Diwali 2017: दिवाली में लक्ष्मी के साथ गणेश की पूजा किसलिए होती है?

Written By: पं.अनुज के शुक्ल
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      Diwali 2017: क्यूं होती है दिवाली पर लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी की पूजा । वनइंडिया हिंदी

      लखनऊ।लक्ष्मी की अधिकता होने पर अक्सर लोग विवेक खो देते है और धन का दुरूप्रयोग करने लगते है। धन का सद्पयोग हो, विकास हो, परोपकार हो इसके लिए सद्बुद्धि का होना आवश्यक है। गणेश जी बुद्धि के देवता है, जिनकी दो पत्नियां रिद्धि व सिद्धि और दो पुत्र है शुभ-लाभ। लक्ष्मी जी धन का प्रतिनिधित्व करती है एंव गणेश जी बुद्धि व विवेक के प्रतीक है। बिना विवेक के लक्ष्मी का शुभ-लाभ नहीं हो सकता। इसी कारणवश दीपावली में लक्ष्मी जी के साथ गणपति की अराधना का विधान है।

      दिवाली में लक्ष्मी के साथ गणेश की पूजा किसलिए होती है?

      दीपावली की शुभ रात्रि में धन वृद्धि की कामना के साथ-साथ विवेक की आराधना भी करनी चाहिए। क्योंकि अगर धन आया और विवेक न आया तो लक्ष्मी जी का सद्पयोग नहीं दुरूप्रयोग ही होगा।

      पौराणिक कथा-

      पौराणिक ग्रन्थों में एक कथा का उल्लेख मिलता है कि लक्ष्मी जी की पूजा गणेश जी के साथ क्यों होती है। एक बार एक वैरागी साधु को राजसुख भोगने की लालसा उत्पन्न हुई, उसने लक्ष्मी जी की आराधना प्रारम्भ की। साधु की आराधना से लक्ष्मी जी प्रसन्न हुईं और उसे साक्षात् दर्शन देकर वरदान दिया कि उसे उच्च पद और सम्मान प्राप्त होगा। दूसरे दिन वह वैरागी साधु राज दरबार में पहुंचा। अहंकार से लबरेज साधु ने राजा को धक्का मारा जिससे राजा का मुकुट जमीन पर गिर गया। राजा व उसके कर्मचारी गण उसे मारने के लिए दौड़े। किन्तु इसी बीच राजा के गिरे हुए मुकुट से एक काला नाग निकल कर भागने लगा। दरबार में उपस्थित सभी लोग आश्चर्य चकित हो गए और साधु को चमत्कारी समझकर उस की जय जयकार करने लगे।

      साधु को मंत्री बना दिया

      राजा ने खुश होकर साधु को मंत्री बना दिया, क्योंकि उसी के कारण राजा की जान बची थी। साधु को रहने के लिए अलग से महल दिया गया वह शान से रहने लगा। राजा को एक दिन वह साधु भरे दरबार से हाथ खींचकर बाहर ले गया। यह देख दरबारी जन भी पीछे भागे। सभी के बाहर जाते ही भूकंप आया और भवन खण्डहर में तब्दील हो गया। उसी साधु ने सबकी जान बचाई। अतः साधु का मान-सम्मान बढ़ गया। जिससे उसमें अहंकार की भावना विकसित हो गई।

      एक गणेश जी की प्रतिमा


      राजा के महल में एक गणेश जी की प्रतिमा थी। एक दिन साधु ने वह प्रतिमा यह कह कर वहां से हटवा दी कि यह प्रतिमा देखने में बिल्‍कुल अच्छी नही लगती है। साधु के इस दुव्र्यहार से गणेश जी रुष्ठ हो गए। उसी दिन से उस मंत्री बने साधु की मतिभंग हो गई और वह उल्टा-सीधा काम करने लगा। राजा ने उस साधु से नाराज होकर उसे कारागार में डाल दिया। साधु जेल में पुनः लक्ष्मी जी की आराधना करने लगा। लक्ष्मी जी ने दर्शन दे कर उससे कहा कि तुमने गणेश जी का अपमान किया है। अतः गणेश जी की आराधना करके उन्हें प्रसन्न करो।

      गणेश जी की आराधना प्रारम्भ कर दी

      लक्ष्मी जी का आदेश पाकर साधु ने गणेश जी की आराधना प्रारम्भ कर दी। जिससे गणेश जी का क्रोध शान्त हो गया और गणेश जी ने राजा के स्वप्न में आ कर कहा कि साधु को पुनः मंत्री बनाया जाए। राजा ने गणेश जी के आदेश का पालन किया और साधु को मंत्री पद देकर सुशोभित किया। इस प्रकार लक्ष्मी जी और गणेश जी की पूजा साथ-साथ होने लगी। इस प्रकार दीपावली की रात्रि में लक्ष्मी जी के साथ गणेशजी की भी आराधना की जाती है।

      विशेष-लक्ष्मी जी के साथ गणेश पूजन में इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि गणेश जी को सदा लक्ष्मी जी की बाईं ओर रखें। तभी पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होगा।

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      English summary
      On the day of Diwali, it is a custom to worship Goddess Lakshmi and Lord Ganesha together. It is well-known that Goddess Lakshmi is the Goddess of wealth and prosperity while Lord Ganesha is considered the God of intelligence.

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