Japan Princess: जापान जो खुद को रूढ़िवादी और मॉर्डन देश के तौर पर पेश करता है उस पर अब महिला विरोधी होने की बातें चल रही हैं। वजह है सत्ता की गद्दी एक महिला को सौंपने से बचना। दरअसल जापान की संसद ने शुक्रवार को शाही उत्तराधिकार कानून में कुछ बदलाव किए हैं, लेकिन जनता के सपोर्ट के बावजूद महिलाओं के सम्राट बनने पर लगा बैन नहीं हटाया। जापान के शाही परिवार का भविष्य फिलहाल 19 साल के प्रिंस हिसाहितो पर टिका है, जो मौजूदा सम्राट नारुहितो के भतीजे हैं। हिसाहितो अभी बायोलॉजी की पढ़ाई कर रहे हैं। अगर भविषय में उनका कोई बेटा नहीं होता है, तो मौजूदा नियमों के तहत उनका कोई वारिस नहीं होगा और यह वंश आगे नहीं बढ़ पाएगा।
कानून ने अड़चन और खतरे में महिलाओं की राजगद्दी
इतिहास के मुताबिक जापान के सिंहासन पर आठ महिला सम्राट बैठ चुकी हैं। दूसरे विश्व युद्ध के बाद शाही परिवार का दर्जा बदला गया। इसके बाद 1889 के शाही घराने के कानून में तय किया गया कि केवल पुरुष ही राजा बन सकते हैं, वह भी केवल पिता के वंश से। इसी नियम को 1947 के मौजू़दा इंपीरियल हाउसहोल्ड लॉ में भी शामिल किया गया। इस नियम की वजह से सम्राट नारुहितो की 24 साल की बेटी, प्रिंसेस आईको या कोई भी अन्य महिला कभी सम्राट नहीं बन सकती।
जापानी संसद के ऊपरी सदन द्वारा पास किए गए नए बिल के मुताबिक, शाही परिवार से बाहर के 15 साल से अधिक उम्र के दूर के अविवाहित पुरुष रिश्तेदारों को गोद लिया जा सकता है, ताकि उनके भविष्य के बेटे सिंहासन के हकदार बन सकें। ये पुरुष उन 11 परिवारों के सदस्य हैं जिन्होंने दूसरे विश्व युद्ध में जापान की हार के बाद शाही रजिस्टर छोड़ िदया था। इंपीरियल हाउसहोल्ड एजेंसी के अनुसार, इन परिवारों और मौजूदा सम्राट के पूर्वज 15वीं सदी के हैं, जो रिश्तेदारी में '36 से 38 डिग्री' दूर हैं। नए नियमों में एक प्रावधान यह है कि अब शाही महिलाओं की आम लोगों से शादी होने पर उनका रॉयल स्टेटस नहीं छीनेगा, हालांकि उनके बच्चे सम्राट नहीं बन पाएंगे। उदाहरण के लिए, 2021 में प्रिंस हिसाहितो की बड़ी बहन प्रिंसेस माको ने शादी कर ऑफिशियली शाही परिवार छोड़ दिया था। पिछले महीने मैनीची शिम्बुन द्वारा किए गए एक पोल में पाया गया कि केवल 23% लोग गोद लिए गए सदस्यों के बेटों को सम्राट बनाने के पक्ष में थे, जबकि 34% इसके खिलाफ थे। इसके उलट, 70% से अधिक लोगों ने महिला सम्राट का समर्थन किया। मई में जापान के सबसे फेमस अखबार असाही शिम्बुन के एक पोल में भी 72% लोग महिलाओं को सिंहासन सौंपने के पक्ष में थे। वर्तमान में शाही पिरवार में कुल 16 सदस्य हैं, जिनमें केवल पांच पुरुष हैं (92 वर्ष के रिटायर्ड सम्राट अकिहितो, उनके 90 वर्षीय भाई, 66 साल के मौजूदा सम्राट, उनके भाई और 19 साल के हिसाहितो)। नागोया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर हिदेया कावानिशी ने एएफपी से कहा कि यह बिल जनता की राय के मुताबिक नहीं है। रूढ़िवादी खेमा केवल पुरुष-वंश को बचाना चाहता है ताकि उनका पारंपिरक वोट बैंक सुरक्षित रहे, लेकिन इससे इस व्यवस्था के लिए जनता का सपोर्ट कम हो सकता है। इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।रिश्तेदारों को लेकर क्या कहता है जापान का कानून?
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