शनि का अशुभ प्रभाव कम करने के लिए दुर्गा सप्तमी को क्या करें?
नई दिल्ली। नवरात्र के सातवें दिन तीन नेत्रों वाली देवी कालरात्रि की आराधना की जाती है। इनका रंग काला होने के कारण इन्हें कालरात्रि कहा जाता है। असुरों के राजा रक्तबीज का वध करने के लिए मां दुर्गा ने अपने बल से इन्हें उत्पन्न किया था। बिखरे बाल, चमकीले भूषण, सांस लेने पर हजारों आग की लपटें निकलती है, दाहिने हाथ में तलवार, निचला हाथ आशीर्वाद के लिए, बाएं हाथ में जलती हुई मशाल और निचले बाएं हाथ से भक्तों को निडर बनाती है मां कालरात्रि।

क्या संबंध है मां कालरात्रि और शनिदेव का?
अंधकारमय स्थितियों का विनाश करने वाली और काल से भी रक्षा करने मां कालरात्रि और शनिदेव का गहरा संबंध है। शनिदेव का रंग काला है और मां कालरात्रि का स्वरूप भी काले रंग का है। मां कालरात्रि असुरों का विनाश करने वाली है तथा शनिदेव भी दुष्टों व अत्याचारियों को दण्ड देने के लिए जाने जाते हैं। सप्तमी तिथि के स्वामी सूर्य भगवान हैं और शनिदेव के पिता भी सूर्य देव हैं। अतः मां कालरात्रि एंव शनि देव का आपस में भाई-बहन का रिश्ता हुआ। खासबात यह है कि इस बार सप्तमी तिथि शनिवार के दिन ही पड़ रही है। आइये जानते हैं इस शुभ संयोग में कैसे करें मां कालरात्रि का पूजन जिससे शनिदेव की कृपा भी बनी रहे।

ऐसे करें पूजा-पाठ
1- सप्तमी के दिन मां कालरात्रि गुड़ अर्पित करें और गुड़ को प्रसाद रूप में गरीबों को वितरित करें जिससे शनि देव का कुप्रभाव नष्ट होगा।
2- इस मन्त्र ‘‘या देवी सर्वभूतेषु मां कालरात्रि रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो मनः'' का जाप करने मात्र से ही शनि देव बुरा असर समाप्त हो जायेगा।
3- दुर्गा सप्तमी के दिन मां कालरात्रि को दूध में शहद मिलाकर भोग लगाने से शनिदेव बुरा प्रभाव शान्त होता है।

इस मंत्र के जाप से कम होगा शनि का बुरा असर
4- आज के दिन शप्तशती का विधिवत पाठ करने से शनि की साढ़ेसाती व ढैय्या का प्रभाव भी कम हो जाता है।
5- दुर्गा सप्तमी के दिन नावार्ण मन्त्र- "ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै" की कम से कम एक माला जाप करने से शनि देव का बुरा असर कम होने लगता है।

शनि को खुश करने के लिए करें ये काम
6- शनि देव गरीबों के मसीहा हैं, इसलिए सप्तमी के दिन यदि काली उड़द की दाल डालकर खिचड़ी बनायें और उसे गरीबों में वितरित करें तो शनि देव की कृपा बनी रहेगी।
7- शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए सप्तमी के दिन शनि स्त्रोत का पाठ करें एवं बेलगिरि, आंवला और सरसों के तेल से हवन करें।












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