मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को टिकट न देकर पूर्व संभागीय संगठन मंत्री आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया। इसके बाद दतिया में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। कई जगह बाजार बंद रहे, हाईवे जाम किया गया, टायर जलाए गए और पार्टी के खिलाफ नारेबाजी भी हुई।
सबसे बड़ा झटका तब लगा, जब भाजपा के जिला अध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाह ने बड़ी संख्या में पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ सामूहिक इस्तीफे की घोषणा कर दी। इससे साफ हो गया कि दतिया में टिकट बदलने का फैसला संगठन के एक बड़े वर्ग को स्वीकार नहीं है। ऐसे में आइए जानते हैं कि कौन हैं आशुतोष तिवारी और क्यों उनके टिकट देने का हो रहा है विरोध।
आशुतोष तिवारी मूल रूप से दतिया जिले की भांडेर तहसील के पिपरौआ गांव के रहने वाले हैं। वे बीजेपी के बहुत पुराने और सक्रिय कार्यकर्ता हैं। आशुतोष तिवारी साल 2004 में ग्राम भारती के जिला अध्यक्ष बने थे। इसके बाद 2006 में उन्हें जिला संगठन मंत्री और बाद में संभागीय संगठन मंत्री की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई। साल 2020 में शिवराज सरकार के दौरान उन्हें मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड का अध्यक्ष (चेयरमैन) बनाया गया था, जहां उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा हासिल था। साल 2023 के मुख्य विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने सेवढ़ा सीट से दावेदारी पेश की थी, लेकिन तब पार्टी ने उनकी जगह प्रदीप अग्रवाल को मैदान में उतारा था। दतिया सीट कभी बीजेपी का मजबूत गढ़ मानी जाती थी और डॉ. नरोत्तम मिश्रा यहां लगातार जीत दर्ज करते रहे थे। लेकिन 2023 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार राजेंद्र भारती ने उन्हें करीब 7 हजार वोटों से हराकर बड़ा उलटफेर कर दिया। यह हार बीजेपी के लिए बड़ा झटका थी। सूत्रों के मुताबिक, इसी हार के बाद पार्टी ने संगठन से मिले फीडबैक और आंतरिक सर्वे की समीक्षा की। माना जा रहा है कि इन्हीं रिपोर्टों के आधार पर इस बार नया चेहरा उतारने का फैसला लिया गया। इसी रणनीति के तहत आशुतोष तिवारी को टिकट दिया गया। दतिया में बीजेपी का बड़ा वर्ग मानता है कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा पिछले कई वर्षों से लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं और उपचुनाव की तैयारी भी कर रहे थे। ऐसे में आखिरी समय पर उम्मीदवार बदलने का फैसला कार्यकर्ताओं को रास नहीं आया। सड़कों पर उतरे कार्यकर्ताओं का कहना है कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने पिछले 15 सालों से दिन-रात एक करके दतिया का विकास किया है। वे पिछले तीन वर्षों से इस उपचुनाव की तैयारियों में लगे हुए थे। विरोध स्थल पर मौजूद समर्थकों ने खुले शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि आशुतोष तिवारी को दतिया की जनता और यहां के जमीनी कार्यकर्ता ठीक से पहचानते तक नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अभी तो सिर्फ 5% कार्यकर्ता सड़कों पर आए हैं, अगर सब बाहर आ गए तो पूरा संभाग ठप हो जाएगा। समर्थकों का कहना है कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा, तब तक हाईवे का जाम नहीं खुलेगा। उन्होंने मांग की है कि जिस तरह बीजेपी ने बिहार के चुनावों में आखिरी वक्त पर सूझबूझ दिखाते हुए अपने फैसले बदले थे, ठीक वैसे ही दतिया में भी टिकट बदला जाए। दतिया के एडिशनल एसपी मंजीत सिंह चावला ने बताया कि जिले में छह से ज्यादा जगहों पर उग्र प्रदर्शन चल रहे हैं। इन विरोध प्रदर्शनों में करीब 150 से ज्यादा सक्रिय लोग शामिल हैं, जो सड़कों पर उतर आए हैं। हालात की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस मुख्यालय (PHQ) से अतिरिक्त पुलिस बल भेजने की मांग की गई है, जो बहुत जल्द जिले में पहुंच जाएगा। फिलहाल पुलिस के आला अधिकारी प्रदर्शनकारियों से लगातार बातचीत करके स्थिति को काबू में करने की कोशिशों में जुटे हैं। टिकट की घोषणा से नाराज भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाह ने अपने पद से सामूहिक इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र सीधे प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को भेजा है। कुशवाह ने इस फैसले को एकतरफा और कार्यकर्ताओं की घोर उपेक्षा बताया है। उन्होंने अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि अगर पार्टी ने अगले 24 घंटे के भीतर आशुतोष तिवारी का टिकट बदलकर डॉ. नरोत्तम मिश्रा को उम्मीदवार नहीं बनाया, तो वे अपने पूरे कुनबे के साथ पार्टी की प्राथमिक सदस्यता भी छोड़ देंगे। इस इस्तीफे में जिला पंचायत अध्यक्ष, जनपद अध्यक्ष, नगर पालिका दतिया के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष, बड़ौनी पंचायत के पदाधिकारी, दतिया के सभी पार्षद और दतिया विधानसभा के सभी 6 मंडलों के अध्यक्षों समेत 281 बूथों की कार्यकारिणी शामिल है। दतिया विधानसभा सीट पर इस उपचुनाव की नौबत कांग्रेस के मौजूदा विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता रद्द होने की वजह से आई है। कोऑपरेटिव बैंक में धोखाधड़ी से जुड़े एक बहुत पुराने क्रिमिनल केस में दिल्ली की एक अदालत ने राजेंद्र भारती को दोषी पाते हुए 3 साल की जेल की सजा सुनाई थी। सुप्रीम कोर्ट के कड़े दिशा-निर्देशों के तहत, जैसे ही किसी जन प्रतिनिधि को 2 साल या उससे ज्यादा की सजा होती है, उसकी सदस्यता खत्म हो जाती है। इसी नियम के तहत मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने तुरंत राजेंद्र भारती की विधायकी रद्द कर दी थी।कौन हैं आशुतोष तिवारी? (Who is Ashutosh Tiwari)
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नरोत्तम मिश्रा का क्यों कटा टिकट?
टिकट मिलते ही क्यों शुरू हुआ विरोध?
प्रशासन ने क्या कहा?
जिला अध्यक्ष ने क्या लिखा इस्तीफे में?
क्यों हो रहा है दतिया सीट पर उपचुनाव?