भारत के पहले प्राइवेट रॉकेट 'Vikram-1' ने रचा इतिहास, अपने साथ क्यों ले गया सोना, हीरा और मूर्तियां?

Vikram-1: भारत ने स्पेस सेक्टर में एक नया स्वर्णिम अध्याय लिख दिया। हैदराबाद के स्टार्टअप स्काईरूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace) का विक्रम-1 रॉकेट आसमान का सीना चीरते हुए अंतरिक्ष के लिए रवाना हो गया। यह भारत का पहला ऐसा प्राइवेट रॉकेट है, जिसने ऑर्बिटल मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। 18 जुलाई 12 बजकर 5 मिनट पर रॉकेट ने अपनी तय कक्षा में पेलोड्स को स्थापित किया, तो मिशन कंट्रोल रूम में खुशी की लहर दौड़ गई और वहां एक ही आवाज गूंजी, "हेलो स्पेस, हम आ चुके हैं।"

Advertisement

इस ऐतिहासिक मिशन को 'आगमन' (Aagaman) नाम दिया गया है। इसकी सफलता के साथ ही भारत अब उन चुनिंदा देशों के क्लब में शामिल हो गया है, जहां निजी कंपनियां भी अंतरिक्ष में रॉकेट भेज रही हैं। साल 2020 में भारत सरकार ने जब से निजी कंपनियों के लिए स्पेस के दरवाजे खोले हैं, तब से यह देश की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक छलांग है। ऐसे में आइए जानते हैं इस मिशन से जुड़ी हर खास और बड़ी बातें।

Advertisement

ISRO में वैज्ञानिकों के इस्तीफे से सरकार चिंतित, बदल गए रेजिग्नेशन के नियम,अब आसानी से नहीं छोड़ सकेंगे नौकरी

पीएम मोदी ने विक्रम-1 रॉकेट की पहली उड़ान पर क्या कहा?

इस मिशन की शुरुआत में एक समय ऐसा भी आया जब वैज्ञानिकों की सांसें अटक गईं। तय समय यानी सुबह 11:30 बजे से ठीक कुछ मिनट पहले तकनीकी वजहों से लॉन्चिंग को थोड़ी देर के लिए रोक दिया गया था। लेकिन स्काईरूट की युवा टीम ने सूझबूझ दिखाई और 12:21 बजे मिशन के पूरी तरह सफल होने का एलान कर दिया गया।

Advertisement

इस कामयाबी के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्काईरूट के सीईओ पवन कुमार चंदना को फोन मिलाकर पूरी टीम को बधाई दी। बातचीत के दौरान पवन कुमार चंदना ने एक बेहद दिलचस्प जानकारी दी कि इस पूरे मिशन को अंजाम देने वाली टीम की औसत उम्र सिर्फ 28 साल है।

इस ऐतिहासिक कामयाबी पर बधाई देते हुए देश के पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा,

Advertisement

"आपकी इस युवा टीम ने देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। आपने न सिर्फ अंतरिक्ष में भारत की उम्मीदों को नई उड़ान दी है, बल्कि देश के युवाओं के सपनों को भी नई जड़ें दी हैं। मुझे भारत के युवाओं की काबिलियत पर जो भरोसा था, उसे आपकी टीम ने सच साबित कर दिखाया है।"

रॉकेट पर छपे हैं इंजीनियरों के नाम और PM मोदी का खास संदेश

विक्रम-1 रॉकेट अपने साथ सिर्फ तकनीक ही नहीं, बल्कि एक बेहद भावुक संदेश भी लेकर गया है। स्काईरूट के सीईओ ने पीएम मोदी को बताया कि रॉकेट के साथ एक विशेष पोस्टकार्ड भेजा गया है, जिस पर खुद पीएम मोदी ने अपने हाथों से "वंदे मातरम" लिखा है। यानी अब अंतरिक्ष में भी भारत का यह नारा गूंज रहा है। इसके साथ ही दुनिया भर के लोगों की शुभकामनाओं वाले सैकड़ों कार्ड भी इस सफर का हिस्सा बने हैं।

Advertisement

इस मिशन की एक और सबसे खूबसूरत बात यह है कि विक्रम-1 को बनाने में जिन इंजीनियरों, तकनीशियनों और टीम के साथियों ने रात-दिन एक किया, उन सभी के हस्ताक्षर (Signatures) इस रॉकेट की बॉडी पर अंकित किए गए थे। यह उन सभी लोगों की मेहनत को सम्मान देने का एक अनोखा तरीका था।

विक्रम-1 अंतरिक्ष अपने साथ क्या लेकर पहुंचा?

