राहुल गांधी के प्रयास और कांग्रेस की कुंडली
नई दिल्ली (ब्यूरो)। कांग्रेस के नवनिर्वाचित उपाध्यक्ष राहुल गांधी की चाल पूरी तरह बदल चुकी है। बोलने और सोचने का तरीका भी। कांग्रेसी नेताओं से मिलना जुलना भी तेज हो गया है। ये सभी बातें कांग्रेस की एक बड़ी सफलता की ओर इशारा कर रही हैं। वो है लोकसभा चुनाव 2014। लेकिन लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल करने की यह डगर कितनी कठिन है, इस बात का अंदाजा राहुल बाबा को अच्छी तरह है। हम यहां चर्चा करेंगे कि उनकी इस डगर में कांग्रेस पार्टी के ग्रह नक्षत्र उनके साथ हैं या नहीं।
कानपुर के ज्योतिष पं. सुशील कुमार त्रिपाठी ने कांग्रेस की कुंडली का अध्ययन किया और प्रसिद्ध ठाकुर प्रसाद के कैलेंडर ने उसे प्रकाशित किया। हम उसी कुंडली के हवाले से यह लेख आपतक पहुंचा रहे हैं। कुंडली के अनुसार कांग्रेस पार्टी का गठन 22 जनवरी 1987 को दिल्ली में मीन लग्न में हुआ था। वर्तमान में 16 दिसंबर 2009 से गुरु की महादशा चल रही है, जो कि चार नवंबर 2011 से गुरु में शनि का अंतर 13 मई 2014 तक चलेगा। इसी दौरान 3 मार्च 2013 तक शुक्र का प्रत्यांतर चलेगा। योगिनी मातानुसार 7 मई 2011 से संकटना योगिनी प्रारंभ है।

16 मार्च 2013 तक संकटना योगिनी की अंतदर्शा चलेगी। 3 मार्च 2013 से 19 अप्रैल 2013 तक सूर्य का प्रत्यांतर, 4 जुलाई 2013 तक चंद्र का प्रत्यांतर 26 अगस्त 2013 तक मंगल का प्रत्यांतर और 14 जनवरी 2014 क राहु का प्रत्यांतर चलेगा।
यानी मार्च 2013 तक का समय पार्टी के लिये संघर्ष से भरा हुआ होगा। इस दौरान कई तनाव और विवाद होंगे। पार्टी के नेतृत्व यानी सोनिया गांधी और राहुल गांधी को बाहरी विरोध का अत्याधिक सामना करना पड़ेगा। हालांकि संगठन के रूप में कांग्रेस पार्टी के मजबूत होने के आसार हैं। 27 अगस्त 2013 से राहु का प्रत्यांतर स्वार्थीतत्व व विरोधियों के द्वारा विवाद खड़े करने के लिये प्रेरित करेगा। इस दौरान कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व लोकसभा भंग करने का निर्णय ले सकता है। ऐसा कठोर निर्णय संभवत: नवंबर या दिसंबर 2013 में लिया जा सकता है।












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