'25,000 शवों के सबूत दीजिए,अगर सच निकला तो माफी मांगूंगा', सतलुज की टीम को मोदी के मंत्री ने दिया ओपन चैलेंज!

Ravneet Singh Bittu on Satluj: फिल्म 'सतलुज' को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब इस मामले में मोदी कैबिनेट के केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू भी खुलकर सामने आ गए हैं। उन्होंने फिल्म के निर्माता और निर्देशक को सार्वजनिक चुनौती देते हुए कहा है कि अगर फिल्म में 25 हजार लोगों के लापता होने और गैर-कानूनी अंतिम संस्कार जैसे दावे किए गए हैं, तो उनके समर्थन में सरकारी रिकॉर्ड, न्यायिक दस्तावेज और सत्यापित सबूत भी सामने रखे जाएं। उन्होंने ये भी कहा कि अगर वे डेटा को ऑथेंटिकेट करते हैं तो वे सबके सामने माफी मांगेंगे।

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यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित बताई जाती है। खालड़ा ने 1984 से 1994 के बीच पंजाब में अज्ञात शवों के कथित गैर-कानूनी अंतिम संस्कार के मामलों को उठाया था। सितंबर 1995 में अमृतसर स्थित उनके घर के बाहर से उनका अपहरण हुआ था। बाद में उनकी हत्या की पुष्टि हुई, लेकिन उनका शव कभी बरामद नहीं हुआ।

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फिल्म पहले 'पंजाब 95' नाम से बनाई गई थी। बाद में इसका नाम बदलकर 'सतलुज' रखा गया। रिलीज के दो दिन बाद ही इसे भारत में ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 से हटा दिया गया। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं का हवाला दिया था

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केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह की खुली चुनौती- '25,000 शवों के सबूत दीजिए,रिकॉर्ड दिखाए'

रेल राज्य मंत्री और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा कि क्रिएटिव फ्रीडम का मतलब यह नहीं है कि विवादित दावों को ऐतिहासिक सच की तरह पेश किया जाए। उन्होंने कहा कि अगर फिल्म में 25 हजार लोगों के लापता होने का आंकड़ा दिखाया गया है, तो इसके पीछे मौजूद सभी आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक किए जाने चाहिए। बिट्टू ने सवाल उठाया कि अगर यह संख्या केवल एक अनुमान या आरोप है, तो इसे अंतिम और स्थापित ऐतिहासिक तथ्य की तरह क्यों दिखाया गया। उनका कहना है कि दर्शकों को यह भी बताया जाना चाहिए कि क्या इस आंकड़े की पुष्टि किसी अंतिम न्यायिक फैसले में हुई है या नहीं।

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एक्स पोस्ट में रवनीत सिंह बिट्टू ने लिखा,

''मैं सतलुज के प्रोड्यूसर और डायरेक्टर को चुनौती देता हूं कि वे पंजाब के लोगों के सामने फिल्म में दिखाए गए 25,000 लापता या गैर-कानूनी तरीके से जलाए गए शवों के पूरे डॉक्यूमेंट्री सबूत, ऑफिशियल रिकॉर्ड, कोर्ट के फैसले और ऑथेंटिकेटेड डेटा पेश करें, नहीं तो हम अगला कदम उठाएंगे। अगर वे डेटा को ऑथेंटिकेट करते हैं तो मैं सबके सामने माफी मांगूंगा।''

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उन्होंने आगे कहा,

''सतलुज के मेकर्स विवादित दावों को स्थापित इतिहास के तौर पर पेश करते हुए "क्रिएटिव फ्रीडम" के बहाने के पीछे नहीं छिप सकते। पंजाब का दर्दनाक अतीत कोई स्क्रिप्ट नहीं है जिसे किसी कहानी के हिसाब से चुनकर एडिट किया जाए। पंजाब के सबसे काले चैप्टर को चुनिंदा तरीके से दिखाने के लिए, आपको पंजाब के लोगों को जवाब भी देना होगा। आतंकवादियों द्वारा बेरहमी से मारे गए बेगुनाह हिंदुओं, बस यात्रियों, दुकानदारों, सरकारी कर्मचारियों, मजदूरों और आम नागरिकों के नरसंहार को उतनी ही तेजी से क्यों नहीं दिखाया जाता? पंजाब पुलिस के जवानों, सुरक्षा बलों और आतंकवाद से लड़ने वाले अनगिनत बहादुर नागरिकों के बड़े बलिदान को कम क्यों दिखाया गया? आतंकवादी हिंसा से तबाह हुए हजारों परिवारों को कहानी से लगभग गायब क्यों कर दिया गया? इतिहास के एक पहलू को क्यों बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया जबकि हजारों दूसरे पीड़ितों की तकलीफों को किनारे कर दिया गया? आरोपों, अनुमानों और आधिकारिक तौर पर स्थापित तथ्यों के बीच साफ अंतर किए बिना विवादित दावे क्यों पेश किए गए?''

