BrahMos Missile Cost: एक ब्रह्मोस दागने का कितना आता है खर्च? कहां-कहां से चल सकती है ये मिसाइल?

BrahMos Missile Cost: भारत की ब्रह्मोस (BrahMos) मिसाइल दुनिया की सबसे तेज़ ऑपरेशनल सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलों में गिनी जाती है। इसे भारत और रूस के संयुक्त उपक्रम BrahMos Aerospace ने विकसित किया है। यह मिसाइल थल, जल, वायु और पनडुब्बी चारों प्लेटफॉर्म से लॉन्च की जा सकती है। हाल के सालों में ब्रह्मोस की मारक क्षमता, रेंज और निर्यात कैपेसिटी लगातार बढ़ी है। यहां तक कि अब तक कई देश हैं जो भारत से ब्रह्मोस खरीदने के लिए पक्की डील कर चुके हैं। जिसमें साइप्रस सबसे आगे रहा।

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ब्रह्मोस कैसे काम करती है?

ब्रह्मोस दो भागों में काम करती है। पहले भाग में सॉलिड रॉकेट बूस्टर मिसाइल को तेज़ गति से आगे बढ़ाता है। इसके बाद दूसरा भाग शुरू होता है, जिसमें लिक्विड-फ्यूल रैमजेट इंजन सक्रिय हो जाता है। यही इंजन मिसाइल को लगभग मैक 2.8 से 3 (ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना ज्यादा) की रफ्तार देता है। मिसाइल अपने टारगेट तक बहुत कम ऊंचाई पर उड़ सकती है, जिससे दुश्मन के रडार के लिए इसे पकड़ना मुश्किल हो जाता है। इसके आखिरी भाग में इसका गाइडेंस सिस्टम टारगेट को बेहद सटीकता से भेदता है।

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ब्रह्मोस कैसे बनती है?

ब्रह्मोस का निर्माण भारत और रूस के टेक्नोलॉजी सहयोग से होता है। जिसमें रूस मुख्य रूप से रैमजेट इंजन और प्रोपल्शन सिस्टम मुहैया कराता है। वहीं, भारत फायर कंट्रोल सिस्टम, गाइडेंस सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक्स, एवियोनिक्स, एयरफ्रेम और कई अन्य महत्वपूर्ण हिस्से बनाता करता है। ब्रह्मोस एयरोस्पेस डिजाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग, टेस्टिंग, अपग्रेड और एक्सपोर्ट तक पूरा प्रोसेस संभालती है। मेक इन इंडिया के तहत इसमें भारतीय उद्योगों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।

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एक रुपए की पड़ती है एक ब्रह्मोस मिसाइल?

सरकार ने यूं तो कभी मिसाइल की आधिकारिक कीमत पब्लिक डोमेन में नहीं बताई। हालांकि उपलब्ध सरकार द्वारा दूसरे देशों से हुई इसे एक्सपोर्ट करने की डीलों और डिफेंस एक्सपर्ट के बयानों से एक अंदाजा लगाया जा सकता है। सितंबर 2022 में रक्षा मंत्रालय ने 1,700 करोड़ रुपये का एक कॉन्ट्रेक्ट ब्रह्मोस एयरोस्पेस के साथ किया था। हालांकि आधिकारिक जानकारी में मिसाइलों की संख्या नहीं बताई गई।

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बाद में DRDO द्वारा जारी की गई जानकारी में बताया गया कि इस कॉन्ट्रैक्ट में 35 कॉम्बैट और 3 प्रैक्टिस मिसाइलें (कुल 38) शामिल थीं। इसमें लगभग 400 करोड़ रुपये लॉन्चर, कमांड सेंटर और रडार पर खर्च हुए, जबकि शेष करीब 1,300 करोड़ रुपये 38 मिसाइलों के लिए थे। इस हिसाब से अगर गणित को समझें तो एक अनुमानित कीमत पता चल जाएगी। क्योंकि जब 1300 करोड़ रुपये में 38 मिसाइलें आईं तो इस हिसाब से एक मिसाइल 34.2 करोड़ की पड़ी। जिसमें टैक्स और बाकी सारे खर्चे भी जोड़े लें तो। इस हिसाब से एक ब्रह्मोस मिसाइल दागने की केवल मिसाइल लागत लगभग 34 करोड़ रुपये बैठती है।

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क्या यही अंतिम खर्च है?

इस सवाल का जवाब है, नहीं। यदि एक मिसाइल दागने की कुल ऑपरेशनल लागत की बात करें, तो इसमें कुछ और खर्च भी शामिल होते हैं, जैसे- मिसाइल की कीमत, लॉन्च प्लेटफॉर्म (जहाज, ट्रक या विमान) का संचालन, ईंधन, क्रू और टैक्निकल स्टाफ और लॉजिस्टिक्स आदि। अगर इन सभी को मिला लें तो ये कीमत और ज्यादा बढ़ जाएगी।

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फिलहाल ब्रह्मोस भारत का स्वाभिमान है और जब दूसरे देश इसे खरीदने की इच्छा जताते हैं तो हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है।

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English Summary

BrahMos Missile Cost: How Much Does One BrahMos Missile Cost? Here's the Real Calculation