अयोध्या के राम मंदिर में भक्तों के चढ़ावे और चंदे में हेराफेरी के आरोपों ने देश की राजनीति को गरमा दिया है। संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सवाल उठाए हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने रविवार (19 जुलाई) को पीएम मोदी को एक साझा चिट्ठी भेजी है।
इस पत्र में दोनों नेताओं ने चंदे की कथित चोरी पर पीएम मोदी की चुप्पी पर कड़े सवाल उठाए हैं। दूसरी तरफ यह पूरा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे पर भी पहुंच गया है।
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने साझा पत्र में पीएम मोदी को उनकी जिम्मेदारी याद दिलाई है। दोनों नेताओं ने साफ शब्दों में लिखा कि इतने बड़े मामले पर देश के मुखिया का शांत रहना ठीक नहीं है। उन्होंने पत्र में लिखा, "इस तरह के अपराध के सामने आपकी चुप्पी को स्वीकार नहीं किया जा सकता। यह आपका फर्ज है कि आप इस मामले में जवाबदेही तय करें और नुकसान की भरपाई कराएं। ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय पर भी गंभीर आरोप हैं और वह आपके करीबी रहे हैं।" दोनों विपक्षी नेताओं ने मांग की है कि 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' के पूरे वित्तीय कामकाज की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए। भक्तों द्वारा दान में दिए गए कैश, सोने और चांदी की हैंडलिंग की जांच हो और ट्रस्ट के खातों को आम जनता के सामने रखा जाए। ताकि हर रामभक्त को पता चल सके कि उनके चढ़ावे का इस्तेमाल कहां और कैसे हुआ है। अब पढ़िए पूरा लेटर... ''माननीय प्रधानमंत्री जी, आप श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में कथित तौर पर हजारों करोड़ रुपये के दान में हुई चोरी के मामले के बारे में जानते हैं। देशभर के लाखों श्रद्धालुओं ने अपनी मेहनत की कमाई आस्था, विश्वास और श्रद्धा के साथ मंदिर में दान की थी। ऐसे में इस कथित घटना ने उनके भरोसे को गहरा झटका पहुंचाया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद आपने संसद में इस ट्रस्ट के गठन की घोषणा की थी। लेकिन ट्रस्ट के सभी सदस्यों की नियुक्ति आपकी सरकार ने की। यह भी सार्वजनिक जानकारी है कि ट्रस्ट के कई सदस्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS), विश्व हिंदू परिषद (VHP) और उससे जुड़े संगठनों से जुड़े रहे हैं। ट्रस्ट के पूर्व महासचिव, जिन पर अब सवाल उठ रहे हैं, उन्हें भी आपका करीबी माना जाता रहा है। ऐसे गंभीर मामले पर आपकी चुप्पी स्वीकार नहीं की जा सकती। यह आपकी जिम्मेदारी है कि इस मामले में जवाबदेही तय हो और श्रद्धालुओं का विश्वास बहाल किया जाए। हम आपसे गुजारिश करते हैं कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वित्तीय कामकाज की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के आदेश तुरंत दिए जाएं। इस जांच में नकद दान, सोना, चांदी और अन्य सभी प्रकार के चढ़ावे की पूरी पड़ताल होनी चाहिए। जांच पूरी होने के बाद उसकी रिपोर्ट और ट्रस्ट के खातों को सार्वजनिक किया जाए, ताकि हर श्रद्धालु यह जान सके कि उसके दान का इस्तेमाल किस तरह किया गया। जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ बिना किसी पद या प्रभाव को देखे सख्त कार्रवाई की जाए। आपकी सरकार और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की विश्वसनीयता इस बात पर निर्भर करेगी कि इस मामले में कितनी पारदर्शिता और कितनी तेजी से कदम उठाए जाते हैं। पूरे देश की नजर अब इस पर टिकी हुई है।'' इस विवाद में निर्मोही अखाड़ा की भी एंट्री हो गई है। अखाड़े ने सुप्रीम कोर्ट में एक अर्जी दाखिल कर केंद्र सरकार को राम मंदिर ट्रस्ट का ढांचा बदलने का निर्देश देने की मांग की है। अखाड़े के महंत राजा रामचंद्रचार्य अतीस गुरु रघुनाथ दास के जरिए दायर इस याचिका में कहा गया है कि मौजूदा ट्रस्ट एक 'प्राइवेट ट्रस्ट' की तरह काम कर रहा है, जो कि नवंबर 2019 के सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले की भावना के खिलाफ है। निर्मोही अखाड़ा चाहता है कि केंद्र सरकार इस ट्रस्ट को पूरी तरह से 'पब्लिक ट्रस्ट' के रूप में पुनर्गठित करे। इसके साथ ही नए नियमों में यह व्यवस्था की जाए कि 'रामानंदी बैरागी संप्रदाय' के संतों को ट्रस्ट के फैसलों की निगरानी और सुपरविजन करने का पूरा हक मिले। अखाड़े ने अपनी अर्जी में चंदे के अलावा मंदिर की धार्मिक परंपराओं को लेकर भी बड़ी मांगें रखी हैं। याचिका में कहा गया है कि अयोध्या राम मंदिर में सभी तरह की रस्में, सेवा, भोग और पूजा केवल रामानंदी संप्रदाय की स्थापित परंपराओं के मुताबिक ही होनी चाहिए, जैसा कि निर्मोही अखाड़ा इतिहास में करता आया है। इससे भी बड़ा दावा पुरानी मूर्तियों को लेकर किया गया है। निर्मोही अखाड़े ने मांग की है कि 5 जनवरी 1950 और 16 फरवरी 1982 को कुर्क की गईं श्री राम लला विराजमान की मूल मूर्तियों को वापस गर्भगृह में स्थापित किया जाए। अखाड़े का कहना है कि ट्रस्ट के पास मूल मूर्तियों को बदलने या हटाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं था। अगर ट्रस्ट ऐसा नहीं करता, तो वे मूर्तियां अखाड़े को सौंप दी जाएं ताकि उनकी ठीक से देखभाल हो सके। राम मंदिर के चंदे में कथित गबन और हेराफेरी का यह पूरा मामला अब न्यायिक प्रक्रिया के केंद्र में है। सुप्रीम कोर्ट आगामी सोमवार यानी 20 जुलाई को इस मुद्दे से जुड़ी कई अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करने जा रहा है। इन याचिकाओं में चंदे की चोरी के आरोपों की निष्पक्ष और समय सीमा के भीतर जांच कराने की गुहार लगाई गई है। ऐसे में कोर्ट का क्या रुख रहता है, इस पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।राहुल गांधी और खड़गे की चिट्ठी, बोले- 'चंदे के पाई-पाई का हिसाब देश को मिलना चाहिए'
Jitan Ram Manjhi on God: 'बेकार है भगवान का नाम, मैं नहीं करता पूजा-पाठ', जीतन राम मांझी के बयान पर बवाल
सुप्रीम कोर्ट पहुंचा निर्मोही अखाड़ा: 'प्राइवेट नहीं, पब्लिक ट्रस्ट बने'
चौथी बार भी प्रधानमंत्री मोदी बनेंगे या नहीं? राहुल गांधी का कितना है चांस? जानें पोल में क्या बोली पब्लिक
पुरानी मूर्तियां हटाने और पूजा पद्धति पर भी उठे सवाल
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई