Culture: जानिए 'पादुका' के बारे में, सच जानकर हैरान रह जाएंगे आप

By: पं. गजेंद्र शर्मा
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नई दिल्ली। क्या कभी आपने सोचा है कि प्राचीन काल में हमारे ऋषि-मुनी, तपस्वी और संत लोग लकड़ी की बनी पादुका क्यों पहनते थे। वे भी चाहते तो राजा-महाराजाओं की तरह विभिन्न् प्रकार के चर्म से बने जूते-चप्पल पहन सकते थे, लेकिन उन्होंने नहीं पहने। इसका कारण यह है कि ऋषि-मुनी और संत लोगों के पास अन्य लोगों की अपेक्षा अधिक ज्ञान, बुद्धि, विवेक और शक्ति होती थी। वो जो चाहे वह कर सकते थे, जहां चाहे वहां अपनी इच्छा मात्र से पहुंच सकते थे। त्रिकालदर्शी होते थे वे संत। उनकी शक्ति का प्रवाह भूमि की ओर न हो और वह उनकी देह में ही समाहित रहे इसलिए वे चर्म के जूते-चप्पल आदि नहीं पहनते थे। 

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प्राचीन ऋषि

प्राचीन ऋषि

किसी पशु की चर्म से बने जूते नकारात्मक शक्तियां खींचते हैं इसलिए प्राचीन ऋषि उनका इस्तेमाल नहीं करते थे। आज भी अनेक विद्वान संत लकड़ी की पादुकाएं ही पहनते हैं, जिन्हें खड़ाऊ भी कहते हैं। आजकल की आधुनिक लाइफ स्टाइल में लोग तरह-तरह के जूते-चप्पल आदि पहनते हैं, वे स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक होते हैं।

महिलाएं और युवतियां

महिलाएं और युवतियां

खासकर महिलाएं और युवतियां हाई हील के सैंडल, चप्पल आदि पहनती हैं जो न सिर्फ उनके पैरों के लिए बल्कि उनके शरीर का संतुलन बिगाड़ने का काम भी करते हैं। लेकिन फैशन के चक्कर में वे अपनी सेहत से भी समझौता कर लेती है। हालांकि अब कई लोग लकड़ी की पादुका की अपना रहे हैं। आजकल की लाइफ स्टाइल में रोज तो इन्हें पहनना संभव नहीं है लेकिन जब भी मौका मिले घर में ही लकड़ी की पादुका पहन लेना चाहिए।

ये हैं फायदे

ये हैं फायदे

  • पादुका किसी जानवर की चमड़ी से नहीं बनी होती है, इसलिए यह पूर्णतया शुद्ध होती है।
  • इसे बनाने में कई तरह की लकड़ियों का प्रयोग किया जाता है, जो हमारे पैरों की त्वचा को कोई नुकसान नहीं पहुंचाती।
  • पादुका पहनने से हमारे शरीर का संतुलन बेहतर बनता है, इसे पहनकर चलने वालों की शारीरिक मुद्रा बिलकुल सही और आकर्षक होती है।
  • पादुका पहनने से हमारे पैरों के उन प्वाइंट्स पर प्रेशर बनता है जो एक्युप्रेशर के लिहाज से बिलकुल सही हैं। यदि इन प्वाइंट्स पर प्रेशर बनता रहे तो शरीर के कई रोग अपने आप ही नष्ट हो जाते हैं।
सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाती

सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाती

  • पादुका पहनने वाले रिलैक्स रहते हैं। पांव की तंत्रिकाएं जब प्राकृतिक रूप से बनी पादुका के साथ जुड़ी रहती हैं तो यह शरीर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाती है। इससे रोगों का खात्मा होता है।
  • पादुकाएं अनेक प्रकार की लकड़ियों से बनती हैं, जिनका शरीर पर अलग-अलग तरह से असर होता है।
  • आम की लकड़ी से बनी पादुकाएं धार्मिक कार्यों में पहनी जाती हैं। इन्हें पहनने से शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह नीचे से ऊपर की ओर जाता है, जो मस्तिष्क को तरोताजा रखती है।
तंत्रिका तंत्र मजबूत बनता

तंत्रिका तंत्र मजबूत बनता

  • सागवान की लकड़ी से बनी पादुकाएं मजबूत होती हैं। इन्हें पहनने से शरीर का तंत्रिका तंत्र मजबूत बनता है। रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है।
  • नीम की लकड़ी से बनी पादुकाएं पहनने से शरीर के बैक्टीरिया समाप्त होते हैं और इन्हें पहनने वाला व्यक्ति निरोगी रहता है।
  • बबूल की लकड़ी से बनी पादुकाओं से हड्डियों को मजबूती प्रदान करती हैं। इन्हें पहनने से शरीर का संतुलन सुधरता है।
  • . पीपल की लकड़ी से बनी पादुकाएं पहनने से शरीर का रक्त प्रवाह सुधरता है। इससे स्किन संबंधी रोग दूर होते हैं।
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English summary
Paduka is the name of India's oldest, most quintessential footwear. It is little more than a sole with a post and knob, which is engaged between the big and second toe
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