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Chhath Puja 2020: जानिए छठ पूजा की कथा और महत्व

By Pt. Gajendra Sharma
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Chhath Puja Katha: संपूर्ण ब्रह्मांड की ऊर्जा का प्रमुख स्रोत सूर्य है। सूर्य का महत्व इसी बात से पता लगता है किवेदों में सूर्य की आराधना सबसे पहले की गई है। सूर्य को पंच देवों गणेश, शिव, दुर्गा और विष्णु के साथ शामिल किया गया है। इसे ग्रह होते हुए भी देवों का स्थान दिया गया है। सूर्य हमारे जीवन में ऊर्जा और उल्लास का प्रतीक है। वैसे तो सूर्य की पूजा-आराधना का कोई एक विशेष दिन निर्धारित नहीं है। सूर्य की पूजा प्रतिदिन की जा सकती है, लेकिन कुछ विशेष अवसर बनाए गए हैं जिन पर सूर्य देव की विशिष्ट पूजा करने का विधान है। ऐसा ही एक पर्व है छठ पूजा।

Chhath Puja 2020: जानिए छठ पूजा की कथा और महत्व
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    उत्तर भारत में विशेषकर बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में छठ पूजा बड़े स्तर पर की जाती है। अब तो पूरे देश में जहां-जहां उत्तर भारतीय लोग रह रहे हैं, वहां छठ पूजा की जाने लगी है। मुख्य छठ पूजा कार्तिक मास के शुक्लपक्ष की षष्ठी तिथि के दिन की जाती है। यह पर्व चार दिनों का होता है। कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से प्रारंभ होकर सप्तमी के दिन सूर्य को अ‌र्घ्य के साथ पर्व का समापन होता है। सूर्य छठ की मुख्य पूजा 20 नवंबर शुक्रवार को होगी।

    सूर्य की कृपा से आयु और आरोग्य की प्राप्ति

    छठ पूजा करने का उद्देश्य जीवन में सूर्यदेव की कृपा पाना है। सूर्य की कृपा से आयु और आरोग्य की प्राप्ति होती है। धन, मान-सम्मान, सुख-समृद्धि, उत्तम संतान की प्राप्ति के लिए छठ पूजा की जाती है। इस व्रत को अत्यंत कठोर नियम और निष्ठा से किया जाता है। इसमें घर और अपने आसपास के परिवेश की साफ-स्वच्छता का भी विशेष महत्व होता है। इसमें चतुर्थी और पंचमी के दिन एक समय भोजन किया जाता है। भोजन में भी कुछ विशेष पदार्थ ही बनाए जाते हैं। छठ के दिन पूरे दिन निर्जल रहकर शाम को अस्त होते सूर्य को अ‌र्घ्य दिया जाता है। सप्तमी के दिन उगते सूर्य को अ‌र्घ्य देकर पर्व का समापन किया जाता है।

    छठ पूजा की कथा

    प्राचीनकाल में बिंदुसार तीर्थ में महिपाल नाम का वणिक रहता था। वह धर्म-कर्म तथा देवता विरोधी था। एक बार उसने सूर्य देव की प्रतिमा के सामने ही मल-मूत्र का त्याग कर दिया। परिणामस्वरूप उसकी आंखों की ज्योति चली गई। बगैर नेत्र के जीवन जीते हुए वह वणिक अपने जीवन से परेशान हो गया और गंगाजी में डूबकर मर जाने के लिए चल दिया। रास्ते में उसकी भेंट महर्षि नारद से हुई। नारदजी ने उससे पूछा किमहाशय इतनी जल्दी-जल्दी कहां जा रहे हो। महिपाल रोते हुए बोला मेरा जीवन दूभर हो गया है। मैं अपनी जान देने गंगा नदी में कूदने जा रहा हूं। महर्षि नारद बोले- मूर्ख प्राणी तेरी यह दशा भगवान सूर्यदेव का अपमान करने के कारण हुई है। तूने सूर्यदेव की प्रतिमा के सामने मल-मूत्र का त्याग किया था। अपने पाप की क्षमा के लिए कार्तिक मास की सूर्य षष्ठी का व्रत कर, तेरे कष्ट दूर हो जाएंगे।महर्षि नारद की बात मानकर वणिक महिपाल ने सूर्य षष्ठी का व्रत किया। उसकी निष्ठा से प्रसन्न होकर सूर्यदेव ने नेत्र ज्योति लौटा दी।

    यह पढ़ें: Chhath Puja 2020: जानिए... चार दिनी छठ पर्व में किस दिन क्या होगा

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    English summary
    Chhath Puja begins on 2oth November, here is Chhath Puja Katha and Importance, Please have look.
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