YAM Chaturdashi 2017: जानिए कैसे होती है यम की पूजा, क्या है इसका महत्व, जानिए यहां

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नई दिल्ली। आज छोटी दिवाली यानी कि नरक चतुर्दशी है, जिसे कि यम चतुर्दशी और रूप चतुर्दशी या रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। आज के दिन जो भी इंसान तिल का तेल लगाकर स्नान करता है वो पुण्य का भागीदार बनता है, उसे यमराज की व‍िशेष कृपा म‍िलती है और उसके सारे पाप नष्‍ट हो जाते हैं। स्‍नान के बाद सुबह-सवेरे राधा-कृष्‍ण के मंदिर में जाकर दर्शन करने से पापों का नाश होता है और रूप-सौन्‍दर्य की प्राप्ति होती है यही नहीं माना जाता है कि आज के दिन बजरंग-बली का जन्मदिन हुआ था इसलिए आज के दिन संकट-मोचन की खास पूजा की जाती है। आज के दिन लोग शाम को यमराज के नाम का दीपक भी जलाते हैं।

यम दीपदान का पूजन

यम दीपदान का पूजन

यम दीपदान का पूजन का मुहूर्त शाम 6 से शाम 7 बजे तक रहेगा। यम दीपदान के लिए चार बत्ती वाला मिट्टी का दीपक घर के मुख्य द्वार पर रखना चाहिए।

कथा

कथा

रन्ति देव नामक एक पुण्यात्मा और धर्मात्मा राजा थे। उन्होंने अनजाने में भी कोई पाप नहीं किया था लेकिन जब मृत्यु का समय आया तो उनके सामने यमदूत आ खड़े हुए। यमदूत को सामने देख राजा अचंभित हुए और बोले मैंने तो कभी कोई पाप कर्म नहीं किया फिर आप लोग मुझे लेने क्यों आए हो क्योंकि आपके यहां आने का मतलब है कि मुझे नर्क जाना होगा। आप मुझ पर कृपा करें और बताएं कि मेरे किस अपराध के कारण मुझे नरक जाना पड़ रहा है। पुण्यात्मा राजा की अनुनय भरी वाणी सुनकर यमदूत ने कहा हे राजन् एक बार आपके द्वार से एक भूखा ब्राह्मण लौट गया यह उसी पापकर्म का फल है।दूतों की इस प्रकार कहने पर राजा ने यमदूतों से कहा कि मैं आपसे विनती करता हूं कि मुझे वर्ष का और समय दे दे।

एक वर्ष की मोहलत

एक वर्ष की मोहलत

यमदूतों ने राजा को एक वर्ष की मोहलत दे दी। राजा अपनी परेशानी लेकर ऋषियों के पास पहुंचा और उन्हें सब वृतान्त कहकर उनसे पूछा कि कृपया इस पाप से मुक्ति का क्या उपाय है। ऋषि बोले हे राजन् आप कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी का व्रत करें और ब्रह्मणों को भोजन करवा कर उनसे अनके प्रति हुए अपने अपराधों के लिए क्षमा याचना करें। राजा ने वैसा ही किया जैसा ऋषियों ने उन्हें बताया। इस प्रकार राजा पाप मुक्त हुए और उन्हें विष्णु लोक में स्थान प्राप्त हुआ।

पाप और नर्क से मुक्ति

पाप और नर्क से मुक्ति

उस दिन से पाप और नर्क से मुक्ति हेतु भूलोक में कार्तिक चतुर्दशी के दिन का व्रत प्रचलित है। इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर तेल लगाकर और पानी में चिरचिरी के पत्ते डालकर उससे स्नान करने का बड़ा महात्मय है। स्नान के पश्चात विष्णु मंदिर और कृष्ण मंदिर में भगवान का दर्शन करना अत्यंत पुण्यदायक कहा गया है। इससे पाप कटता है और रूप सौन्दर्य की प्राप्ति होती है।

छोटी दीपावली

छोटी दीपावली

नरक चतुर्दशी को छोटी दीपावली भी कहते हैं। इसे छोटी दीपावली इसलिए कहा जाता है क्योंकि दीपावली से एक दिन पहले, रात के वक्त उसी प्रकार दीए की रोशनी से रात के तिमिर को प्रकाश पुंज से दूर भगा दिया जाता है जैसे दीपावली की रात को। इस रात दीए जलाने की प्रथा के संदर्भ में कई पौराणिक कथाएं और लोकमान्यताएं हैं। एक कथा के अनुसार आज के दिन ही भगवान श्री कृष्ण ने अत्याचारी और दुराचारी नरकासुर का वध किया था और सोलह हजार एक सौ कन्याओं को नरकासुर के बंदी गृह से मुक्त कर उन्हें सम्मान प्रदान किया था। इस उपलक्ष में दीएं जलाए जाते हैं।

Narak Chaturdashi: पितरों को प्रसन्न करता है नरक चतुर्दशी पर चारमुखी दीपक जलाना | Boldsky

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English summary
Naraka Chaturdashi, also known as Choti Diwali, Naraka Nivaran Chaturdashi, Roop Chaudas and Kali Chaudas, is celebrated on the second day of the five-day Diwali festival.

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