट में ज्यादा गलतियां कर बैठते हैं। वक्री बुध वाले व्यक्ति आत्मचिंतन ज्यादा करते हैं तथा हकीकत से ज्यादा कल्पना लोक में विचरण करते हैं। 26 जुलाई से 25 दिन के वक्री होन रहे बुध का सभी राशियों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ने वाला है। वर्तमान में बुध कर्क राशि में गोचर कर रहे हैं।

    आइए जानते हैं किस राशि के लिए वक्री बुध का क्या प्रभाव होगा... 

    सुख, सौभाग्य, धन-संपत्ति में वृद्धि

    सुख, सौभाग्य, धन-संपत्ति में वृद्धि

    • मेष: मेष राशि के लिए बुध चतुर्थ स्थान में वक्री होगा। यह सुख स्थान है इसलिए मेष राशि वाले जातकों को मिलाजुला प्रभाव मिलेगा। एक ओर जहां इस राशि के जातकों के सुख, सौभाग्य, धन-संपत्ति में वृद्धि होगी, वहीं दूसरी ओर मन में बैचेनी बढ़ेगी। वाणी में कटुता और रूखापन आ जाएगा। जातक में अहंकार और व्यर्थ के वैभव प्रदर्शन की प्रवृत्ति बढ़ेगी। चूंकि बुध का शत्रु ग्रह चंद्र है और गोचर चंद्र की ही कर्क राशि में हो रहा है इसलिए मेष राशि के जातक मानसिक अस्थिरता के शिकार होंगे।
    • वृषभ: वृषभ राशि के जातकों के लिए बुध तृतीय स्थान में वक्री होगा। इससे आपकी निर्णय क्षमता प्रभावित होगी। न चाहते हुए भी कई मूर्खतापूर्ण काम होंगे। ज्यादा चालाकी भारी पड़ सकती है, इसलिए संयम से रहें। तृतीय स्थान भाई-बंधुओं का भाव है अतः किसी बात को लेकर अपने भाई-बहनों से विवाह संभव है। संभव हो तो इन 25 दिनों में पैतृक संपत्ति से संबंधित कोई काम ना करें, वरना आपके हाथ कुछ नहीं आएगा। इस दौरान किसी भी काम में परिश्रम अधिक करना होगा और उसके मुकाबले परिणाम कम प्राप्त होगा।
    • मिथुन: इस राशि के जातकों के लिए बुध द्वितीय भाव यानी धन स्थान में वक्री होगा। अपनी वाणी और चतुराई के दम पर धन संबंधी मामलों में लाभ हासिल करेंगे। संपत्ति खरीदने के योग बनेंगे। हालांकि धन अधिक आ जाने से अपव्यय भी करेंगे। मिथुन राशि का स्वामी ही बुध है अतः स्वामी के वक्री होने से भौतिकतावादी प्रवृत्ति बढ़ेगी। मन में लालच पनपेगा। परिजनों मित्रों के प्रति व्यवहार कठोर होगा।
    • कर्क: कर्क राशि के जातकों के लिए बुध प्रथम स्थान लग्न भाव में वक्री होगा। शारीरिक और मानसिक रूप से कुछ कमजोरी महसूस करेंगे। निर्णय क्षमता कमजोर होगी। जीवन में उतावलापन बढ़ेगा, लेकिन ध्यान रहे किसी काम को या किसी भी निर्णय को जल्दबाजी में न करें, वरना नुकसान हो सकता है। इस दौरान नया कार्य-व्यवसाय प्रारंभ करना चाहते हैं तो अच्छी तरह सोच-विचारकर ही करें।
    शत्रुओं पर विजय हासिल करने की शक्ति मिलेगी

