Saturn Effect: शनि के वक्री होने से राशियों पर प्रभाव

लखनऊ।न्याय का अधिष्ठाता शनि वर्तमान में धनु राशि में गोचर कर रहा है और यह पूरे वर्ष धनु राशि में ही गोचर करेगा। समय-समय पर आकाश में ग्रह वक्री होते रहते है। ऐसे ही 18 अप्रैल को शनि ग्रह प्रातः 7ः12 मि0 पर धनु राशि में गोचर करते हुये वक्री हो रहा है, जो 06 सितम्बर दिन गुरूवार को सांय 5ः10 मि0 तक वक्री रहेगा। शनि ग्रह लगभग 142 दिन तक वक्री रहता है। आईये जानते है कि शनि के वक्री होने पर द्वादश राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

  • मेष राशि-इस राशि में शनि दशम एवं एकादश भाव का स्वामी होकर भाग्य भाव में गोचर करेगा। बनते हुये कार्यो में रूकावटें आयेंगी। इस समय धन निवेश करने में सावधानी बरतने की आश्यकता है। रोग से सावधान रहने की जरूरत है।
  • वृष राशि-शनि इस समय आपके अष्टम भाव में गोचर कर रहा है, जिसकी तृतीय दृष्टि दशम भाव पर पड़ रही है, इसलिए कैरियर व व्यवसाय में अड़चने उत्पन्न हो सकती है। उत्साह में कमी बनी रहेगी।
  • मिथुन राशि-इस समय शनि आपके सप्तम भाव में होकर वक्री है, जिसकी सीधी सप्तम दृष्टि लग्न पर पड़ रही है। जीवन साथी से अनबन के कारण मानसिक तनाव रह सकता है। वाहन चलाने में सावधनी बरतें वरना दुर्घटना घट सकती है।

शनि के वक्री होने से पड़ेगा असर

शनि के वक्री होने से पड़ेगा असर

  • कर्क राशि-शनि आपके छठें भाव यानि रोग भाव में बैठकर वक्री हो रहा है, जिस कारण अचानक सस्यायें आ सकती है, रोग में वृद्धि व शादी-शादी लोगों का किसी अन्य से प्रेम-प्रसंग हो सकता है।
  • सिंह राशि-शनि छठें व सातवें भाव का मालिक होकर पाॅचवें भाव में गोचर कर रहा है। अतः शनि के वक्री होने से जीवन साथी से तनाव, कार्य व व्यवसाय को लेकर टेंशन, खर्चो में वृद्धि, लाभ में कमी आदि समस्यायेंब नी रह सकती है।
  • कन्या राशि-शनि पाचवें व छठें भाव का स्वामी होकर चैथे भाव में गोचर कर रहा है। अतः शनि के वक्री होने से रोग में वृद्धि, पुराने प्रेम में खटपट, कार्यो में बाधायें, सन्तान को लेकर कष्ट आदि प्रकार की समस्यायेंब नी रह सकती है।
  • शनि के वक्री होने से रोग में वृद्धि, पुराने प्रेम में खटपट हो सकती है

    शनि के वक्री होने से रोग में वृद्धि, पुराने प्रेम में खटपट हो सकती है

    • कन्या राशि-शनि पाचवें व छठें भाव का स्वामी होकर चौथे भाव में गोचर कर रहा है। अतः शनि के वक्री होने से रोग में वृद्धि, पुराने प्रेम में खटपट, कार्यो में बाधायें, सन्तान को लेकर कष्ट आदि प्रकार की समस्यायें बनी रह सकती है।
    • तुला राशि-वर्तमान में शनि आपके तीसरे भाव में गोचर कर रहा है इसलिए शनि के वक्री होने से मानसिक तनाव, प्रेमी वर्ग के आपस में झगड़े, घरेलू कार्यो में देरी होने से जीवन साथी से तनाव, माता के स्वास्थ्य में कमी, शिक्षा के क्षेत्र में बाधायें आदि बनी रहेगी।
    • वृश्चिक राशि- शनि के दूसरे भाव में गोचर कर रहा है। वाहन सुख में कमी, माता का स्वास्थ्य प्रभावित होगा, नौजवान वाहन सावधानी से चलायें वरना दुर्घटना घट सकती है। कुछ लोगोें के परिर्वत के योग भी बन रहें है।
     व्यर्थ की यात्रायें आदि समस्यायें बनी रहेगी

    व्यर्थ की यात्रायें आदि समस्यायें बनी रहेगी

    • धनु राशि-इस समय शनि आपके लग्न में गोचर कर रहा है। अतः शनि के वक्री होने से जीवन साथी से नोंक-झोक, आत्म बल में कमी, कैरियर व व्यसाय में उलझने, व्यर्थ की यात्रायें आदि समस्यायें बनी रहेगी।
    • मकर राशि-इस राशि में शनि लग्न एवं दूसरे भाव का मालिक है। गोचर में शनि 12वें भाव में होकर वक्री हो रहा है। अतः वाणी पर नियन्त्रण बनायें रखें। परिवार में किसी से अनबन हो सकती है। आय की अपेक्षा व्यय अधिक रहेगा जिससे मन परेशान रहेगा।
    • वक्री होने से खर्चे बढ़ेगे

      वक्री होने से खर्चे बढ़ेगे

      • कुम्भ राशि-वर्तमान में शनि आपके लाभ भाव में वक्री हो रहा है। मानसिक समस्यायेंब नी रहेगी। प्रेमी वर्ग इस दौरान संयम बनायें रखें वरना छोटी समस्या बड़ी समस्या का रूप ले सकती है। आर्थिक लेन-देन में सावधानी बरतें।
      • मीन राशि- इस समय शनि आपके 10वें भाव में गोचर कर रहा है। अतः वक्री होने से खर्चे बढ़ेगे एवं अस्पताल का आना लगा रह सकता है। नींद व शयया सुख में कमी आयेगी। वाहन छति हो सकती है। प्रेम सम्बन्धों में तनाव हो सकता है।

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