नरोत्तम मिश्रा का BJP ने क्यों काटा टिकट? अब दतिया कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने किया खुलासा

मध्यप्रदेश के दतिया उपचुनाव ने अब पूरी तरह राजनीतिक मुकाबले का रूप ले लिया है। भारतीय जनता पार्टी ( BJP) में टिकट बदलने के बाद पैदा हुई हलचल और कांग्रेस की तरफ से राजघराने से आने वाले घनश्याम सिंह की एंट्री ने चुनाव को और दिलचस्प बना दिया है। करीब 18 साल बाद फिर चुनावी मैदान में उतरे घनश्याम सिंह अपनी जीत को लेकर पूरे भरोसे में दिख रहे हैं।

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उन्होंने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में भाजपा के अंदरूनी हालात पर सवाल उठाए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के पीछे बड़ा राजनीतिक कारण क्या है। घनश्याम सिंह ने कहा कि नरोत्तम मिश्रा के सीन से हटने के बाद यह लड़ाई बेहद आसान हो गई है।

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नरोत्तम मिश्रा का टिकट क्यों कटा?

TV9 भारतवर्ष के मुताबिक घनश्याम सिंह का दावा है कि नरोत्तम मिश्रा का टिकट सिर्फ चुनावी रणनीति का फैसला नहीं था, बल्कि भाजपा की अंदरूनी राजनीति का नतीजा था। उन्होंने कहा कि नरोत्तम मिश्रा भाजपा के सबसे अनुभवी और प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। अगर वे चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचते तो कैबिनेट में उनकी वापसी लगभग तय मानी जाती और आगे चलकर वे मुख्यमंत्री पद के दावेदार भी बन सकते थे।

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घनश्याम सिंह ने कहा,भोपाल में बैठे सीनियर नेताओं और खुद सीएम मोहन यादव को इस बात का डर सता रहा था कि अगर नरोत्तम मिश्रा उपचुनाव जीतकर वापस विधानसभा पहुंच गए, तो कैबिनेट मंत्री तो बनेंगे ही, साथ ही भविष्य में मुख्यमंत्री पद के लिए भी एक बड़े दावेदार के रूप में खड़े हो जाएंगे।

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बीजेपी के दूसरे सीनियर लीडर्स कभी नहीं चाहते थे कि भोपाल की सत्ता में एक और ताकतवर हिस्सेदार आकर बैठ जाए। इसलिए रणनीति के तहत यह तय किया गया कि अगर वह पिछला चुनाव हार चुके हैं, तो उन्हें अब मुख्यधारा की राजनीति से नीचे ही रखा जाए।

राजनीति का यह कड़वा सच है कि जो नेता बहुत ज्यादा चतुर, सक्षम या योग्य होता है, पार्टी के भीतर ही सबसे पहले उसका रास्ता रोका जाता है और यही नरोत्तम मिश्रा के साथ भी हुआ। हालांकि यह पूरा दावा घनश्याम सिंह का है और भाजपा की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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आशुतोष तिवारी को कितना बड़ा मुकाबला मानते हैं?

बीजेपी ने दतिया से इस बार आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा है, लेकिन कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह उन्हें कोई चुनौती ही नहीं मानते। घनश्याम सिंह का कहना है कि दतिया की जनता, खासकर ग्रामीण इलाकों के लोग आशुतोष तिवारी को नाम से भी नहीं जानते क्योंकि उन्होंने जिले में कभी कोई काम ही नहीं किया।

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इसके पीछे की इनसाइड स्टोरी बताते हुए घनश्याम सिंह ने दावा किया कि आशुतोष तिवारी साल 2023 के मुख्य चुनाव में सेवढ़ा सीट से लड़ना चाहते थे। जब वहां बात नहीं बनी, तो उन्होंने एक सोची-समझी रणनीति के तहत नरोत्तम मिश्रा से हाथ मिलाया और अपने मौसी के लड़के सुरेंद्र भदौरिया को बीजेपी का जिला अध्यक्ष बनवा दिया।

प्लान यह था कि जिला अध्यक्ष के रसूख का इस्तेमाल करके अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग कराए जाएंगे और दो-तीन साल में अपनी तगड़ी जमीन तैयार कर ली जाएगी। लेकिन पासा उलटा पड़ गया। जिला अध्यक्ष पर जमीनों पर कब्जे करने के आरोप लगने लगे, जिससे जनता के बीच आशुतोष तिवारी की बनी-बनाई फील्ड भी पूरी तरह खराब हो गई।

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भीतरघात का डर: क्या नरोत्तम मिश्रा के समर्थक दिलाएंगे कांग्रेस को जीत?

नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद उनके समर्थकों के रुख को लेकर भी कांग्रेस उम्मीदवार ने बड़ा दावा किया है। घनश्याम सिंह का मानना है कि नरोत्तम मिश्रा बहुत मझे हुए खिलाड़ी हैं और इतनी बड़ी सियासी चोट खाने के बाद कोई भी स्वाभिमानी नेता चुप नहीं बैठ सकता। इस अंदरूनी गुस्से का सीधा फायदा कांग्रेस को मिलने जा रहा है।

उन्होंने बताया कि मैंने खुद कभी नरोत्तम मिश्रा या उनके करीबियों से संपर्क नहीं किया, लेकिन मिश्रा के समर्थक खुद हमारे पास आ रहे हैं। वे साफ कह रहे हैं कि अगर ऊपर से पड़ने वाले भारी दबाव के चलते नरोत्तम मिश्रा मंच पर आकर बीजेपी के पक्ष में वोट करने की अपील भी कर दें, तो भी जमीनी कार्यकर्ता अब आशुतोष तिवारी का साथ नहीं देंगे। इन लोगों ने मन बना लिया है कि वे अंदरखाने कांग्रेस की ही मदद करेंगे।

डैमेज कंट्रोल के लिए डिप्टी सीएम की एंट्री

दतिया में मचे इस बवाल को शांत करने के लिए बीजेपी आलाकमान ने उप-मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा को मोर्चे पर उतारा है। हाल ही में नरोत्तम मिश्रा ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से भी मुलाकात की थी, जिससे यह दिखाने की कोशिश की गई कि सब कुछ ठीक है। लेकिन घनश्याम सिंह का कहना है कि यह सिर्फ एक दिखावा है, इससे कोई डैमेज कंट्रोल नहीं हुआ है।

नरोत्तम मिश्रा इतने बड़े नेता हैं कि वह खुलेआम बगावत करके पार्टी से बाहर तो नहीं जाएंगे, लेकिन वह आशुतोष तिवारी को किसी भी हाल में जीतने नहीं देंगे। वह सिर्फ फोटो खिंचवाने और औपचारिकता पूरी करने के लिए बीजेपी के साथ दिखेंगे, जबकि उनके वोटर और कार्यकर्ता धीरे-धीरे कांग्रेस के पाले में खिसक चुके हैं। इन हालातों को देखते हुए दतिया में कांग्रेस अपनी जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है।

English Summary

Datia bypoll Ghanshyam Singh on narottam mishra ticket cm mohan yadav bjp analysis