ज्योतिष के माध्यम से दूर भगायें सिर दर्द

एक चेतावनी!
यदि सर में चोट लगने पर आपको अचानक बहुत तेज़, सिर दर्द होता हो या गर्दन में अकड़न, बुखार, बेहोशी या आंख या कान में दर्द होना इत्यादि की शिकायत हो तो यह एक गंभीर विकार भी हो सकता है और जिसके लिए आपको तत्काल चिकित्सीय परामर्श लेना चाहिए।
ज्योतिष विज्ञान आपकी मदद कर सकता है!
यदि किसी विशेषज्ञ को जन्मकुंडली दिखाई जाए तो वह बता सकता है कि व्यक्ति में किन रोगों के आक्रण की अधिक संभावना है और उसके स्वास्थ्य की भावी स्थिति क्या है। प्राचीन समय में प्रसिद्ध रोग विज्ञानी हिप्पोक्रेट्स सबसे पहले व्यक्ति की जन्मसंबंधी तालिका का अध्ययन करता था और फिर उपचार संबंधी कोई निर्णय लेता था!
कोई व्यक्ति किस रोग से पीडि़त होता है, यह इस पर निर्भर करता है कि उसके भाव या राशि का संबंध जन्म कुंडली में कौन से अनिष्टकर ग्रह से किस रूप में है। ऐसा इसलिए है कि प्रत्येक राशि एक या एकाधिक शारीरिक अंगों से जुड़ी होती है। इसके साथ ही प्रत्येक ग्रह वायु, अग्नि, जल या आर्द्र प्रकृति वाला कोई एक प्रभुत्वकारी गुण लिए हुए होता है। आयुर्वेद में इसे वात-पित्त-कफ के रूप में बताया गया है। इस तरह राशि चक्र में अंकित शारीरिक अंग और प्रभुत्वकारी ग्रह की विशेषता के मेल से यह तय होता है कि किस व्यक्ति को कौन-सी बीमारी होगी।
सिर, मस्तिष्क एवं आंखों, विशेष रूप से सर का अगला हिस्सा, आंखों से नीचे और सर के पीछे वाले हिस्से से लेकर खोपड़ी के आधार तक का हिस्सा मेष द्वारा नियंत्रित होता है। यह मंगल को प्रतिबिंबित करता है जो दिमाग में अग्निमय ऊर्जा का स्रोत है। सूर्य, चंद्रमा या मेष का कोई अन्य उदीयमान ग्रह जिस व्यक्ति के साथ जुड़ा होगा उसके सरदर्द की संभावना अन्य लोगों की तुलना में अधिक होगी।
यदि सूर्य पहले, दूसरे या बारहवें घर में विघ्नपूर्ण है या मंगल बहुत कमजोर है या नीच के चंद्रमा के साथ दाहक स्थिति में है तब ऐसे लोग अधकपारी सरदर्द (माइग्रेन) से पीड़ित होंगे। साथ ही यदि अनिष्टकर सूर्य या मंगल छठे घर में बैठा है (व्यक्ति की जन्म कुंडली में रोगों का द्योतक) तो व्यक्ति सरदर्द का शिकार होगा।
जन्मपत्री की कमजोरी और/या जन्मपत्री में उच्च स्थान पर बैठे अनिष्टकर देव के कारण एक रोगकारी परिस्थिति निर्मित होती है। इससे सरदर्द की संभावना बनती है। मजबूत सूर्य और मंगल, जो कि क्रमशः प्राण क्षमता और ऊर्जा के प्रतीक हैं, सुरक्षात्मक कवच प्रदान करते हैं।
वैदिक नुस्खे
सबसे आसान किंतु बेहद प्रभावी उपायों में से एक यह है कि सुबह उठकर सूर्य की ओर देखकर कम से कम 42 दिनों तक 3, 11, 21, 51 या 108 बार ओम सूर्यायः नमः या ओम आदित्याय नमः या गायत्री मंत्र का जाप करें या सूर्य नमस्कार करें।
धन्वंतरि होम और मंगल होम का आयोजन करने से भी प्रभावी तौर पर अनिष्टकर ग्रहों के प्रभाव दूर हो जाते हैं और इस प्रकार सरदर्द आपसे मीलों दूर चला जाता है।












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