CM Vijay Karur Stampede Memorial Announcement: तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों एक नया भूचाल आया हुआ है। सूबे के नए मुख्यमंत्री और 'तमिलगा वेत्री कजगम' (TVK) के चीफ सी. जोसेफ विजय शुक्रवार (10 जुलाई 2026) को पहली बार उस जगह पहुंचे, जिसने उनके सियासी सफर को सबसे गहरा जख्म दिया था। बात हो रही है करूर की जहां पिछले साल 27 सितंबर 2025 को विजय के रोड शो के दौरान मची भगदड़ में 41 मासूमों की जान चली गई थी। मई में मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद विजय पहली बार यहां पहुंचे तो उनका दर्द छलक पड़ा।
उन्होंने एक बड़ा दांव खेलते हुए ऐलान किया कि इस हादसे में जान गंवाने वालों की याद में एक मेमोरियल (स्मारक) बनाया जाएगा, लेकिन इसके लिए सरकारी खजाने से एक भी रुपया नहीं लिया जाएगा। यह मेमोरियल उनकी अपनी पार्टी TVK बनाएगी। विजय ने सार्वजनिक मंच से कहा कि जिंदगी में चाहे कितनी भी सफलता मिल जाए लेकिन 27 सितंबर 2025 की उस त्रासदी का दर्द कभी खत्म नहीं होगा।
करूर के एटलस ग्राउंड में उमड़े जनसैलाब के सामने बोलते हुए सीएम विजय काफी भावुक नजर आए। उन्होंने साफ कहा कि इंसान जिंदगी में चाहे कितनी भी बड़ी कामयाबी हासिल कर ले, कुछ जख्म ऐसे होते हैं जो कभी नहीं भरते। उनके लिए करूर का यह हादसा जिंदगी का सबसे बड़ा दर्द है। विजय ने कहा, "टीवी पर मुझे देखते ही जो बच्चे 'विजय अंकल' कहकर मुस्कुराते थे, हमने उन भगवान जैसे मासूम बच्चों को खो दिया। जब मैं इस दुख में डूबा था, तब विरोधी मुझ पर हंस रहे थे और ताने मार रहे थे कि मैं डरकर छिप गया हूं।" अपने भाषण में सीएम विजय ने उस वक्त की विपक्षी पार्टी और तत्कालीन डीएमके (DMK) सरकार पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। अपनी 'पीपुल्स मीट' मुहिम के दिनों को याद करते हुए विजय ने बताया कि जब वो नमक्कल से करूर आ रहे थे, तो पुलिस ने उन्हें भीड़ को लेकर कोई चेतावनी नहीं दी थी। विजय के मुताबिक इससे पहले पेरम्बलुर में भीड़ ज्यादा होने पर पुलिस ने उन्हें प्रोग्राम रद्द करने की सलाह दी थी, जिसे उन्होंने माना भी था। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर करूर में पुलिस को लग रहा था कि भीड़ काबू से बाहर हो सकती है, तो उन्होंने प्रोग्राम को रोकने का अपना हक क्यों इस्तेमाल नहीं किया? वो खुद पुलिस पर पूरा भरोसा करके वहां गए थे। विजय ने सीधे जनता से पूछा कि क्या उस दिन सुरक्षा के इंतजाम सही थे? उन्होंने इसे अपने खिलाफ एक सोची-समझी साजिश करार दिया। इस पूरे मामले में सबसे दिलचस्प बात यह है कि विजय ने इस स्मारक को सरकारी प्रोजेक्ट नहीं बनाया। आलोचकों का मानना है कि अगर सरकार के पैसे से यह बनता, तो विपक्ष इसे टैक्सपेयर्स के पैसे की बर्बादी या अपनी गलती छुपाने की कोशिश बताता। विजय ने साफ किया कि आने वाली पीढ़ियां इस बात को याद रखें कि उनके खिलाफ क्या खेल खेला गया था और कैसे इस हादसे पर गंदी राजनीति की गई थी, इसलिए यह मेमोरियल TVK पार्टी अपने फंड से करूर में खड़ा करेगी। इसके साथ ही उन्होंने DMK को भ्रष्टाचार की 'वेंडिंग मशीन' बताते हुए आने वाले उपचुनाव में इस 'बुरी ताकत' को उखाड़ फेंकने की अपील की। सियासी बयानों के बीच विजय ने पीड़ित परिवारों की मदद के लिए भी कदम बढ़ाए हैं। कलेक्ट्रेट और एटलस कलैयरंगम में हुए कार्यक्रमों के दौरान मुख्यमंत्री ने भगदड़ का शिकार हुए 31 पीड़ित परिवारों के सदस्यों को अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरियों के अपॉइंटमेंट लेटर (नियुक्ति पत्र) सौंपे। इस कदम को रोकने के लिए मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच में एक याचिका भी लगाई गई थी लेकिन कोर्ट ने इस पर स्टे लगाने से साफ इनकार कर दिया। हालांकि हाई कोर्ट ने यह साफ किया है कि ये नौकरियां अभी अस्थायी रहेंगी और सुप्रीम कोर्ट में चल रहे करूर हादसे के केस के आखिरी फैसले पर निर्भर करेंगी। इस हाई-प्रोफाइल दौरे के दौरान सुरक्षा में चूक का एक बड़ा मामला भी सामने आया। जब सीएम विजय का काफिला गुजर रहा था, तब एक अनजान शख्स बैरिकेड्स तोड़कर सीधे उनकी गाड़ियों की तरफ दौड़ पड़ा। हालांकि तैनात सुरक्षाकर्मियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए तुरंत उसे दबोच लिया और काफिला बिना रुके आगे बढ़ गया। विजय के स्वागत के लिए पूरे करूर में भारी पुलिस फोर्स तैनात थी और एंट्री के लिए क्यूआर कोड (QR Code) जैसे हाई-टेक इंतजाम किए गए थे फिर भी हजारों की तादाद में पहुंचे फैंस ने अपने नेता पर फूलों की बारिश की।जब करूर में भावुक हुए सीएम विजय
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