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रवनीत सिंह बोले- 'विवादित आंकड़ों को सच की तरह दिखाने का अधिकार किसी का नहीं है'

केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा,

''किसी भी जिम्मेदार फिल्ममेकर को विवादित आंकड़ों को बिना सवाल वाले सच के तौर पर पेश करके इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने का अधिकार नहीं है। आतंकवाद के सालों में पंजाब ने बहुत बड़ी कीमत चुकाई है। हर बेगुनाह पीड़ित न्याय और याद का हकदार है, चाहे उसका धर्म, समुदाय या विचारधारा कुछ भी हो। मैं सतलुज के मेकर्स से अपील करता हूं कि वे 25,000 के आंकड़े के आधार पर डॉक्यूमेंट्री को सही समय के अंदर पब्लिक में जारी करें। अगर वे इस दावे को भरोसेमंद और वेरिफाई किए जा सकने वाले सबूतों से साबित नहीं कर पाते हैं, तो उन्हें पंजाब के लोगों को यह साफ-साफ बताना होगा कि यह आंकड़ा ऑफिशियली वेरिफाइड गिनती नहीं है। हम सभी जरूरी कानूनी और संवैधानिक तरीकों की जांच करेंगे ताकि यह पक्का हो सके कि देश के सामने ऐतिहासिक तथ्यों को गलत तरीके से पेश न किया जाए। पंजाब का इतिहास सिर्फ चुनिंदा कहानियों से दोबारा नहीं लिखा जा सकता। प्रोपेगैंडा पर सच्चाई, मनगढ़ंत कहानियों पर तथ्य और भावनाओं पर सबूत की जीत होनी चाहिए।''

सिख संगठनों ने क्या कहा?

केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का यह बयान ऐसे समय आया है, जब शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (SGPC), शिरोमणि अकाली दल (SAD) और कई सिख संगठनों ने फिल्म हटाए जाने का विरोध किया है। इन संगठनों का कहना है कि फिल्म पंजाब के एक कठिन दौर को सामने लाने की कोशिश करती है और इतिहास से जुड़े सवालों पर खुली चर्चा होनी चाहिए।

केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का कहना है कि पंजाब के इतिहास को एकतरफा नजरिए से नहीं दिखाया जा सकता। उन्होंने पूछा कि आतंकवाद के दौर में जान गंवाने वाले पंजाब पुलिस के जवानों, सुरक्षा बलों और आम नागरिकों की कहानी को पर्याप्त जगह क्यों नहीं दी गई।

खालड़ा केस में अदालत का फैसला क्या रहा?

जसवंत सिंह खालड़ा अपहरण और हत्या मामले में 2005 में सीबीआई की विशेष अदालत ने पूर्व डीएसपी जसपाल सिंह और एएसआई अमरजीत सिंह को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। चार अन्य पुलिसकर्मियों को भी दोषी ठहराया गया था। बाद में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने फैसले में बदलाव किया और 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।

अब फिल्म 'सतलुज' को लेकर बहस सिर्फ एक सिनेमाई प्रस्तुति तक सीमित नहीं रही है। एक तरफ अभिव्यक्ति की आजादी और ऐतिहासिक घटनाओं को दिखाने का सवाल है, तो दूसरी तरफ तथ्यों की सत्यता और संवेदनशील इतिहास को किस तरह पेश किया जाए, इस पर भी चर्चा तेज हो गई है।

English Summary

Ravneet Singh Bittu challenge Satluj team prove 25,000 missing or illegally cremated bodies jaswant singh khalra