इस मिशन का सबसे भावुक हिस्सा वह पेलोड है जो भारत के महान सपूतों को समर्पित है। विक्रम-1 अपने साथ 18 कैरेट सोने से बना एक नन्हा सा रॉकेट लेकर गया है। इस सोने के रॉकेट के अंदर भारत के तीन महान वैज्ञानिकों की बेहद बारीक और छोटी प्रतिमाएं (Micro-Sculptures) रखी गई हैं। इनमें शामिल हैं...।

Advertisement
  • भारत के मिसाइल मैन डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम
  • भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई
  • नोबेल पुरस्कार विजेता भौतिक विज्ञानी डॉ. सी.वी. रमन

इन तीनों महापुरुषों की मूर्तियों को अंतरिक्ष में भेजना भारत के वैज्ञानिक इतिहास को एक बड़ी श्रद्धांजलि है, जो आने वाली पीढ़ी को हमेशा प्रेरित करती रहेगी।

लैब में बना हीरा और स्पेस का कचरा साफ करने वाला रोबोट

विक्रम-1 अपने साथ 6 खास पेलोड लेकर गया है, जो विज्ञान, कला और पर्यावरण सुरक्षा का बेहतरीन कॉम्बिनेशन हैं। यह कॉस्मॉस डायमंड्स की बनाई एक कलाकृति है, जिसके तहत लैब में तैयार किए गए एक खास हीरे को अंतरिक्ष में भेजा गया है। इसे कला और विज्ञान को एक मंच पर लाने का एक अनोखा प्रयोग माना जा रहा है।

भारतीय स्टार्टअप कॉस्मोसर्व स्पेस का यह पेलोड बेहद क्रांतिकारी है। यह अंतरिक्ष में ऐसे रोबोटिक सिस्टम की जांच करेगा, जो भविष्य में स्पेस में तैर रहे बेकार सैटेलाइटों और रॉकेटों के मलबे को साफ कर सके। पृथ्वी की कक्षा में घूम रहा यह कचरा दूसरे सैटेलाइटों के लिए बड़ा खतरा है।

ग्रह स्पेस का यह छोटा सैटेलाइट कम बजट में स्पेस रिसर्च की क्षमता को साबित करने के लिए भेजा गया है। अंतरराष्ट्रीय पेलोड के तौर पर जर्मनी का यह पेलोड नई स्पेस टेक्नोलॉजी की टेस्टिंग के लिए भेजा गया है, जो भविष्य के वैश्विक मिशनों में काम आएगा। यह स्काईरूट का अपना खुद का एक्सपेरिमेंटल पेलोड है, जो आने वाले समय में इनके रॉकेटों को और ज्यादा एडवांस बनाने के लिए डेटा जुटाएगा।

कार्बन फाइबर बॉडी और 3D प्रिंटेड इंजन की ताकत

अगर तकनीक की बात करें तो विक्रम-1 किसी अजूबे से कम नहीं है। यह सात मंजिला ऊंची इमारत जितना बड़ा रॉकेट है, जिसे पूरी तरह से ऑल-कार्बन कंपोजिट स्ट्रक्चर से तैयार किया गया है। इसका मतलब यह है कि यह वजन में बेहद हल्का और मजबूती में स्टील से भी कई गुना ज्यादा ताकतवर है।

इस रॉकेट में स्काईरूट के खुद के बनाए प्रोपल्शन सिस्टम का इस्तेमाल हुआ है, जिसमें सबसे आधुनिक 3D-प्रिंटेड इंजन और बेहद ताकतवर सॉलिड-फ्यूल बूस्टर लगे हैं। यह रॉकेट छोटे सैटेलाइट्स को लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में भेजने के लिए एकदम सटीक है।

इसकी क्षमता 350 से 480 किलोग्राम तक के पेलोड को अंतरिक्ष में पहुंचाने की है। अपनी पहली टेस्ट फ्लाइट में इसने 450 किलोमीटर की ऊंचाई वाली कक्षा में 60-डिग्री के झुकाव पर पेलोड्स को सफलतापूर्वक स्थापित कर अपनी ताकत का लोहा मनवा दिया है। नवंबर 2022 में स्काईरूट ने अपने 'विक्रम-एस' सबऑर्बिटल रॉकेट की सफल टेस्टिंग की थी, जिसके बाद यह उनका अगला और सबसे बड़ा कदम है।

English Summary

Skyroot Aerospace Vikram-1 rocket launch historic private space mission india