    शत्रुओं पर विजय हासिल करने की शक्ति मिलेगी

    • सिंह: सिंह राशि के लिए बुध द्वादश स्थान यानी व्यय भाव में वक्री होगा। शत्रुओं पर विजय हासिल करने की शक्ति आपमें आ जाएगी। लेकिन फिर भी सावधान रहें, गुप्त शत्रु सक्रिय रहेंगे वे आपको किसी प्रकार की आर्थिक या शारीरिक हानि पहुंचा सकते हैं। बुध के वक्रत्व काल में आपके पास जितनी गति से पैसा आएगा, उसी गति से उसे खर्च भी करेंगे। यूं कहा जा सकता है कि व्यर्थ के कार्यों में पैसा लुटाएंगे। भूमि संपत्ति संबंधी कार्यों में लाभ मिलेगा।
    • कन्या: यह राशि का स्वामी स्वयं बुध है और वह इसमें उच्च का भी होता है। कन्या राशि के लिए बुध एकादश भाव यानी आय स्थान में वक्री होगा। इसका शुभ प्रभाव इस राशि वालों को मिलेगा। रोगों से मुक्ति के साथ धन-संपदा में वृद्धि होगी। मित्रों की संख्या में वृद्धि होगी। नया व्यापार-व्यवसाय प्रारंभ कर सकते हैं या वर्तमान कार्य में विस्तार होगा। वैवाहिक जीवन सुखी रहेगा।
    • तुला: तुला राशि के जातकों के लिए बुध दशम स्थान में वक्री हो रहा है। चूंकि बुध का मित्र ग्रह है शुक्र इसलिए तुला राशि के लिए यह समय अच्छा बीतेगा। नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन मिलेगा। व्यापारी कार्य विस्तार करेंगे। वाहन सुख की प्राप्ति होगी। समाज में पद-प्रतिष्ठा बढ़ेगी। जिन लोगों के विवाह में बाधा आ रही थी उनके विवाह के रास्ते अब खुलेंगे।
    • वृश्चिक: इस राशि के लिए बुध नवम स्थान में वक्री होगा। नवम स्थान धर्म स्थान है। वक्री बुध के प्रभाव से वृश्चिक राशि के जातकों के व्यवहार में आश्चर्यजनक रूप से बदलाव आएगा। धर्म के प्रति जातक की अरुचि जाहिर होगी। धार्मिक कार्यों से चिढ़ने लगेगा। दूसरों के प्रति व्यवहार में भी कठोरता आएगी। क्रोधी बर्ताव के कारण पारिवारिक और बाहरी जीवन में शत्रु पैदा करेंगे।
    • धनु: इस राशि के लिए बुध अष्टम भाव में वक्री होगा। धनु राशि वालों को विशेषतौर पर ध्यान रखना होगा कि 25 दिन बुध के वक्रत्व काल में किसी भी मामले में तनाव नहीं लेना है, वरना मस्तिष्क संबंधी कोई गंभीर रोग हो सकता है। किसी भी काम में उतावलापन नुकसानदायक साबित होगा इसलिए धैर्य और संयम संयम से काम लें। परिवार को महत्व देंगे तो फायदे में रहेंगे।
     प्रेम प्रसंग के लिए अच्छा वक्त...

    प्रेम प्रसंग के लिए अच्छा वक्त...

    • मकर: मकर राशि के लिए बुध सप्तम भाव में वक्री होगा। सप्तम स्थान वैवाहिक जीवन, जीवनसाथी और प्रेम प्रसंगों का स्थान है। मकर राशि के अविवाहित जातकों के विवाह की बात अटक सकती है। विवाहित लोगों को अपने जीवनसाथी को पर्याप्त सम्मान और महत्व देना होगा। नए प्रेम प्रसंग प्राप्त होंगे लेकिन सावधान रहें, कहीं कोई आपको ब्लैकमेल न करें।
    • कुंभ: बुध छठे भाव में कुंभ राशि के लिए वक्री होंगे। इस कारण कुंभ राशि के जातकों का व्यवहार चिड़चिड़ा हो जाएगा। छोटी-छोटी बातों पर परिवार और बाहरी स्थिति में विवाद करने लगेंगे। वाणी में कटुता के कारण अपनों से रिश्ते खराब कर बैठेंगे। आर्थिक मामलों में सावधानी रखना है, हानि की आशंका है। नया वाहन इन 25 दिनों में न खरीदें।
    • मीन: मीन राशि में बुध नीच का होता है और इस राशि के लिए पंचम भाव में वक्री होगा। वक्री बुध के प्रभाव से इस राशि के लिए मिलाजुला समय रहेगा। आर्थिक मोर्चे पर तो सफलता अर्जित होगी, लेकिन पारिवारिक स्थिति में वाद-विवाद बढ़ेगा। आपसी मनमुटाव होगा। दोस्तों के साथ भी विवाद हो सकता है। निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होने के कारण कुछ गलत निर्णय भी हो जाएंगे।

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    English summary
    When Mercury retrogrades which it will on July 26, 2018. it appears to scoot backward across the sky: The messenger planet makes a much tighter solar orbit than earth does, creating an optical illusion of retro motion.

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